7 जुलाई 2026
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चित्तौड़गढ़ में आकाशीय बिजली से एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत, खेत की झोपड़ी में सो रहे थे

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चित्तौड़गढ़ में आकाशीय बिजली से एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत, खेत की झोपड़ी में सो रहे थे

सारांश

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में सोमवार रात खेत की झोपड़ी पर आकाशीय बिजली गिरने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों — बद्रीलाल, उनकी पत्नी चंद्रीबाई और पौत्र विशाल — की मौत हो गई। मानसून के दौरान खुले खेतों में रहने वाले किसान परिवारों के लिए यह खतरा गंभीर बना हुआ है।

मुख्य बातें

7 जुलाई 2026 की रात राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के गाँव लुनखन्दा में आकाशीय बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हुई।
मृतकों में बद्रीलाल , उनकी पत्नी चंद्रीबाई और पौत्र विशाल शामिल हैं — तीनों खेत की झोपड़ी में सो रहे थे।
घटनास्थल गाँव से करीब दो किलोमीटर दूर अनोपपूरा–सुखानंदजी मार्ग पर स्थित खेत है।
तीनों को कनेरा सीएचसी ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने मृत घोषित किया; मंगलवार को पोस्टमार्टम किया जा रहा है।
कनेरा थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के कनेरा थाना क्षेत्र स्थित गाँव लुनखन्दा में 7 जुलाई 2026 की रात आकाशीय बिजली गिरने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर मौत हो गई। मृतकों में बद्रीलाल, उनकी पत्नी चंद्रीबाई और उनका पौत्र विशाल शामिल हैं, जो उस समय खेत पर बनी झोपड़ी में सो रहे थे।

घटनाक्रम: कैसे हुई दुर्घटना

कनेरा थाने के एएसआई महेंद्र के अनुसार, मृतक परिवार अनोपपूरा–सुखानंदजी मार्ग पर गाँव से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित अपने खेत पर फसल की रखवाली के लिए रुका हुआ था। बद्रीलाल और उनका पुत्र खेत पर अलग-अलग झोपड़ियों में रहते थे।

सोमवार रात क्षेत्र में तेज़ बारिश के दौरान आकाशीय बिजली बद्रीलाल, चंद्रीबाई और विशाल की झोपड़ी पर गिरी, जिससे तीनों की तत्काल मृत्यु हो गई। तेज़ धमाके की आवाज़ सुनकर पास की झोपड़ी में सो रहे पुत्र और बहू दौड़कर आए। अंदर जाकर देखा तो तीनों के शरीर से धुआँ निकल रहा था।

राहत एवं पुलिस कार्रवाई

परिवार के सदस्यों ने तत्काल ग्रामीणों को सूचित किया। सूचना मिलते ही एएसआई महेंद्र पुलिस बल के साथ मौके और अस्पताल पहुँचे। तीनों को कनेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने जाँच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने तीनों के शव कनेरा सीएचसी की मोर्चरी में रखवाए हैं। मंगलवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया संपन्न की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जाँच शुरू कर दी है।

आम जनता पर असर

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में मानसून सक्रिय है और आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है। खेतों पर फसल की रखवाली के लिए रात को रुकने वाले किसान परिवार इस खतरे की चपेट में विशेष रूप से आते हैं, क्योंकि खुले मैदान में बनी झोपड़ियाँ बिजली से सुरक्षित नहीं होतीं।

क्या होगा आगे

पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जाँच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मृत्यु के कारणों की आधिकारिक पुष्टि होगी। स्थानीय प्रशासन से मुआवज़े और राहत की माँग को लेकर परिजनों की अपेक्षाएँ बनी हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में अर्ली-वार्निंग सिस्टम और किसानों के लिए सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था नाममात्र की है। मुआवज़े की घोषणाएँ होती हैं, लेकिन रोकथाम पर निवेश नहीं। जब तक खेत-स्तर पर बिजली-सुरक्षा ढाँचा नहीं बनता, ऐसी खबरें हर मानसून में दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चित्तौड़गढ़ में आकाशीय बिजली से कौन-कौन मारे गए?
मृतकों में बद्रीलाल , उनकी पत्नी चंद्रीबाई और उनका पौत्र विशाल शामिल हैं। तीनों 7 जुलाई 2026 की रात गाँव लुनखन्दा के पास खेत पर बनी झोपड़ी में सो रहे थे।
यह हादसा कहाँ और कैसे हुआ?
हादसा राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के कनेरा थाना क्षेत्र में गाँव से करीब दो किलोमीटर दूर अनोपपूरा–सुखानंदजी मार्ग स्थित खेत पर हुआ। सोमवार रात तेज़ बारिश के दौरान आकाशीय बिजली झोपड़ी पर गिरी, जिससे तीनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
कनेरा थाने के एएसआई महेंद्र सूचना मिलते ही पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। तीनों के शव कनेरा सीएचसी की मोर्चरी में रखवाए गए हैं और मंगलवार को पोस्टमार्टम किया जा रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
मानसून में आकाशीय बिजली से बचाव के लिए क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, तेज़ बारिश और बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे या कच्ची झोपड़ियों में रहने से बचना चाहिए। किसानों को खेत पर रात गुज़ारते समय पक्की इमारत या सुरक्षित आश्रय का उपयोग करना चाहिए और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए।
क्या मृतक परिवार को सरकारी मुआवज़ा मिलेगा?
राजस्थान सरकार की आपदा राहत नीति के तहत आकाशीय बिजली से हुई मौत के मामलों में परिजनों को मुआवज़े का प्रावधान है। हालाँकि, इस विशेष मामले में मुआवज़े की आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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