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बीबीएमकेयू दीक्षांत समारोह 2025: 149 मेधावियों को स्वर्ण पदक, 31,926 को डिग्री; राज्यपाल गंगवार बोले — ज्ञान व नवाचार से बने कोयलांचल की नई पहचान

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बीबीएमकेयू दीक्षांत समारोह 2025: 149 मेधावियों को स्वर्ण पदक, 31,926 को डिग्री; राज्यपाल गंगवार बोले — ज्ञान व नवाचार से बने कोयलांचल की नई पहचान

सारांश

धनबाद के बीबीएमकेयू के तीसरे दीक्षांत समारोह में 31,926 विद्यार्थियों को डिग्री और 149 को स्वर्ण पदक मिले। राज्यपाल गंगवार ने संदेश दिया — कोयलांचल की पहचान अब सिर्फ खदानों से नहीं, ज्ञान और नवाचार से भी बनेगी।

मुख्य बातें

बीबीएमकेयू, धनबाद के तीसरे दीक्षांत समारोह में 9 अक्टूबर 2026 को 31,926 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं।
149 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, जिनमें 99 छात्राएं और 50 छात्र शामिल हैं।
45 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि; विश्वविद्यालय में पहली बार डी.लिट.
की उपाधि भी प्रदान की गई।
डुमरी विधायक जयराम महतो को अंग्रेजी विभाग से पीएचडी की उपाधि दी गई।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने AI, स्टार्टअप और उद्यमिता को युवाओं के लिए नए अवसर बताते हुए 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य से जोड़ा।

बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू), धनबाद के तीसरे दीक्षांत समारोह में 9 अक्टूबर 2026 को वर्ष 2024 और 2025 में उत्तीर्ण 31,926 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं। इनमें से 149 मेधावी विद्यार्थियों को मंच पर बुलाकर डिग्री के साथ स्वर्ण पदक दिए गए। झारखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों से आह्वान किया कि कोयलांचल की पहचान अब खनन और कोयले से आगे बढ़कर ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी स्थापित होनी चाहिए।

दीक्षांत समारोह की मुख्य उपलब्धियाँ

इस वर्ष के समारोह में 99 छात्राओं और 50 छात्रों सहित कुल 149 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। 45 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। विशेष रूप से उल्लेखनीय यह रहा कि विश्वविद्यालय में पहली बार डी.लिट. की उपाधि भी दी गई — जो संस्था के अकादमिक विकास का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

डुमरी विधायक जयराम महतो को अंग्रेजी विभाग से पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, जिसने समारोह को विशेष चर्चा का विषय बनाया।

राज्यपाल का संबोधन: कोयलांचल की बदलती भूमिका

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने अपने संबोधन में कहा कि कोयलांचल ने देश के औद्योगिक विकास और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, लेकिन अब इस क्षेत्र को पर्यावरण संरक्षण, खनन क्षेत्रों की सुरक्षा, श्रमिक कल्याण और बदलती ऊर्जा आवश्यकताओं जैसी चुनौतियों का भी सामना करना है। उन्होंने विश्वविद्यालय से अपील की कि वह इन्हीं स्थानीय समस्याओं से जुड़े अनुसंधान को प्रोत्साहित करे।

गंगवार ने बिनोद बिहारी महतो के योगदान को याद करते हुए कहा कि दिवंगत शिक्षाविद् और जननेता ने शिक्षा को सामाजिक जागरूकता, आत्मसम्मान और बदलाव का माध्यम बताया था। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उपाधि प्राप्ति व्यक्तिगत सफलता की शुरुआत है, न कि अंत — असली कसौटी समाज और देश के विकास में योगदान की होगी।

युवाओं के लिए डिजिटल और उद्यमिता के अवसर

राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्टार्टअप और उद्यमिता ने युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोले हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल नौकरी की तलाश में न रहें, बल्कि अपनी योग्यता और नवाचार के बल पर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित करें।

गंगवार ने यह भी कहा कि किसी संस्था की सफलता डिग्री पाने वालों की संख्या से नहीं, बल्कि उन स्नातकों के समाज में योगदान से मापी जाती है। इसके लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच सार्थक संवाद, नियमित अध्ययन तथा व्यावहारिक अनुभवों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना आवश्यक है।

'विकसित भारत 2047' और युवाओं की भूमिका

राज्यपाल ने 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की भावी प्रगति युवाओं के ज्ञान, कौशल और परिश्रम पर टिकी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन और धैर्य के साथ आगे बढ़ने, नशे से दूर रहने तथा सकारात्मक कार्यों में ऊर्जा लगाने की अपील की।

उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहना, परिवार और समाज का सम्मान करना तथा अपने आचरण में नैतिकता बनाए रखना जरूरी है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में उच्च शिक्षा संस्थानों पर व्यावसायिक प्रासंगिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के मानकों पर खरा उतरने का दबाव बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा संसाधन आवंटन और अनुसंधान अवसंरचना में होगी। झारखंड के खनन क्षेत्रों में पर्यावरणीय और श्रमिक कल्याण की चुनौतियाँ दशकों पुरानी हैं — विश्वविद्यालय इन मुद्दों पर कितना व्यावहारिक शोध उत्पन्न कर पाता है, यह देखना बाकी है। डी.लिट. की शुरुआत और छात्राओं की बढ़ती भागीदारी (149 में से 99) क्षेत्र में शैक्षणिक प्रगति के सकारात्मक संकेत हैं। लेकिन स्थानीय उद्योग-विश्वविद्यालय साझेदारी के बिना 'नवाचार' का नारा महज भाषण तक सीमित रहने का जोखिम है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीबीएमकेयू का तीसरा दीक्षांत समारोह कब और कहाँ हुआ?
बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) का तीसरा दीक्षांत समारोह 9 अक्टूबर 2026 को धनबाद, झारखंड में आयोजित हुआ। इसमें झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस दीक्षांत समारोह में कितने विद्यार्थियों को डिग्री और स्वर्ण पदक मिले?
समारोह में वर्ष 2024 और 2025 में उत्तीर्ण कुल 31,926 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं। इनमें से 149 मेधावी विद्यार्थियों को मंच पर स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, जिनमें 99 छात्राएं और 50 छात्र थे।
बीबीएमकेयू में पहली बार डी.लिट. की उपाधि किसे मिली?
स्रोत के अनुसार इस दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय में पहली बार डी.लिट. की उपाधि प्रदान की गई। हालाँकि, उपलब्ध जानकारी में डी.लिट. प्राप्तकर्ता का नाम स्पष्ट नहीं किया गया है।
डुमरी विधायक जयराम महतो को किस विभाग से पीएचडी मिली?
डुमरी विधायक जयराम महतो को बीबीएमकेयू के अंग्रेजी विभाग से पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। यह इस दीक्षांत समारोह की विशेष रूप से चर्चित उपलब्धियों में से एक रही।
राज्यपाल गंगवार ने विद्यार्थियों को क्या संदेश दिया?
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल नौकरी न खोजें, बल्कि AI, स्टार्टअप और उद्यमिता के जरिए दूसरों के लिए भी रोजगार पैदा करें। उन्होंने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि अनुशासन, नैतिकता और नवाचार ही युवाओं की असली पूँजी है।
राष्ट्र प्रेस
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