1 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

चेन्नई सीबीआई अदालत का फैसला: ₹2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में जेलानी स्टील और 6 दोषी करार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
चेन्नई सीबीआई अदालत का फैसला: ₹2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में जेलानी स्टील और 6 दोषी करार

सारांश

चेन्नई की सीबीआई अदालत ने 17 साल पुराने ₹2.68 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में जेलानी स्टील ट्रेडर्स समेत छह लोगों को दोषी ठहराया। जाली दस्तावेजों और फंड की हेराफेरी से यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को नुकसान पहुँचाने का यह मामला भारत में दीर्घकालिक बैंकिंग धोखाधड़ी मुकदमों की जटिलता को उजागर करता है।

मुख्य बातें

चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने 1 सितंबर 2026 को ₹2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में एम/एस जेलानी स्टील ट्रेडर्स और 6 व्यक्तियों को दोषी ठहराया।
अमुरुदीन को 2 वर्ष की कठोर कारावास; शेष पाँचों को 6-6 महीने की सज़ा।
छह दोषियों पर कुल ₹60,000 और फर्म पर ₹20,000 का जुर्माना।
मामला 21 अप्रैल 2008 को यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज हुआ था; चार्जशीट 23 जून 2009 को दाखिल।
तत्कालीन बैंक अधिकारी एस.आर.
चक्रवर्ती और वकील पी.बी.
संपत कुमार को अदालत ने बरी किया।

चेन्नई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 1 सितंबर 2026 को ₹2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में स्टील ट्रेडिंग फर्म एम/एस जेलानी स्टील ट्रेडर्स और छह व्यक्तियों को दोषी ठहराया। यह मामला यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें जाली दस्तावेजों के ज़रिए क्रेडिट सुविधाएँ हासिल करने का आरोप है।

मुख्य घटनाक्रम

अदालत ने एस. अमुरुदीन, एल. विजयलक्ष्मी, एम. शांति, एस. कामाक्षी, एम. शिवकुमार और एम. रविचंद्रन बाबू को दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन सभी ने मिलकर आपराधिक साजिश रची और बैंक से धोखाधड़ी से विभिन्न क्रेडिट सुविधाएँ प्राप्त कीं।

सीबीआई ने यह मामला 21 अप्रैल 2008 को यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। जाँच पूरी होने के बाद 23 जून 2009 को फर्म और 13 व्यक्तियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई थी।

सज़ा और जुर्माना

अदालत ने अमुरुदीन को दो वर्ष की कठोर कारावास की सज़ा सुनाई, जबकि शेष पाँचों दोषियों में से प्रत्येक को छह महीने की कठोर कारावास की सज़ा दी गई। दोषी ठहराए गए छह व्यक्तियों पर कुल ₹60,000 का जुर्माना लगाया गया, और फर्म पर अलग से ₹20,000 का जुर्माना आरोपित किया गया।

धोखाधड़ी का तरीका

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने क्रेडिट सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए झूठे और जाली दस्तावेजों का उपयोग किया। इसके अलावा, स्वीकृत फंड का दुरुपयोग एवं हेराफेरी की गई, जिससे बैंक को कुल ₹2.68 करोड़ का नुकसान हुआ। वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की विस्तृत जाँच के बाद यह साबित हुआ कि आरोपियों ने मिलकर धन प्राप्त करने और उसके दुरुपयोग की योजना बनाई थी।

आरोपमुक्त किए गए व्यक्ति

अदालत ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन शाखा प्रबंधकों एस.आर. ज्ञानसेकर और एम. चक्रवर्ती को बरी कर दिया। बैंक के पैनल वकील पी.बी. संपत कुमार, जिन्हें भी आरोपी बनाया गया था, उन्हें भी अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।

क्या होगा आगे

यह मामला दो दशक से अधिक समय तक अदालत में चला। गौरतलब है कि 2009 में दाखिल चार्जशीट में 13 व्यक्तियों के नाम थे, किंतु अंततः सात के खिलाफ फैसला सुनाया गया — शेष को या तो बरी किया गया या मामले के दौरान कार्यवाही से अलग किया गया। यह फैसला बैंकिंग धोखाधड़ी के दीर्घकालिक मुकदमों में सीबीआई की सफलता का उदाहरण बना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन छोटे स्तर की संगठित धोखाधड़ी की जड़ें और उनका दीर्घकालिक बोझ न्यायतंत्र पर उतना ही गहरा पड़ता है। तीन आरोपियों का बरी होना यह भी दर्शाता है कि अभियोजन पक्ष सभी नामित व्यक्तियों के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य नहीं जुटा पाया — जो सीबीआई की जाँच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चेन्नई सीबीआई अदालत ने किस मामले में फैसला सुनाया?
चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के साथ ₹2.68 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में एम/एस जेलानी स्टील ट्रेडर्स और छह व्यक्तियों को दोषी ठहराया। यह मामला मूलतः 2008 में दर्ज हुआ था।
दोषी पाए गए लोगों को क्या सज़ा मिली?
मुख्य आरोपी एस. अमुरुदीन को दो वर्ष की कठोर कारावास की सज़ा दी गई, जबकि शेष पाँचों दोषियों को छह-छह महीने की कठोर कारावास मिली। सभी छह दोषियों पर कुल ₹60,000 और फर्म पर ₹20,000 का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया।
जेलानी स्टील ट्रेडर्स ने बैंक के साथ धोखाधड़ी कैसे की?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने झूठे और जाली दस्तावेजों के ज़रिए यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया से क्रेडिट सुविधाएँ हासिल कीं और स्वीकृत फंड का दुरुपयोग एवं हेराफेरी की। इससे बैंक को ₹2.68 करोड़ का नुकसान हुआ।
इस मामले में किन्हें बरी किया गया?
अदालत ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन शाखा प्रबंधकों एस.आर. ज्ञानसेकर और एम. चक्रवर्ती को बरी कर दिया। बैंक के पैनल वकील पी.बी. संपत कुमार को भी दोषमुक्त किया गया।
यह मामला इतने लंबे समय तक क्यों चला?
सीबीआई ने 2008 में मामला दर्ज कर 2009 में 13 व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कई आरोपियों और साक्ष्यों की जटिलता के कारण मुकदमा कई वर्षों तक चला और अंततः 2026 में फैसला आया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले