क्या बसंत पंचमी पर मूकजनों की देवी मां मूकाम्बिका ज्ञान का आशीर्वाद देती हैं?

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क्या बसंत पंचमी पर मूकजनों की देवी मां मूकाम्बिका ज्ञान का आशीर्वाद देती हैं?

सारांश

बसंत पंचमी पर कर्नाटक के मूकाम्बिका देवी मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन होता है। देवी मां मूकाम्बिका, जिन्हें मूकजनों की देवी माना जाता है, ज्ञान, साहस और शांति का प्रतीक हैं। जानिए इस पवित्र स्थान की खासियत और भक्तों के लिए इसका महत्व।

Key Takeaways

  • कर्नाटक में मूकाम्बिका देवी का मंदिर ज्ञान का प्रमुख स्थल है।
  • बसंत पंचमी पर विशेष अनुष्ठान बच्चों के लिए किए जाते हैं।
  • मां मूकाम्बिका देवी की प्रतिमा ज्ञान, साहस और शांति का प्रतीक है।
  • सुपर्णिका नदी के स्नान से भक्तों को शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
  • आदि शंकराचार्य ने मां मूकाम्बिका की प्रतिमा की स्थापना की थी।

नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण भारत में ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित अनेक पवित्र तीर्थ स्थल हैं। कहा जा सकता है कि ज्ञान का आरंभिक स्रोत दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से ही उत्पन्न हुआ है।

बसंत पंचमी के अवसर पर हम कर्नाटक के एक विशेष मंदिर के बारे में जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं, जहां मां मूकाम्बिका देवी, जिन्हें मूकजनों की देवी माना जाता है, विराजमान हैं। इस दिन मंदिर में बच्चों से संबंधित कई महत्वपूर्ण अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

कर्नाटक में 80 किलोमीटर दूर स्थित कोल्लूर नामक एक छोटी सी बस्ती में प्रसिद्ध मूकाम्बिका देवी मंदिर मौजूद है। यह मंदिर कर्नाटक के सात मुक्ति स्थलों में से एक है। इसमें मां मूकाम्बिका देवी का स्वरूप मां पार्वती, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती का प्रतिनिधित्व करता है। गर्भगृह में मां मूकाम्बिका का स्वरूप बैठी हुई मुद्रा में है, जिनके हाथों में चक्र और शंख हैं। मां की यह प्रतिमा ज्ञान, साहस और शांति का प्रतीक मानी जाती है। यह विश्वास है कि दर्शन से भय, बीमारी और अज्ञानता से मुक्ति मिलती है।

विशेष बात यह है कि वर्तमान में मां की पूजा एक प्रतिमा के रूप में की जा रही है। आदि शंकराचार्य ने मां मूकाम्बिका देवी की तपस्या कर उनकी प्रतिमा की स्थापना की थी। मंदिर में मां की प्रतिमा और शिवलिंग दोनों विराजमान हैं। बसंत पंचमी के दिन यहां विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।

ज्ञान, बुद्धि और वाणी की देवी मूकाम्बिका को प्रसन्न करने के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। यह माना जाता है कि यदि मूक बच्चों को मां मूकाम्बिका देवी के दर्शन कराए जाएं, तो उनकी बुद्धि और बल में वृद्धि होती है। मां की प्रतिमा के समीप एक दीया जलता है, जो कभी नहीं बुझता। यह रहस्य है कि दीये का देखभाल कौन करता है। हालांकि, दीये के पास जाने की अनुमति किसी को नहीं होती।

मूकाम्बिका देवी सुपर्णिका नदी के किनारे स्थित है, जिसे जीवनदायिनी नदी कहा जाता है। मां मूकाम्बिका के आशीर्वाद से स्नान करने से भक्तों के शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं। बसंत पंचमी पर भक्त बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचते हैं और सुपर्णिका नदी में स्नान करते हैं। इसके अलावा, शारदीय नवरात्र और मार्च में होने वाले ब्रह्म रथोत्सव में भी भक्तों की भारी भीड़ यहां आती है।

Point of View

बल्कि यह शिक्षा और ज्ञान की दिशा में एक प्रेरणा भी देता है। देशभर के भक्तों के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता है।
NationPress
19/01/2026

Frequently Asked Questions

मूकाम्बिका देवी का मंदिर कहां स्थित है?
मूकाम्बिका देवी का मंदिर कर्नाटक के कोल्लूर नामक कस्बे में स्थित है।
बसंत पंचमी पर मंदिर में क्या विशेष अनुष्ठान होते हैं?
बसंत पंचमी पर मंदिर में बच्चों से जुड़े कई महत्वपूर्ण अनुष्ठान किए जाते हैं।
मां मूकाम्बिका देवी का स्वरूप किस प्रकार का है?
मां मूकाम्बिका देवी का स्वरूप मां पार्वती, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती का प्रतिनिधित्व करता है।
सुपर्णिका नदी का क्या महत्व है?
सुपर्णिका नदी मां मूकाम्बिका के आशीर्वाद से स्नान करने से भक्तों के शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर करती है।
क्या मूकाम्बिका देवी की पूजा प्रतिमा के रूप में की जाती है?
जी हां, वर्तमान में मां मूकाम्बिका की पूजा एक प्रतिमा के रूप में की जाती है।
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