बारां में कूलर के करंट से तीन मासूम बहनों की मौत, माता-पिता खेत में थे मजदूरी पर
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के बारां जिले में शनिवार, 15 अगस्त को एक दर्दनाक हादसे में तीन सगी बहनों की कूलर में करंट लगने से मौत हो गई। मृत बच्चियों में 7 वर्षीया सलोनी, 3 वर्षीया अवंतिका और 1 वर्षीया संध्या शामिल हैं। घटना के वक्त तीनों बच्चियाँ घर पर अकेली थीं, जबकि उनके माता-पिता खेत में मजदूरी पर गए हुए थे।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
सदर पुलिस स्टेशन के अधिकारी नवल किशोर मीणा के अनुसार, बच्चियों के पिता मदनलाल सहरिया मूल रूप से मध्य प्रदेश के गुना जिले के सिरसी पुलिस स्टेशन क्षेत्र के करनावता गाँव के रहने वाले हैं। वे फतेहपुर में एक किसान के यहाँ खेत मजदूर के रूप में काम करते हैं और अपने परिवार के साथ खेत पर ही रह रहे थे। घटना के समय माता-पिता दोनों काम पर गए हुए थे और तीनों बच्चियाँ घर में अकेली थीं।
पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि कूलर में बिजली की खराबी के कारण उपकरण में करंट आ गया, जिसकी चपेट में तीनों बच्चियाँ आ गईं। जब परिवार के सदस्य काम से लौटे तो उन्होंने तीनों को बेसुध अवस्था में पाया।
अस्पताल पहुँचाया, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुँचे और तीनों बच्चियों को तत्काल अस्पताल ले जाने में मदद की। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी सूचना मिलने पर अस्पताल पहुँचे। डॉक्टरों ने जाँच के बाद तीनों बच्चियों को मृत घोषित कर दिया। इस हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और जाँच
बारां के सब-डिविजनल ऑफिसर रामावतार मीणा ने बताया कि मौत की सूचना मिलते ही प्रशासन अस्पताल पहुँचा। पोस्टमार्टम के बाद तीनों शव परिवार को सौंप दिए गए हैं और शवों को उनके पैतृक गाँव ले जाने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने करंट लगने की घटना के कारणों की जाँच शुरू कर दी है। सब-डिविजनल ऑफिसर ने कहा कि सरकार के नियमों के अनुसार पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।
आम जनता और मजदूर परिवारों पर असर
यह घटना उन हजारों प्रवासी मजदूर परिवारों की कठिन परिस्थितियों को उजागर करती है जो खेतों पर रहते हुए काम करते हैं और जिनके बच्चे अक्सर दिन के समय बिना निगरानी के घर पर रहते हैं। बिजली उपकरणों की खराब स्थिति और खराब वायरिंग इस तरह के हादसों का बड़ा कारण बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे श्रमिक आवासों में बिजली सुरक्षा मानकों की नियमित जाँच आवश्यक है।