धनबाद में 'मेघ पाइन अभियान': दो वर्षों की निगरानी में ₹0 सरकारी खर्च से 59 लाख लीटर भूजल रिचार्ज
सारांश
मुख्य बातें
मेघ पाइन अभियान ने धनबाद, झारखंड में वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन के ज़रिए एक ऐसा मॉडल खड़ा किया है, जो जल संकट के टिकाऊ समाधान की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। अभियान के प्रतिनिधि एकलव्य प्रसाद के अनुसार, 5 जून 2018 से 31 जुलाई 2026 तक धनबाद के उत्तरायण परिसर में स्थापित रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली के माध्यम से लगभग 59 लाख 91 हजार लीटर वर्षा जल शैलो एक्विफर तक पहुँचाया जा चुका है। यह वही पानी है जो सामान्य परिस्थितियों में बहकर बर्बाद हो जाता।
अभियान की पृष्ठभूमि और विस्तार
मेघ पाइन अभियान की स्थापना वर्ष 2005 में उत्तर बिहार के बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण को केंद्र में रखकर की गई थी। वर्ष 2014 में अभियान ने झारखंड के धनबाद जिले में भी अपना कार्य विस्तारित किया। धनबाद में कार्य आरंभ करने से पहले बलियापुर, टुंडी और पूर्वी टुंडी प्रखंडों के लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में भूजल की स्थिति का विस्तृत अध्ययन किया गया। यह अध्ययन ग्रामीण विकास मंत्रालय और UNDP के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय पारंपरिक ज्ञान को वाटरशेड योजनाओं के साथ जोड़कर सहभागिता-आधारित भूजल प्रबंधन का प्रभावी मॉडल तैयार किया जा सकता है।
युवा नेतृत्व और शोध की भूमिका
वर्ष 2015 में 'बालेश्वर प्रसाद ओरेशन सीरीज' के अंतर्गत जल विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु कुलकर्णी को धनबाद आमंत्रित किया गया। इस संवाद के बाद धनबाद कार्मेल स्कूल के 20 विद्यार्थियों के साथ 'गैंग्स ऑफ 20' नामक पहल शुरू की गई। कक्षा 8 से 12 तक इन विद्यार्थियों को लगातार मेंटर किया गया ताकि जल संरक्षण के प्रति जागरूक युवा नेतृत्व तैयार हो सके। इन्हीं विद्यार्थियों द्वारा किए गए सर्वे में सामने आया कि धनबाद के 60 से 70 प्रतिशत परिवार भूजल पर निर्भर हैं, जबकि वर्षा जल का उपयोग लगभग नगण्य है। इस सर्वे से 'पार्टिसिपेटरी एक्शन रिसर्च ऑन अर्बन ग्राउंडवाटर' फ्रेमवर्क विकसित किया गया।
अमृत मिशन और नगर निगम की भागीदारी
उत्तरायण परिसर के मॉडल से प्रेरित होकर आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अमृत मिशन के तहत वर्ष 2022-24 में 'शैलो एक्विफर मैनेजमेंट पायलट' शुरू किया गया। देश के 10 शहरों में चुने गए इस पायलट में धनबाद भी शामिल था। धनबाद नगर निगम के 55 वार्डों में भूजल और जल स्रोतों का अध्ययन किया गया। निर्माण कार्य नगर निगम ने किया, जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स के माध्यम से मेघ पाइन अभियान को तकनीकी सहयोग की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। नगर निगम ने 108 स्थानों का सर्वेक्षण किया, जिसमें झरिया, कतरास, छाताटांड़ और सिंदरी जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में कुओं पर निर्भर आबादी की पहचान हुई।
पाँच मॉडल स्थलों पर बदलाव
विस्तृत अध्ययन के बाद पाँच स्थानों पर अलग-अलग मॉडल विकसित किए गए। जीवन ज्योति स्कूल में रेनवाटर हार्वेस्टिंग से कुएँ को रिचार्ज किया गया, जहाँ गर्मियों में जलस्तर 28 फीट तक नीचे चला जाता था। बेरा कॉलोनी में तालाब और कुएँ का संरक्षण किया गया, जहाँ पहले फरवरी-मार्च में ही जल स्रोत सूख जाते थे। भगतडीह में लगभग 100 वर्ष पुराने विरासत कुएँ का जीर्णोद्धार किया गया। नीचे मोहल्ला में महिलाओं द्वारा खोदे गए कच्चे कुएँ को पक्का बनाया गया। इसके अलावा बलियापुर सीमा से लगे क्षेत्र में भी भूजल रिचार्ज का कार्य किया गया।
दो वर्षों की निगरानी के परिणाम
जून 2024 में परियोजना पूर्ण होने के बाद भी निगरानी बंद नहीं की गई। पिछले दो वर्षों से हर महीने पाँचों स्थलों पर कुओं के जलस्तर की नियमित मॉनिटरिंग जारी है। इस वर्ष धनबाद में जून माह में केवल 64 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से काफी कम थी। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने महसूस किया कि कुओं का जलस्तर पहले की तुलना में तेज़ी से बढ़ रहा है — जो इस बात का प्रमाण है कि रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली प्रभावी रूप से काम कर रही है। एकलव्य प्रसाद के अनुसार, 'जिस प्रकार बैंक खाते से पैसा निकालने के बाद उसे वापस जमा करना पड़ता है, उसी तरह भूजल का उपयोग करने वालों की भी ज़िम्मेदारी है कि वे वर्षा जल को ज़मीन में पहुँचाकर उसे रिचार्ज करें।' यदि हर घर, स्कूल, कार्यालय और आवासीय परिसर अपनी छत का वर्षा जल ज़मीन में पहुँचाने का संकल्प लें, तो आने वाले वर्षों में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।