तरंग शक्ति 2.0: जोधपुर में 26 सितंबर से गरजेंगे दुनिया के घातक जेट, ऑपरेशन सिंदूर के बाद IAF का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय अभ्यास
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना का बहुप्रतीक्षित बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास तरंग शक्ति 2026, 26 सितंबर से राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर आयोजित होगा — और यह 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत की वायु शक्ति में मित्र देशों की बढ़ती रुचि का सबसे बड़ा प्रमाण है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, आधा दर्जन से अधिक देश अपने लड़ाकू विमानों के साथ भागीदारी की सहमति दे चुके हैं, जबकि कई अन्य देश पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होंगे।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों उमड़ा मित्र देशों का उत्साह
जिस सटीकता और संयम के साथ भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी भूभाग पर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया — बिना किसी सहायक क्षति (कोलेटरल डैमेज) के — उसने दुनिया भर की वायुसेनाओं का ध्यान खींचा है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यही कारण है कि अगले दो महीनों में भारतीय वायुसेना का अभ्यास कैलेंडर पूरी तरह भरा हुआ है।
पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक — अभ्यासों की श्रृंखला
इस समय भारतीय वायुसेना के चार राफेल लड़ाकू विमान, दो सी-17 ग्लोबमास्टर और 100 से अधिक वायुसैनिक ऑस्ट्रेलिया में आयोजित पिच ब्लैक अभ्यास में भाग ले रहे हैं, जो 20 जुलाई से शुरू होकर 7 अगस्त तक चलेगा। इसमें 19 देशों की वायुसेनाएं शामिल हैं।
पिच ब्लैक के तुरंत बाद यही दल रॉयल मलेशियन एयर फोर्स के साथ संयुक्त अभ्यास उदारा शक्ति में हिस्सा लेगा। एक सप्ताह चलने वाले इस अभ्यास में भारतीय राफेल और मलेशियाई सुखोई लड़ाकू विमान साझा उड़ानें भरेंगे तथा दोनों देशों के वायुसैनिक परिचालन अनुभव और युद्ध कौशल का आदान-प्रदान करेंगे।
वीर गार्जियन: जोधपुर में भारत-जापान द्विपक्षीय अभ्यास
तरंग शक्ति से ठीक पहले 12 सितंबर से 23 सितंबर तक जोधपुर एयरबेस पर भारत-जापान द्विपक्षीय वायु सैन्य अभ्यास वीर गार्जियन आयोजित होगा। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इसमें भारतीय वायुसेना के सुखोई एसयू-30एमकेआई और जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के एफ-2 लड़ाकू विमान भाग लेंगे।
गौरतलब है कि वीर गार्जियन का पहला संस्करण 2023 में जापान के हयाकुरी एयरबेस पर आयोजित हुआ था, जिसमें भारत की ओर से सुखोई एसयू-30एमकेआई, सी-17 और आईएल-78 मिड-एयर रीफ्यूलर विमान तथा जापान की ओर से चार एफ-2 और चार एफ-15 लड़ाकू विमान शामिल थे। इस संयुक्त अभ्यास का निर्णय 2022 में टोक्यो में आयोजित 2+2 डायलॉग के दौरान लिया गया था।
तरंग शक्ति 2024 की विरासत
तरंग शक्ति का पहला संस्करण 2024 में दो चरणों में संपन्न हुआ था। पहले चरण में तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस पर फ्रांस के राफेल और जर्मनी, स्पेन व ब्रिटेन के यूरोफाइटर टाइफून विमानों ने भाग लिया था। भारतीय वायुसेना के राफेल, सुखोई, मिराज-2000, जैगुआर, तेजस, मिग-29 और प्रचंड सहित लगभग सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म ने अपनी परिचालन क्षमता का प्रदर्शन किया था।
दूसरा चरण 29 अगस्त से 14 सितंबर तक जोधपुर में आयोजित हुआ था, जिसमें ऑस्ट्रेलिया का ईए-18जी ग्रोलर, ग्रीस का एफ-16, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का एफ-16 तथा अमेरिका के ए-10 और एफ-16 सहित कुल 27 लड़ाकू विमान शामिल हुए थे। इसके साथ दो एयर-टू-एयर रीफ्यूलर, दो एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AEW&C) और तीन स्पेशल फोर्स एयरक्राफ्ट भी इस अभ्यास का हिस्सा रहे।
उस अभ्यास में एक ऐतिहासिक क्षण भी आया — पहली बार भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना के तीनों वाइस चीफ ने एक साथ स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान में उड़ान भरी। तत्कालीन वायुसेना उप प्रमुख और वर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने इस विशेष फॉर्मेशन का नेतृत्व किया था। फ्रांस और जर्मनी के वायुसेना प्रमुखों ने भी तेजस में उड़ान भरी, जबकि स्पेन के वायुसेना प्रमुख ने सुखोई एसयू-30एमकेआई में उड़ान भरकर भाग लिया।
तरंग शक्ति 2026 का महत्व
पाकिस्तान सीमा के निकट जोधपुर में दुनिया भर के मित्र देशों के लड़ाकू विमानों का एक साथ उड़ान भरना रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी वायु शक्ति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। करीब दो सप्ताह तक चलने वाले इस अभ्यास में भाग लेने वाले देशों की अंतिम सूची जल्द घोषित होने की संभावना है।