15 अगस्त 2026
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बारां में कूलर के करंट से तीन मासूम बहनों की मौत, माता-पिता खेत में थे मजदूरी पर

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बारां में कूलर के करंट से तीन मासूम बहनों की मौत, माता-पिता खेत में थे मजदूरी पर

सारांश

राजस्थान के बारां में तीन मासूम बहनें — 7 वर्षीया सलोनी, 3 वर्षीया अवंतिका और 1 वर्षीया संध्या — कूलर में करंट लगने से असमय काल के गाल में समा गईं। माता-पिता खेत में मजदूरी पर थे और बच्चियाँ घर पर अकेली थीं। प्रशासन ने जाँच शुरू की, परिवार को सरकारी मदद का आश्वासन दिया गया।

मुख्य बातें

राजस्थान के बारां जिले में 15 अगस्त 2026 को कूलर में करंट लगने से तीन सगी बहनों की मौत हुई।
मृत बच्चियाँ: 7 वर्षीया सलोनी , 3 वर्षीया अवंतिका और 1 वर्षीया संध्या ।
पिता मदनलाल सहरिया मध्य प्रदेश के गुना जिले के करनावता गाँव के मूल निवासी, फतेहपुर में खेत मजदूर।
घटना के समय माता-पिता खेत पर मजदूरी कर रहे थे, बच्चियाँ घर पर अकेली थीं।
पुलिस के अनुसार कूलर में बिजली की खराबी प्रारंभिक कारण; जाँच जारी।
पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंपे गए; पैतृक गाँव ले जाने की व्यवस्था की जा रही है।

राजस्थान के बारां जिले में शनिवार, 15 अगस्त को एक दर्दनाक हादसे में तीन सगी बहनों की कूलर में करंट लगने से मौत हो गई। मृत बच्चियों में 7 वर्षीया सलोनी, 3 वर्षीया अवंतिका और 1 वर्षीया संध्या शामिल हैं। घटना के वक्त तीनों बच्चियाँ घर पर अकेली थीं, जबकि उनके माता-पिता खेत में मजदूरी पर गए हुए थे।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा

सदर पुलिस स्टेशन के अधिकारी नवल किशोर मीणा के अनुसार, बच्चियों के पिता मदनलाल सहरिया मूल रूप से मध्य प्रदेश के गुना जिले के सिरसी पुलिस स्टेशन क्षेत्र के करनावता गाँव के रहने वाले हैं। वे फतेहपुर में एक किसान के यहाँ खेत मजदूर के रूप में काम करते हैं और अपने परिवार के साथ खेत पर ही रह रहे थे। घटना के समय माता-पिता दोनों काम पर गए हुए थे और तीनों बच्चियाँ घर में अकेली थीं।

पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि कूलर में बिजली की खराबी के कारण उपकरण में करंट आ गया, जिसकी चपेट में तीनों बच्चियाँ आ गईं। जब परिवार के सदस्य काम से लौटे तो उन्होंने तीनों को बेसुध अवस्था में पाया।

अस्पताल पहुँचाया, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुँचे और तीनों बच्चियों को तत्काल अस्पताल ले जाने में मदद की। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी सूचना मिलने पर अस्पताल पहुँचे। डॉक्टरों ने जाँच के बाद तीनों बच्चियों को मृत घोषित कर दिया। इस हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और जाँच

बारां के सब-डिविजनल ऑफिसर रामावतार मीणा ने बताया कि मौत की सूचना मिलते ही प्रशासन अस्पताल पहुँचा। पोस्टमार्टम के बाद तीनों शव परिवार को सौंप दिए गए हैं और शवों को उनके पैतृक गाँव ले जाने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने करंट लगने की घटना के कारणों की जाँच शुरू कर दी है। सब-डिविजनल ऑफिसर ने कहा कि सरकार के नियमों के अनुसार पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।

आम जनता और मजदूर परिवारों पर असर

यह घटना उन हजारों प्रवासी मजदूर परिवारों की कठिन परिस्थितियों को उजागर करती है जो खेतों पर रहते हुए काम करते हैं और जिनके बच्चे अक्सर दिन के समय बिना निगरानी के घर पर रहते हैं। बिजली उपकरणों की खराब स्थिति और खराब वायरिंग इस तरह के हादसों का बड़ा कारण बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे श्रमिक आवासों में बिजली सुरक्षा मानकों की नियमित जाँच आवश्यक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि केवल दुर्भाग्य। सवाल यह है कि श्रमिक आवासों में बिजली उपकरणों की सुरक्षा जाँच की कोई व्यवस्था है या नहीं, और क्या प्रशासन इस जाँच को महज खानापूर्ति तक सीमित रखेगा।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान के बारां में करंट से मौत की घटना क्या है?
बारां जिले में 15 अगस्त 2026 को तीन सगी बहनों — 7 वर्षीया सलोनी, 3 वर्षीया अवंतिका और 1 वर्षीया संध्या — की कूलर में करंट लगने से मौत हो गई। घटना के समय उनके माता-पिता खेत में मजदूरी पर गए हुए थे और बच्चियाँ घर पर अकेली थीं।
हादसे का कारण क्या बताया जा रहा है?
पुलिस की प्रारंभिक जाँच के अनुसार कूलर में बिजली की खराबी के कारण उपकरण में करंट आ गया, जिसकी चपेट में तीनों बच्चियाँ आ गईं। घटना के विस्तृत कारणों की जाँच अभी जारी है।
मृत बच्चियों के परिवार की पृष्ठभूमि क्या है?
बच्चियों के पिता मदनलाल सहरिया मध्य प्रदेश के गुना जिले के करनावता गाँव के मूल निवासी हैं। वे फतेहपुर में एक किसान के यहाँ खेत मजदूर के रूप में काम करते हैं और परिवार के साथ खेत पर ही रह रहे थे।
प्रशासन ने इस घटना पर क्या कदम उठाए हैं?
बारां के सब-डिविजनल ऑफिसर रामावतार मीणा के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिए गए हैं। प्रशासन ने करंट लगने के कारणों की जाँच शुरू की है और सरकारी नियमों के तहत पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
इस तरह के हादसों से बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार प्रवासी मजदूर आवासों में बिजली उपकरणों की नियमित सुरक्षा जाँच और खराब वायरिंग की समय पर मरम्मत आवश्यक है। बच्चों को अकेला छोड़ने की मजबूरी दूर करने के लिए श्रमिक बस्तियों में託託託 託बाल देखभाल सुविधाएँ भी ज़रूरी मानी जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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