1 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

चेन्नई CBI कोर्ट का बड़ा फैसला: ₹2.68 करोड़ बैंक धोखाधड़ी में मेसर्स जैलानी स्टील समेत 7 दोषी करार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
चेन्नई CBI कोर्ट का बड़ा फैसला: ₹2.68 करोड़ बैंक धोखाधड़ी में मेसर्स जैलानी स्टील समेत 7 दोषी करार

सारांश

18 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद चेन्नई की CBI अदालत ने ₹2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स समेत 7 दोषियों को सजा सुनाई। फर्जी दस्तावेजों से क्रेडिट सुविधाएँ लेने का यह मामला 2008 में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज हुआ था।

मुख्य बातें

चेन्नई की CBI विशेष अदालत ने 31 अगस्त 2026 को ₹2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में 7 आरोपियों को दोषी ठहराया।
मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स पर ₹20,000 जुर्माना; एस.
अमरुद्दीन को 2 वर्ष सश्रम कारावास।
शेष 5 दोषियों को 6-6 महीने की सश्रम कारावास और संयुक्त ₹60,000 जुर्माना।
मामला 21 अप्रैल 2008 को यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज; चार्जशीट 23 जून 2009 को दाखिल।
ट्रायल के दौरान 4 आरोपियों की मृत्यु; 2 अन्य बरी , 1 आरोपमुक्त ।

चेन्नई की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने 31 अगस्त 2026 को ₹2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स सहित 7 आरोपियों को दोषी ठहराया। यह मामला 21 अप्रैल 2008 को यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज किया गया था, और करीब 18 वर्षों की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुनाया।

मुख्य घटनाक्रम

CBI ने जांच पूरी होने के बाद 23 जून 2009 को मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स और 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न क्रेडिट सुविधाएँ प्राप्त कीं और बैंक के धन का गबन किया।

दोषी ठहराए गए व्यक्तियों में एस. अमरुद्दीन, एल. विजयलक्ष्मी, एम. शांति, एस. कामाक्षी, एम. शिवकुमार और एम. रविचंद्रन बाबू शामिल हैं।

सजा और जुर्माने का विवरण

अदालत ने एस. अमरुद्दीन को 2 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। शेष पाँच दोषियों — एल. विजयलक्ष्मी, एम. शांति, एस. कामाक्षी, एम. शिवकुमार और एम. रविचंद्रन बाबू — को 6-6 महीने की सश्रम कारावास की सजा दी गई है।

आर्थिक दंड के रूप में मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया गया है, जबकि उक्त 6 व्यक्तिगत आरोपियों पर संयुक्त रूप से ₹60,000 का जुर्माना आरोपित किया गया है।

जो बरी हुए और जिनके आरोप समाप्त हुए

ट्रायल के दौरान 4 निजी आरोपियोंजैलानी बीवी, ए. श्रीनिवासन, एन. मनोहरण और एस. जी. शेखर — की मृत्यु हो जाने के कारण उनके विरुद्ध आरोप स्वतः समाप्त कर दिए गए। यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन शाखा प्रबंधक एस.आर. ज्ञानशेखर और निजी व्यक्ति एम. चक्रवर्ती को अदालत ने बरी कर दिया। वहीं, बैंक के पैनल अधिवक्ता पी.बी. संपत कुमार को आरोपमुक्त किया गया।

मामले का महत्व

यह मामला बैंकिंग धोखाधड़ी के विरुद्ध CBI की दीर्घकालिक जांच क्षमता का उदाहरण है। गौरतलब है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए क्रेडिट सुविधाएँ हासिल करने के इस तरह के मामले भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए एक पुरानी चुनौती रहे हैं। यह फैसला उस व्यापक प्रवृत्ति की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें अदालतें बैंक धोखाधड़ी के मामलों में सख्त रुख अपना रही हैं।

आगे की स्थिति

दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। CBI का यह फैसला वित्तीय अपराधों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक कई आरोपी या तो मर चुके होते हैं या सबूत कमजोर पड़ चुके होते हैं। ₹2.68 करोड़ की यह धोखाधड़ी भले ही आज छोटी लगे, लेकिन 2008 में यह सार्वजनिक बैंकों की उस प्रणालीगत कमजोरी को उजागर करती थी जिसका फायदा फर्जी दस्तावेजों से उठाया जाता था। असली सवाल यह है कि क्या इतने लंबे ट्रायल से निवारण का संदेश जाता है, या देरी ही अपराधियों को प्रोत्साहित करती है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चेन्नई CBI कोर्ट के बैंक धोखाधड़ी मामले में क्या फैसला आया?
चेन्नई की CBI विशेष अदालत ने 31 अगस्त 2026 को मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स सहित 7 आरोपियों को ₹2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में दोषी ठहराया। एस. अमरुद्दीन को 2 वर्ष और शेष 5 व्यक्तियों को 6-6 महीने की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।
मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स पर क्या आरोप था?
आरोप था कि मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स और अन्य आरोपियों ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज जमा किए और विभिन्न क्रेडिट सुविधाएँ हासिल कर बैंक के धन का गबन किया।
यह मामला कब और कैसे शुरू हुआ?
CBI ने यह मामला 21 अप्रैल 2008 को यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज किया था। जांच के बाद 23 जून 2009 को 14 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
किन आरोपियों को बरी किया गया या जिनके आरोप समाप्त हुए?
ट्रायल के दौरान 4 निजी आरोपियों — जैलानी बीवी, ए. श्रीनिवासन, एन. मनोहरण और एस. जी. शेखर — की मृत्यु होने से उनके आरोप समाप्त हुए। शाखा प्रबंधक एस.आर. ज्ञानशेखर और एम. चक्रवर्ती को बरी किया गया, जबकि पैनल अधिवक्ता पी.बी. संपत कुमार को आरोपमुक्त किया गया।
दोषियों पर कितना जुर्माना लगाया गया?
मेसर्स जैलानी स्टील ट्रेडर्स पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया गया। 6 व्यक्तिगत दोषियों पर संयुक्त रूप से ₹60,000 का जुर्माना आरोपित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले