क्या बसंत पंचमी के रंग में गुवाहाटी ने मां सरस्वती का आशीर्वाद लिया?
सारांश
Key Takeaways
- बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान और शिक्षा का प्रतीक है।
- विद्यार्थियों के लिए मां सरस्वती का आशीर्वाद लेना महत्वपूर्ण है।
- पूजा में दीप जलाना और यज्ञ करना शामिल होता है।
- पूजा के माध्यम से मन को शांति मिलती है।
- यह पर्व हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है।
गुवाहाटी, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज देश के विभिन्न हिस्सों में बसंत पंचमी का त्योहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हर स्थान पर मां सरस्वती के पंडाल सजाए गए हैं, जहां यज्ञ और अनुष्ठान किए जा रहे हैं। असम में भी इस दिन सरस्वती पूजा का आयोजन बड़े उत्साह से किया गया, जहां छात्रों और शिक्षकों ने ज्ञान और सफलता के लिए मां सरस्वती की पूजा की। ज्ञान की देवी मां सरस्वती की आराधना का जोश शिक्षकों और विद्यार्थियों में देखने को मिला।
कॉलेज और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की एक बड़ी संख्या मां के सामने दीप जलाते हुए देखी गई। कुछ छात्र मां सरस्वती के लिए हो रहे हवन का भी हिस्सा बने। पूजा कराने वाले पुजारी ने कहा, "आज के दिन पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है और मां सरस्वती की कृपा भी प्राप्त होती है। इस दिन पीले फूल चढ़ाकर मां को प्रसन्न किया जाता है, और मां ज्ञान के साथ सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।"
पूजा में शामिल एक छात्र ने बताया कि दो महीने बाद 10वीं के बोर्ड के एग्जाम होने वाले हैं, इसलिए मां का आशीर्वाद लेना आवश्यक है। वे हमारे लिए भगवान हैं और उनके आशीर्वाद के बिना हम कितना भी लिख नहीं पाएंगे। कुछ छात्राओं ने भी कहा कि बोर्ड की परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने के लिए मां सरस्वती का आशीर्वाद लेना बेहद जरूरी है। हमारी कामना है कि ज्ञान में वृद्धि हो और सभी बच्चे परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करें।
पूजा में शामिल एक शिक्षिका ने कहा, "हमारा करियर और ज्ञान दोनों मां सरस्वती से जुड़े हैं, और जो कुछ भी हमें मिला है, वो उन्हीं की कृपा से है, इसलिए यह पर्व हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूजा में शामिल होकर मन को शांति मिलती है, और मेरी यही प्रार्थना है कि हर छात्र अपने जीवन में और परीक्षा में बहुत अच्छा करे और जीवन में आगे बढ़े।"
यह भी उल्लेखनीय है कि केवल असम में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में मां सरस्वती का वंदन किया जा रहा है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों को पीले फूलों से सजाया गया है। मंदिरों में मां को पीले भोग अर्पित किए जा रहे हैं और भक्त सुबह से ही मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं।