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पश्चिम बंगाल STF का बड़ा ऑपरेशन: 17 दिन में अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क ध्वस्त, 4 गिरफ्तार

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पश्चिम बंगाल STF का बड़ा ऑपरेशन: 17 दिन में अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क ध्वस्त, 4 गिरफ्तार

सारांश

17 दिन, तीन राज्य, चार गिरफ्तारियाँ — पश्चिम बंगाल STF ने बिहार के मुंगेर और झारखंड के हजारीबाग तक फैले अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त किया। ₹39 लाख की नकदी और तीन पिस्तौलें बरामद; जाँच अभी जारी है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल STF ने 17 दिन के अभियान में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में सक्रिय अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
अभियान 25 सितंबर 2026 को दुर्गापुर से मोहम्मद फरहान उर्फ मुसान की गिरफ्तारी से शुरू हुआ।
कुल चार आरोपी गिरफ्तार — तीन बिहार के जमुई व मुंगेर से, एक झारखंड के हजारीबाग से।
बरामदगी में तीन पिस्तौल, तीन मैगजीन, 24 जिंदा कारतूस और ₹39 लाख नकद शामिल।
रैकेट के शेष सहयोगियों की पहचान के लिए जाँच जारी है।

पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल (STF) ने 17 दिनों के लगातार अभियान के बाद एक बड़े अंतरराज्यीय अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में सक्रिय था। 12 अक्टूबर 2026 को जारी पुलिस बयान के अनुसार, इस कार्रवाई में चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और अवैध हथियार बिक्री से अर्जित ₹39 लाख की नकदी बरामद की गई है।

अभियान की शुरुआत कैसे हुई

पुलिस बयान के अनुसार, यह पूरा अभियान 25 सितंबर 2026 को दुर्गापुर से शुरू हुआ, जब STF के जवानों ने मोहम्मद फरहान उर्फ मुसान (निवासी: जमुई, बिहार) को गिरफ्तार किया। उसके पास से दो पिस्तौल, दो मैगजीन और 20 जिंदा कारतूस बरामद किए गए।

इस गिरफ्तारी के बाद STF ने अवैध हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला और वित्तीय लेन-देन की गहन जाँच शुरू की। पड़ताल की परतें उधड़ने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि मामला एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि तीन राज्यों में फैला हुआ संगठित रैकेट है।

गिरफ्तार आरोपी और तारीखें

पुलिस के बयान के अनुसार, इस 17-दिवसीय अभियान में कुल चार आरोपियों को अलग-अलग तिथियों पर पकड़ा गया: मोहम्मद फरहान (जमुई, बिहार) — 25 सितंबर; मोहम्मद शाहनवाज आलम उर्फ गुड्डू (मुंगेर, बिहार) — 29 सितंबर; पवन कुमार सिंह (जमुई, बिहार) — 3 अक्टूबर; गणेश राणा (हजारीबाग, झारखंड) — 4 अक्टूबर।

पुलिस का कहना है कि इन चारों को रैकेट का सरगना माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मुंगेर और हजारीबाग दोनों ही क्षेत्र अवैध हथियार निर्माण के लिए पहले से संवेदनशील माने जाते हैं।

बरामदगी का विवरण

पूरे अभियान के दौरान STF ने कुल तीन पिस्तौल (जिनमें एक 9 मिमी), तीन मैगजीन और 24 जिंदा कारतूस बरामद किए। इसके अतिरिक्त अवैध हथियारों की बिक्री से अर्जित कथित ₹39 लाख की नकदी भी जब्त की गई। पुलिस के अनुसार, यह राशि संदिग्धों द्वारा हथियार बेचकर कमाई गई थी।

जाँच की मौजूदा स्थिति

पश्चिम बंगाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि रैकेट के शेष सहयोगियों की पहचान करने और पूरे नेटवर्क को समाप्त करने के लिए जाँच अभी जारी है। पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस — दोनों के STF — राज्य में अवैध हथियार तस्करी के खिलाफ समन्वित अभियान चला रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज रहती है। गौरतलब है कि अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क न केवल स्थानीय अपराध को बढ़ावा देते हैं, बल्कि संगठित आपराधिक गिरोहों को भी सशस्त्र करते हैं। आगे की जाँच से इस नेटवर्क के विस्तार और संभावित खरीदारों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि आपूर्ति का स्रोत — यानी हथियार निर्माण और खरीदार नेटवर्क — कितना बाधित हुआ। ₹39 लाख की बरामदगी संगठित रैकेट की आर्थिक गहराई की ओर इशारा करती है; चार गिरफ्तारियाँ सिरे हैं, जड़ें नहीं। जब तक हथियारों के अंतिम उपयोगकर्ताओं तक जाँच नहीं पहुँचती, तब तक यह सफलता अधूरी मानी जाएगी।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल STF ने कौन सा हथियार तस्करी नेटवर्क पकड़ा?
पश्चिम बंगाल STF ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में सक्रिय एक अंतरराज्यीय अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। 17 दिन के अभियान में चार आरोपी गिरफ्तार किए गए और ₹39 लाख नकद सहित तीन पिस्तौलें बरामद की गईं।
इस ऑपरेशन में कितने लोग गिरफ्तार हुए और वे कौन हैं?
कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया — मोहम्मद फरहान उर्फ मुसान (जमुई, बिहार), मोहम्मद शाहनवाज आलम उर्फ गुड्डू (मुंगेर, बिहार), पवन कुमार सिंह (जमुई, बिहार) और गणेश राणा (हजारीबाग, झारखंड)। पुलिस के अनुसार इन्हें रैकेट का सरगना माना जा रहा है।
यह अभियान कब और कहाँ से शुरू हुआ?
यह अभियान 25 सितंबर 2026 को दुर्गापुर से शुरू हुआ, जब STF ने मोहम्मद फरहान को दो पिस्तौल और 20 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। इसके बाद 17 दिनों तक चले अभियान में नेटवर्क के अन्य सदस्यों को बिहार और झारखंड से पकड़ा गया।
इस मामले में अब तक क्या बरामद किया गया है?
STF ने अभियान के दौरान तीन पिस्तौलें (जिनमें एक 9 मिमी), तीन मैगजीन और 24 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इसके अलावा अवैध हथियार बिक्री से कथित तौर पर अर्जित ₹39 लाख की नकदी भी जब्त की गई है।
क्या यह जाँच अभी भी जारी है?
हाँ, पश्चिम बंगाल पुलिस के अनुसार रैकेट के शेष सहयोगियों की पहचान और पूरे नेटवर्क को समाप्त करने के लिए जाँच अभी जारी है। पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस — दोनों के STF — इस मामले में सक्रिय हैं।
राष्ट्र प्रेस
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