चेन्नई सीबीआई अदालत का फैसला: ₹2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में जेलानी स्टील और 6 दोषी करार
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 1 सितंबर 2026 को ₹2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में स्टील ट्रेडिंग फर्म एम/एस जेलानी स्टील ट्रेडर्स और छह व्यक्तियों को दोषी ठहराया। यह मामला यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें जाली दस्तावेजों के ज़रिए क्रेडिट सुविधाएँ हासिल करने का आरोप है।
मुख्य घटनाक्रम
अदालत ने एस. अमुरुदीन, एल. विजयलक्ष्मी, एम. शांति, एस. कामाक्षी, एम. शिवकुमार और एम. रविचंद्रन बाबू को दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन सभी ने मिलकर आपराधिक साजिश रची और बैंक से धोखाधड़ी से विभिन्न क्रेडिट सुविधाएँ प्राप्त कीं।
सीबीआई ने यह मामला 21 अप्रैल 2008 को यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। जाँच पूरी होने के बाद 23 जून 2009 को फर्म और 13 व्यक्तियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई थी।
सज़ा और जुर्माना
अदालत ने अमुरुदीन को दो वर्ष की कठोर कारावास की सज़ा सुनाई, जबकि शेष पाँचों दोषियों में से प्रत्येक को छह महीने की कठोर कारावास की सज़ा दी गई। दोषी ठहराए गए छह व्यक्तियों पर कुल ₹60,000 का जुर्माना लगाया गया, और फर्म पर अलग से ₹20,000 का जुर्माना आरोपित किया गया।
धोखाधड़ी का तरीका
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने क्रेडिट सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए झूठे और जाली दस्तावेजों का उपयोग किया। इसके अलावा, स्वीकृत फंड का दुरुपयोग एवं हेराफेरी की गई, जिससे बैंक को कुल ₹2.68 करोड़ का नुकसान हुआ। वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की विस्तृत जाँच के बाद यह साबित हुआ कि आरोपियों ने मिलकर धन प्राप्त करने और उसके दुरुपयोग की योजना बनाई थी।
आरोपमुक्त किए गए व्यक्ति
अदालत ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन शाखा प्रबंधकों एस.आर. ज्ञानसेकर और एम. चक्रवर्ती को बरी कर दिया। बैंक के पैनल वकील पी.बी. संपत कुमार, जिन्हें भी आरोपी बनाया गया था, उन्हें भी अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।
क्या होगा आगे
यह मामला दो दशक से अधिक समय तक अदालत में चला। गौरतलब है कि 2009 में दाखिल चार्जशीट में 13 व्यक्तियों के नाम थे, किंतु अंततः सात के खिलाफ फैसला सुनाया गया — शेष को या तो बरी किया गया या मामले के दौरान कार्यवाही से अलग किया गया। यह फैसला बैंकिंग धोखाधड़ी के दीर्घकालिक मुकदमों में सीबीआई की सफलता का उदाहरण बना है।