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बंगाल की खाड़ी में चक्रवात का खतरा: 3 नवंबर को नेल्लोर-नरसापुर तट से टकराएगा तूफान, 120 किमी/घंटा हवाएँ

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बंगाल की खाड़ी में चक्रवात का खतरा: 3 नवंबर को नेल्लोर-नरसापुर तट से टकराएगा तूफान, 120 किमी/घंटा हवाएँ

सारांश

बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन तेज़ी से गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल रहा है। IMD के अनुसार 3 नवंबर की सुबह यह नेल्लोर-नरसापुर के बीच आंध्र तट से टकरा सकता है, जिस दौरान 120 किमी/घंटा तक की हवाएँ चल सकती हैं।

मुख्य बातें

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 1 नवंबर 2026 को पुष्टि की कि दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन तीव्र हो रहा है।
यह प्रणाली 3 नवंबर की सुबह नेल्लोर और नरसापुर के बीच आंध्र प्रदेश के तट से 'सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म' के रूप में टकरा सकती है।
लैंडफॉल के दौरान हवा की रफ्तार 100-110 किमी/घंटा , झोंकों के साथ 120 किमी/घंटा तक संभव।
31 अक्टूबर की रात यह चेन्नई से 830 किमी और विशाखापत्तनम से 880 किमी दूर था, 22 किमी/घंटा की गति से आगे बढ़ रहा था।
1 नवंबर की मध्यरात्रि तक 'चक्रवाती तूफान' और 2 नवंबर तक 'सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म' बनने की आशंका।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 1 नवंबर 2026 को जारी बुलेटिन में बताया कि दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना 'डिप्रेशन' तेज़ी से शक्तिशाली होते हुए एक गंभीर चक्रवाती तूफान (सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म) में बदल सकता है। विभाग के अनुसार, यह तूफान 3 नवंबर की सुबह नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है, जिस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किमी प्रति घंटा और झोंकों के साथ 120 किमी प्रति घंटा तक पहुँचने की आशंका है।

वर्तमान स्थिति और मार्ग

31 अक्टूबर की रात 11:30 बजे IST तक यह डिप्रेशन 10.9° उत्तर अक्षांश और 87.5° पूर्व देशांतर के पास स्थित था और 22 किमी प्रति घंटे की गति से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा था। उस समय यह चेन्नई से लगभग 830 किमी पूर्व-दक्षिण-पूर्व, विशाखापत्तनम से 880 किमी दक्षिण-दक्षिण-पूर्व और मछलीपट्टनम से 900 किमी दक्षिण-पूर्व में था।

IMD के अनुसार यह प्रणाली पहले 1 नवंबर की दोपहर तक एक 'डीप डिप्रेशन' में तब्दील होगी, फिर 1 नवंबर की मध्यरात्रि तक 'चक्रवाती तूफान' और 2 नवंबर तक 'सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म' का रूप ले सकती है।

तटीय क्षेत्रों पर संभावित असर

यह प्रणाली 3 नवंबर की सुबह तक दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट के पास पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में पहुँच सकती है। नेल्लोर और नरसापुर के बीच के तटीय जिले सर्वाधिक प्रभावित होने की आशंका है। तेज़ हवाओं के साथ भारी वर्षा और समुद्री उफान की भी संभावना जताई जा रही है।

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश का यह तटीय क्षेत्र पहले भी कई बार चक्रवाती तूफानों की चपेट में आ चुका है। ओंगोल से यह डिप्रेशन 950 किमी पूर्व-दक्षिण-पूर्व में स्थित था, जो इस क्षेत्र की निकटता को रेखांकित करता है।

IMD की चेतावनी और तैयारी

मौसम विभाग ने तटीय आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के लिए सतर्कता बरतने की अपील की है। आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। राज्य आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय किए जाने की संभावना है।

यह ऐसे समय में आया है जब अक्टूबर-नवंबर का मौसम उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवातों के लिए सर्वाधिक सक्रिय माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से, बंगाल की खाड़ी में इस अवधि में बनने वाले तूफान अक्सर आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों को प्रभावित करते हैं।

आगे क्या होगा

IMD अगले 48 घंटों में नियमित अंतराल पर अपडेट बुलेटिन जारी करेगा। तूफान के मार्ग और तीव्रता में बदलाव की संभावना बनी रहती है, इसलिए विभाग ने नवीनतम सूचनाओं पर नज़र रखने की सलाह दी है। प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव दल पूर्व-तैनाती की स्थिति में रखे जा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब प्रशासनिक तैयारी की है — पूर्व-चेतावनी प्रणाली में सुधार के बावजूद आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में निकासी तंत्र की कमज़ोरियाँ पहले उजागर हो चुकी हैं। नवंबर 2026 का यह संभावित तूफान उस क्षेत्र को निशाना बना रहा है जहाँ घनी मछुआरा आबादी और कम ऊँचाई वाले तटीय गाँव जोखिम को बढ़ाते हैं। तूफान की तीव्रता पूर्वानुमान से कम या ज़्यादा भी हो सकती है — लेकिन 48 घंटे से भी कम समय में 'सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म' बनने का यह मार्ग राज्य सरकार और NDRF के लिए कोई विकल्प नहीं छोड़ता।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात आंध्र प्रदेश से कब और कहाँ टकराएगा?
IMD के अनुसार यह तूफान 3 नवंबर 2026 की सुबह नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट से 'सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म' के रूप में टकरा सकता है। लैंडफॉल के दौरान हवाएँ 100-110 किमी/घंटा और झोंकों के साथ 120 किमी/घंटा तक पहुँच सकती हैं।
यह डिप्रेशन कितनी तेज़ी से चक्रवात में बदल रहा है?
IMD के अनुसार यह प्रणाली 1 नवंबर की दोपहर तक 'डीप डिप्रेशन', 1 नवंबर की मध्यरात्रि तक 'साइक्लोनिक स्टॉर्म' और 2 नवंबर तक 'सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म' बन सकती है। यह तेज़ी से तीव्र होने की प्रक्रिया मात्र 48 घंटों में हो रही है।
चक्रवात का सबसे अधिक खतरा किन इलाकों को है?
दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटीय जिले, विशेष रूप से नेल्लोर और नरसापुर के बीच के क्षेत्र, सर्वाधिक जोखिम में हैं। मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है और तटीय आबादी को सतर्क रहने को कहा गया है।
IMD ने इस तूफान को लेकर क्या चेतावनी जारी की है?
IMD ने शनिवार-रविवार की मध्यरात्रि को जारी बुलेटिन में तटीय आंध्र प्रदेश के लिए सतर्कता की अपील की है। विभाग अगले 48 घंटों में नियमित अपडेट जारी करेगा और तूफान के मार्ग में बदलाव संभव बताया गया है।
क्या यह चक्रवात अन्य राज्यों को भी प्रभावित करेगा?
फिलहाल IMD का पूर्वानुमान दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट पर लैंडफॉल का संकेत देता है। हालाँकि तमिलनाडु के उत्तरी तट और ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भी भारी बारिश और तेज़ हवाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि तूफान का मार्ग अभी बदल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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