विनोबा भावे विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह: राज्यपाल गंगवार बोले — विकसित भारत में युवा शक्ति की भूमिका सर्वोपरि
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को हजारीबाग स्थित विनोबा भावे विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में स्पष्ट रूप से कहा कि 'विकसित भारत' के स्वप्न को साकार करने में देश के युवाओं की भूमिका किसी भी अन्य वर्ग से अधिक निर्णायक है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र का उत्थान केवल आर्थिक आँकड़ों से नहीं, बल्कि शिक्षित, कुशल, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिकों के सामूहिक योगदान से सुनिश्चित होगा।
दीक्षांत समारोह का मुख्य घटनाक्रम
विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित इस समारोह में 20 स्नातकोत्तर टॉपरों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इसके साथ ही 9 स्नातक टॉपरों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया और 36 शोधार्थियों को विधिवत पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। यह विश्वविद्यालय का अब तक का 11वाँ दीक्षांत समारोह था, जो संस्थान की शैक्षणिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
ज्ञान और उत्तरदायित्व पर राज्यपाल का संदेश
राज्यपाल गंगवार ने कहा कि उपाधि शिक्षा प्राप्ति का प्रमाण तो है, परंतु ज्ञान का वास्तविक मूल्य इससे निर्धारित होता है कि उसका उपयोग समाज और देश के हित में किस प्रकार किया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखते रहने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अपनी क्षमताओं का विकास करने की प्रेरणा दी।
गौरतलब है कि आचार्य विनोबा भावे के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय के संदर्भ में राज्यपाल ने भूदान आंदोलन का स्मरण कराया और कहा कि विनोबा भावे ने मानवता, करुणा, सामाजिक सहयोग और न्याय का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना भी होना चाहिए।
स्टार्टअप, तकनीक और नवाचार के अवसर
राज्यपाल ने रेखांकित किया कि भारत विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष, डिजिटल सेवाओं, उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्रों में तीव्र गति से प्रगति कर रहा है। उन्होंने स्टार्टअप इंडिया, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि ये योजनाएँ युवाओं के लिए नए और असीमित अवसर सृजित कर रही हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे इन अवसरों का भरपूर उपयोग करें और नए विचारों को उद्यम का रूप देने में संकोच न करें। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि ज्ञान के साथ विवेक और कौशल के साथ नैतिकता को समान महत्व देना अनिवार्य है।
झारखंड की क्षमता और युवाओं पर भरोसा
झारखंड की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल गंगवार ने कहा कि प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध जनजातीय परंपराएँ राज्य की विशेष पहचान हैं। यहाँ के युवाओं की प्रतिभा और परिश्रम राज्य की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों से अपेक्षा की कि वे इस प्रतिभा को सही दिशा देने के साथ-साथ शोध, नवाचार और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करें।
विश्वविद्यालयों की ज़िम्मेदारी
राज्यपाल ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और नैतिक मूल्यों को समान महत्व देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसे नागरिक तैयार करने चाहिए जो अपने अधिकारों के प्रति सजग, कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्ध और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम हों। यह ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा संस्थाओं पर कौशल-आधारित और रोज़गार-उन्मुख पाठ्यक्रमों को अपनाने का दबाव राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा है।