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धनबाद में 'मेघ पाइन अभियान': दो वर्षों की निगरानी में ₹0 सरकारी खर्च से 59 लाख लीटर भूजल रिचार्ज

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धनबाद में 'मेघ पाइन अभियान': दो वर्षों की निगरानी में ₹0 सरकारी खर्च से 59 लाख लीटर भूजल रिचार्ज

सारांश

धनबाद के उत्तरायण परिसर में 2018 से स्थापित एक रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली ने अब तक लगभग 60 लाख लीटर वर्षा जल भूजल में पहुँचाया है। 'मेघ पाइन अभियान' का यह मॉडल अब केंद्र सरकार के अमृत मिशन का हिस्सा बन चुका है — यह साबित करता है कि सामुदायिक विज्ञान बड़े नीतिगत बदलाव की नींव बन सकता है।

मुख्य बातें

मेघ पाइन अभियान ने 2005 में उत्तर बिहार से शुरू होकर 2014 में धनबाद, झारखंड में कार्य विस्तारित किया।
5 जून 2018 से 31 जुलाई 2026 तक उत्तरायण परिसर की हार्वेस्टिंग प्रणाली ने 59 लाख 91 हजार लीटर वर्षा जल शैलो एक्विफर तक पहुँचाया।
धनबाद के 60-70% परिवार भूजल पर निर्भर हैं; 108 स्थानों का सर्वेक्षण कर 55 वार्डों में भूजल अध्ययन किया गया।
अमृत मिशन के तहत 2022-24 में धनबाद समेत देश के 10 शहरों में 'शैलो एक्विफर मैनेजमेंट पायलट' लागू किया गया।
पाँच मॉडल स्थलों पर कार्य — जिनमें 100 वर्ष पुराने भगतडीह कुएँ का जीर्णोद्धार और जीवन ज्योति स्कूल में 28 फीट तक गिरे जलस्तर का सुधार शामिल है।
जून 2024 के बाद भी मासिक निगरानी जारी; इस वर्ष 64 मिमी कम बारिश के बावजूद कुओं के जलस्तर में तेज़ सुधार दर्ज।

मेघ पाइन अभियान ने धनबाद, झारखंड में वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन के ज़रिए एक ऐसा मॉडल खड़ा किया है, जो जल संकट के टिकाऊ समाधान की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। अभियान के प्रतिनिधि एकलव्य प्रसाद के अनुसार, 5 जून 2018 से 31 जुलाई 2026 तक धनबाद के उत्तरायण परिसर में स्थापित रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली के माध्यम से लगभग 59 लाख 91 हजार लीटर वर्षा जल शैलो एक्विफर तक पहुँचाया जा चुका है। यह वही पानी है जो सामान्य परिस्थितियों में बहकर बर्बाद हो जाता।

अभियान की पृष्ठभूमि और विस्तार

मेघ पाइन अभियान की स्थापना वर्ष 2005 में उत्तर बिहार के बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण को केंद्र में रखकर की गई थी। वर्ष 2014 में अभियान ने झारखंड के धनबाद जिले में भी अपना कार्य विस्तारित किया। धनबाद में कार्य आरंभ करने से पहले बलियापुर, टुंडी और पूर्वी टुंडी प्रखंडों के लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में भूजल की स्थिति का विस्तृत अध्ययन किया गया। यह अध्ययन ग्रामीण विकास मंत्रालय और UNDP के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय पारंपरिक ज्ञान को वाटरशेड योजनाओं के साथ जोड़कर सहभागिता-आधारित भूजल प्रबंधन का प्रभावी मॉडल तैयार किया जा सकता है।

युवा नेतृत्व और शोध की भूमिका

वर्ष 2015 में 'बालेश्वर प्रसाद ओरेशन सीरीज' के अंतर्गत जल विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु कुलकर्णी को धनबाद आमंत्रित किया गया। इस संवाद के बाद धनबाद कार्मेल स्कूल के 20 विद्यार्थियों के साथ 'गैंग्स ऑफ 20' नामक पहल शुरू की गई। कक्षा 8 से 12 तक इन विद्यार्थियों को लगातार मेंटर किया गया ताकि जल संरक्षण के प्रति जागरूक युवा नेतृत्व तैयार हो सके। इन्हीं विद्यार्थियों द्वारा किए गए सर्वे में सामने आया कि धनबाद के 60 से 70 प्रतिशत परिवार भूजल पर निर्भर हैं, जबकि वर्षा जल का उपयोग लगभग नगण्य है। इस सर्वे से 'पार्टिसिपेटरी एक्शन रिसर्च ऑन अर्बन ग्राउंडवाटर' फ्रेमवर्क विकसित किया गया।

अमृत मिशन और नगर निगम की भागीदारी

उत्तरायण परिसर के मॉडल से प्रेरित होकर आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अमृत मिशन के तहत वर्ष 2022-24 में 'शैलो एक्विफर मैनेजमेंट पायलट' शुरू किया गया। देश के 10 शहरों में चुने गए इस पायलट में धनबाद भी शामिल था। धनबाद नगर निगम के 55 वार्डों में भूजल और जल स्रोतों का अध्ययन किया गया। निर्माण कार्य नगर निगम ने किया, जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स के माध्यम से मेघ पाइन अभियान को तकनीकी सहयोग की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। नगर निगम ने 108 स्थानों का सर्वेक्षण किया, जिसमें झरिया, कतरास, छाताटांड़ और सिंदरी जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में कुओं पर निर्भर आबादी की पहचान हुई।

पाँच मॉडल स्थलों पर बदलाव

विस्तृत अध्ययन के बाद पाँच स्थानों पर अलग-अलग मॉडल विकसित किए गए। जीवन ज्योति स्कूल में रेनवाटर हार्वेस्टिंग से कुएँ को रिचार्ज किया गया, जहाँ गर्मियों में जलस्तर 28 फीट तक नीचे चला जाता था। बेरा कॉलोनी में तालाब और कुएँ का संरक्षण किया गया, जहाँ पहले फरवरी-मार्च में ही जल स्रोत सूख जाते थे। भगतडीह में लगभग 100 वर्ष पुराने विरासत कुएँ का जीर्णोद्धार किया गया। नीचे मोहल्ला में महिलाओं द्वारा खोदे गए कच्चे कुएँ को पक्का बनाया गया। इसके अलावा बलियापुर सीमा से लगे क्षेत्र में भी भूजल रिचार्ज का कार्य किया गया।

दो वर्षों की निगरानी के परिणाम

जून 2024 में परियोजना पूर्ण होने के बाद भी निगरानी बंद नहीं की गई। पिछले दो वर्षों से हर महीने पाँचों स्थलों पर कुओं के जलस्तर की नियमित मॉनिटरिंग जारी है। इस वर्ष धनबाद में जून माह में केवल 64 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से काफी कम थी। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने महसूस किया कि कुओं का जलस्तर पहले की तुलना में तेज़ी से बढ़ रहा है — जो इस बात का प्रमाण है कि रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली प्रभावी रूप से काम कर रही है। एकलव्य प्रसाद के अनुसार, 'जिस प्रकार बैंक खाते से पैसा निकालने के बाद उसे वापस जमा करना पड़ता है, उसी तरह भूजल का उपयोग करने वालों की भी ज़िम्मेदारी है कि वे वर्षा जल को ज़मीन में पहुँचाकर उसे रिचार्ज करें।' यदि हर घर, स्कूल, कार्यालय और आवासीय परिसर अपनी छत का वर्षा जल ज़मीन में पहुँचाने का संकल्प लें, तो आने वाले वर्षों में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर वैज्ञानिक निगरानी और सामुदायिक स्वामित्व को नज़रअंदाज़ करती हैं। धनबाद में 60 से 70 प्रतिशत परिवारों की भूजल पर निर्भरता और उसके रिचार्ज की लगभग शून्य व्यवस्था — यह अंतर्विरोध पूरे भारत के शहरी जल प्रबंधन की तस्वीर है। अमृत मिशन ने इस मॉडल को अपनाया, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 10 पायलट शहरों से आगे इसे संस्थागत रूप दिया जाएगा, या यह भी कागज़ों पर सिमटकर रह जाएगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'मेघ पाइन अभियान' क्या है और यह धनबाद में क्या कर रहा है?
'मेघ पाइन अभियान' एक स्वयंसेवी संगठन है जो 2005 से उत्तर बिहार और 2014 से धनबाद, झारखंड में वर्षा जल संचयन और पारंपरिक कुओं के पुनर्जीवन के ज़रिए भूजल संरक्षण पर काम कर रहा है। इसने धनबाद में रूफटॉप हार्वेस्टिंग से लेकर विरासत कुओं के जीर्णोद्धार तक कई मॉडल विकसित किए हैं।
उत्तरायण परिसर की रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली ने अब तक कितना पानी भूजल में पहुँचाया?
5 जून 2018 से 31 जुलाई 2026 तक उत्तरायण परिसर की प्रणाली ने लगभग 59 लाख 91 हजार लीटर वर्षा जल शैलो एक्विफर तक पहुँचाया है। यह वह पानी है जो सामान्यतः बहकर नष्ट हो जाता था।
अमृत मिशन के तहत धनबाद में क्या परियोजना शुरू की गई?
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अमृत मिशन के तहत 2022-24 में 'शैलो एक्विफर मैनेजमेंट पायलट' शुरू किया गया, जिसमें देश के 10 शहरों में धनबाद भी शामिल था। धनबाद नगर निगम के 55 वार्डों में भूजल अध्ययन हुआ और पाँच मॉडल स्थलों पर कार्य किया गया।
धनबाद में भूजल संकट कितना गंभीर है?
मेघ पाइन अभियान के सर्वे के अनुसार धनबाद के 60 से 70 प्रतिशत परिवार भूजल पर निर्भर हैं, जबकि वर्षा जल का उपयोग लगभग नगण्य है। झरिया, कतरास, छाताटांड़ और सिंदरी जैसे इलाकों में गर्मियों में जलस्तर गिरने पर गंभीर संकट पैदा होता है क्योंकि पाइपलाइन जलापूर्ति भौगोलिक कारणों से कठिन है।
परियोजना पूरी होने के बाद निगरानी कैसे हो रही है?
जून 2024 में परियोजना पूर्ण होने के बाद भी हर महीने पाँचों मॉडल स्थलों पर कुओं के जलस्तर की नियमित मॉनिटरिंग जारी है। इस वर्ष जून में केवल 64 मिलीमीटर बारिश के बावजूद कुओं के जलस्तर में तेज़ सुधार दर्ज किया गया, जो हार्वेस्टिंग प्रणाली की प्रभावशीलता का प्रमाण है।
राष्ट्र प्रेस
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