बुलढाणा FDA कार्रवाई: खामगांव में ₹3.51 करोड़ का रिफाइंड सोयाबीन तेल जब्त, बिना लाइसेंस चल रहा था कारोबार
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के खामगांव में अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने 28 सितंबर 2026 को त्योहारी मौसम के बीच एक बड़ी छापेमारी में ₹3.51 करोड़ मूल्य का रिफाइंड सोयाबीन तेल जब्त किया। खामगांव एमआईडीसी स्थित मैसर्स एएम ओएल्स प्राइवेट लिमिटेड के परिसर से की गई यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और तेल की संदिग्ध गुणवत्ता के आधार पर की गई।
मुख्य घटनाक्रम
एफडीए के बुलढाणा विभाग ने 28 सितंबर को खामगांव एमआईडीसी परिसर में छापेमारी की। जाँच में सामने आया कि प्रतिष्ठान वैध खाद्य लाइसेंस के बिना खाद्य व्यवसाय का संचालन कर रहा था — जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का सीधा उल्लंघन है।
अधिकारियों ने परिसर में बड़ी मात्रा में खुला रिफाइंड सोयाबीन तेल भंडारित पाया। कुल 2,48,845.4 किलोग्राम तेल जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹3,50,87,201.40 रुपए (लगभग ₹3.51 करोड़) आँकी गई है। तेल की गुणवत्ता को लेकर भी संदेह जताया गया, जिसके चलते नमूने प्रयोगशाला जाँच के लिए भेजे गए हैं।
कानूनी स्थिति और आगे की प्रक्रिया
एफडीए के अनुसार, प्रयोगशाला रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जब्त माल को विभागीय अभिरक्षा में रखा गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब नवरात्रि और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की माँग में भारी वृद्धि होती है और मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। गौरतलब है कि इससे पहले 22 सितंबर को भी एफडीए ने लगभग ₹30.82 लाख मूल्य के संदिग्ध, मिलावटी, गलत लेबल वाले और घटिया घी, खोवा, पेड़ा, गुड़, तेल, चाय पाउडर, मिठाई व अन्य खाद्य पदार्थ जब्त किए थे।
एफडीए आयुक्त की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे ने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर विभाग सख्त रुख अपनाए हुए है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना लाइसेंस खाद्य कारोबार करने या घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों के भंडारण एवं बिक्री में लिप्त प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
आम जनता पर असर
त्योहारी मौसम में खाद्य तेलों की माँग तेज़ी से बढ़ती है और बाज़ार में घटिया या मिलावटी उत्पादों के प्रचलन का खतरा भी बढ़ जाता है। ₹3.51 करोड़ की यह जब्ती संकेत देती है कि बड़े पैमाने पर अवैध भंडारण किया जा रहा था, जो संभावित रूप से खुदरा बाज़ार में पहुँच सकता था।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना लाइसेंस संचालित इकाइयों में गुणवत्ता नियंत्रण की कोई गारंटी नहीं होती, और ऐसे उत्पाद उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर सकते हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट के नतीजे इस मामले की दिशा तय करेंगे।