बैंक भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़ा: सीबीआई ने CGST इंस्पेक्टर समेत चार गिरफ्तार, दिल्ली-बिहार-हरियाणा में नेटवर्क
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 8 अक्टूबर 2026 को बैंक भर्ती परीक्षाओं में फर्जी अभ्यर्थी बैठाने वाले एक सुनियोजित गिरोह का भंडाफोड़ किया, जिसमें केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग के एक इंस्पेक्टर सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यह गिरोह दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में सक्रिय था और वास्तविक उम्मीदवारों की पहचान अपनाकर परीक्षा तथा इंटरव्यू में शामिल होता था।
मामले की पृष्ठभूमि
सीबीआई के अनुसार यह कार्रवाई इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सिलेक्शन (IBPS) की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर की गई। सीबीआई की स्पेशल टास्क ब्रांच, मुंबई ने विभिन्न राज्यों में एक साथ समन्वित छापेमारी अभियान चलाकर चारों आरोपियों को धर दबोचा। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में धोखाधड़ी के मामले देशभर में चिंता का विषय बने हुए हैं।
गिरोह का तौर-तरीका
जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपी बैंक भर्ती की पूरी प्रक्रिया — लिखित परीक्षा से लेकर साक्षात्कार तक — में वास्तविक उम्मीदवारों का रूप धारण कर चयन प्रणाली में सेंध लगाते थे। गिरोह ने कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैला रखा था और सुनियोजित तरीके से भर्ती प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा था। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क में और भी सहयोगी शामिल हो सकते हैं।
सीबीआई का बयान
सीबीआई ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँचाती हैं, बल्कि ईमानदारी से तैयारी करने वाले वास्तविक अभ्यर्थियों के वैध अवसर भी छीन लेती हैं। एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
चंडीगढ़ में रिश्वत मामले में भी कार्रवाई
इसी क्रम में सीबीआई ने एक अलग प्रकरण में चंडीगढ़ नगर निगम (Municipal Corporation) में कार्यरत एक सैनिटरी इंस्पेक्टर को भी रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया। उसके विरुद्ध 7 अक्टूबर 2026 को मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उसने एक ठेकेदार की फर्म के लंबित और भविष्य के बिल पास करने के बदले ₹14 लाख की रिश्वत मांगी थी।
अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर ठेकेदार को यह धमकी भी दी थी कि रिश्वत न मिलने पर उसकी फर्म के बिल रोक दिए जाएंगे और टेंडर रद्द कराया जा सकता है। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी को ₹14 लाख की कुल मांग में से ₹5 लाख की पहली किस्त स्वीकार करते समय रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
आगे की जांच
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंक भर्ती घोटाले से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान और पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुँचने के लिए जांच जारी है। गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है — देशभर में भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के बढ़ते मामलों ने केंद्र और राज्य सरकारों के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी रोकने के लिए परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी निगरानी को और सख्त करने की ज़रूरत है।