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चेन्नई सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी में आठ दोषियों को 10 साल की कठोर सजा सुनाई, ₹1.97 करोड़ की ठगी

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चेन्नई सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी में आठ दोषियों को 10 साल की कठोर सजा सुनाई, ₹1.97 करोड़ की ठगी

सारांश

चेन्नई सीबीआई अदालत ने 15 साल पुराने एसबीआई धोखाधड़ी मामले में आठ दोषियों को 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। दो बैंक अधिकारियों समेत छह निजी व्यक्तियों ने मिलकर 728 फर्जी डेयरी ऋणों से बैंक को ₹1.97 करोड़ का नुकसान पहुँचाया था।

मुख्य बातें

चेन्नई सीबीआई अदालत ने 31 जुलाई 2026 को एसबीआई बैंक धोखाधड़ी मामले में आठ आरोपियों को दोषी ठहराया।
सभी दोषियों को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
शंकर पर ₹50 लाख तथा शेष तीन पर ₹20 लाख जुर्माना लगाया गया।
धोखाधड़ी में 728 फर्जी डेयरी ऋण शामिल थे, जिनसे एसबीआई को ₹1,97,27,692 का नुकसान हुआ।
मामला 23 सितंबर 2011 में दर्ज हुआ था; के.
रविचंद्रन की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो जाने से उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हुई।
दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है।

चेन्नई की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने 31 जुलाई 2026 को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ की गई ₹1,97,27,692 रुपये की धोखाधड़ी के मामले में आठ आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोषियों में दो सरकारी बैंक कर्मचारी और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं, जिन्होंने मिलकर 728 फर्जी डेयरी ऋण स्वीकृत कराए थे।

कौन हैं दोषी और क्या है सजा

अदालत ने दो पूर्व सरकारी कर्मचारियों — एन. गोपालकृष्णन (तत्कालीन शाखा प्रबंधक, एसबीआई चेंगम शाखा) और पी. बालमुरली (तत्कालीन ग्रामीण विपणन एवं वसूली अधिकारी) — सहित निजी व्यक्तियों आर. वेंकटरामन, एस. रवि, डी. शंकर, आर. राजन, पी. पन्नीरसेल्वम और टी. मुरुगन को दोषी करार दिया। सभी आठों को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।

जुर्माने के मामले में अदालत ने दो स्तर तय किए: एन. गोपालकृष्णन, पी. बालमुरली, आर. वेंकटरामन, एस. रवि और डी. शंकर पर ₹50 लाख का जुर्माना लगाया गया, जबकि आर. राजन, पी. पन्नीरसेल्वम और टी. मुरुगन पर ₹20 लाख का जुर्माना निर्धारित किया गया।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई धोखाधड़ी

सीबीआई ने यह मामला 23 सितंबर 2011 को एसबीआई, चेंगलपेट के क्षेत्र-पाँच के क्षेत्रीय प्रबंधक की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि तत्कालीन अधिकारी पी. बालमुरली ने के. पुरुषोत्तमन (चेंगम तालुक स्थित मेसर्स कंथम्मा मिल्क चिलिंग प्लांट के मालिक) और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर त्रिपक्षीय समझौते के तहत 728 डेयरी ऋण स्वीकृत कराए। इन ऋणों की कुल राशि ₹2,32,96,000 थी।

गौरतलब है कि ये सभी ऋण कथित उधारकर्ताओं के नाम पर धोखाधड़ीपूर्ण और जाली आवेदनों के आधार पर स्वीकृत किए गए थे। डेयरी ऋणों के लिए निर्धारित पूर्व और पश्चात स्वीकृति की अनिवार्य औपचारिकताओं का जानबूझकर पालन नहीं किया गया, जिससे बैंक को ₹1,97,27,692 का वास्तविक नुकसान हुआ।

आरोपपत्र और मुकदमे की यात्रा

जांच पूरी होने पर सीबीआई ने 25 जून 2013 को 10 आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया, जिनमें के. पुरुषोत्तमन और के. रविचंद्रन भी शामिल थे। निचली अदालत ने 1 मई 2016 को आरोप औपचारिक रूप से तय किए। मुकदमे की सुनवाई के दौरान के. पुरुषोत्तमन और के. रविचंद्रन का निधन हो जाने के कारण उनके विरुद्ध कार्यवाही स्वतः समाप्त हो गई। शेष आठ आरोपियों के मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें दोषी पाया।

इस फैसले का महत्त्व

यह मामला इस दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है कि इसमें सरकारी बैंक के भीतर बैठे अधिकारियों ने ही बाहरी व्यक्तियों के साथ मिलकर व्यवस्थागत तरीके से फर्जीवाड़ा किया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बैंक धोखाधड़ी के मामलों में सजा की दर को लेकर बहस जारी है। 15 वर्षों की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया यह फैसला सीबीआई की अभियोजन क्षमता का भी उदाहरण है।

आगे क्या

दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। जुर्माने की वसूली और ऋण राशि की भरपाई की प्रक्रिया अब अदालत के निर्देशानुसार आगे बढ़ेगी। इस फैसले से भविष्य में बैंक अधिकारियों द्वारा ऋण स्वीकृति में बरती जाने वाली लापरवाही या मिलीभगत पर अंकुश लगाने का संदेश जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे मामले दोहराते रहेंगे — सजा चाहे कितनी भी कड़ी हो।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चेन्नई सीबीआई कोर्ट ने किस मामले में सजा सुनाई?
चेन्नई सीबीआई अदालत ने एसबीआई चेंगम शाखा से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में 31 जुलाई 2026 को आठ दोषियों को 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में 728 फर्जी डेयरी ऋणों के जरिए बैंक को ₹1,97,27,692 का नुकसान पहुँचाया गया था।
इस धोखाधड़ी में कितने रुपये का नुकसान हुआ और कैसे?
कथित उधारकर्ताओं के नाम पर जाली और धोखाधड़ीपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर ₹2,32,96,000 के 728 डेयरी ऋण स्वीकृत किए गए, जिससे बैंक को ₹1,97,27,692 का वास्तविक नुकसान हुआ। अनिवार्य पूर्व और पश्चात स्वीकृति औपचारिकताओं को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।
दोषियों पर कितना जुर्माना लगाया गया है?
अदालत ने दो स्तरों पर जुर्माना तय किया — एन. गोपालकृष्णन, पी. बालमुरली, आर. वेंकटरामन, एस. रवि और डी. शंकर पर ₹50 लाख, जबकि आर. राजन, पी. पन्नीरसेल्वम और टी. मुरुगन पर ₹20 लाख का जुर्माना लगाया गया।
यह मामला कब दर्ज हुआ था और सीबीआई ने कब आरोपपत्र दाखिल किया?
सीबीआई ने यह मामला 23 सितंबर 2011 को एसबीआई चेंगलपेट के क्षेत्रीय प्रबंधक की शिकायत पर दर्ज किया था। जांच पूरी होने के बाद 25 जून 2013 को 10 आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया गया और 1 मई 2016 को निचली अदालत ने आरोप तय किए।
मूल रूप से 10 आरोपी थे, तो केवल 8 को सजा क्यों हुई?
मुकदमे की सुनवाई के दौरान दो मुख्य आरोपी — के. पुरुषोत्तमन (मेसर्स कंथम्मा मिल्क चिलिंग प्लांट के मालिक) और के. रविचंद्रन — का निधन हो गया, जिसके कारण उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही स्वतः समाप्त हो गई। शेष आठ आरोपियों को अदालत ने दोषी पाया।
राष्ट्र प्रेस
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