गायघाटा नाबालिग दुष्कर्म-हत्या: बंगाल सरकार ने पीड़िता के परिवार को ₹10 लाख मुआवजा सौंपा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को उत्तर 24 परगना जिले के बोंगांव उप-मंडल के गायघाटा की 17 वर्षीय दुष्कर्म-हत्या पीड़िता के परिजनों को ₹10 लाख का मुआवजा चेक सौंपा। पिछले महीने इस नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया गया था और उसकी हत्या कर दी गई थी।
मुआवजे का वितरण
राज्य सरकार की ओर से बोंगांव लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने पीड़िता के परिजनों को मुआवजे का चेक सौंपा। इस अवसर पर उत्तर 24 परगना की जिलाधिकारी प्रगति नौटियाल भी उपस्थित रहीं।
राज्य मंत्री ठाकुर ने कहा, 'मैं यहाँ मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर आया हूँ।' उन्होंने बताया कि पीड़िता के परिजनों ने परिवार के एक सदस्य को राज्य सरकार में नौकरी दिलाने का अनुरोध किया है, और उन्होंने संबंधित अधिकारियों के समक्ष यह मामला रखने का आश्वासन दिया।
पीड़िता के पिता की प्रतिक्रिया
मीडिया से बात करते हुए पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा, 'मुझे पता है कि कोई भी मुआवजा हमारी बेटी की जगह नहीं ले सकता। लेकिन हमारी आर्थिक स्थिति काफी खराब है, इसलिए यह चेक कम से कम हमारी कुछ समस्याओं को हल करने में सहायक होगा।'
मुख्य आरोपी और एनकाउंटर का घटनाक्रम
पीड़िता का शव 25 अक्टूबर की रात को मुख्य आरोपी प्रह्लाद दास के घर के पास से बरामद किया गया था। दास पीड़िता का रिश्तेदार बताया जाता है।
26 अक्टूबर की सुबह दास को गिरफ्तार किया गया। उसी रात, 26-27 अक्टूबर की दरमियानी रात, उसे क्राइम सीन रिक्रिएशन के लिए अपराध स्थल पर ले जाया गया। पुलिस के बयान के अनुसार, वहाँ उसने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों पर गोली चलाई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दास की मृत्यु हो गई।
आरोपी के परिजनों की माँग
इस बीच, प्रह्लाद दास के परिवार ने भी एनकाउंटर में हुई उसकी मौत को लेकर राज्य सरकार से मुआवजे की माँग की है। यह माँग ऐसे समय में सामने आई है जब पुलिस एनकाउंटर की परिस्थितियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
आगे की स्थिति
गायघाटा की यह घटना पश्चिम बंगाल में महिला सुरक्षा और न्याय की व्यापक बहस के बीच सामने आई है। राज्य सरकार का मुआवजा एक प्रशासनिक कदम है, परंतु पीड़िता के परिजनों की सरकारी नौकरी की माँग पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।