मुर्शिदाबाद में हथियारों का जखीरा बरामद: 5 पिस्तौल, 35 कारतूस सहित दो तस्कर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में पुलिस ने 12 अगस्त 2026 को एक बड़े हथियार तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। मुर्शिदाबाद जिला पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और जियागंज थाने की पुलिस ने संयुक्त अभियान में खालेक शेख और सूरज मंडल को गिरफ्तार किया। दोनों के पास से 7 एमएम की पाँच पिस्तौल, 10 खाली मैगजीन और 35 कारतूस बरामद किए गए।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मंगलवार देर रात जब दोनों आरोपी हथियारों की डिलीवरी करने की कोशिश कर रहे थे, तभी SOG ने उन्हें दबोच लिया। मुर्शिदाबाद पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक सचिन मक्कार ने बताया कि दोनों आरोपी हथियार सप्लायर के रूप में काम करते थे। उन्होंने कहा, 'गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर हथियार तस्करी गिरोह के मुख्य सरगनाओं को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।'
तस्करी का रास्ता और संदिग्ध ठिकाना
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे धुलियान फेरी घाट के रास्ते मुर्शिदाबाद में दाखिल हुए, फिर निमतिता से आजिमगंज तक ट्रेन से यात्रा कर गंगा नदी पार की। दोनों आरोपी पड़ोसी मालदा जिले के बैष्णवनगर इलाके के रहने वाले हैं।
हथियारों का गंतव्य — दो संभावित कड़ियाँ
पुलिस के एक वर्ग को संदेह है कि ये हथियार रेजीनगर विधानसभा सीट — जहाँ कुछ महीनों में उपचुनाव होने वाले हैं — भेजे जाने वाले थे। वहीं, अन्य सूत्रों का दावा है कि इन्हें जियागंज में जमा करके बाद में बांग्लादेश तस्करी के लिए इस्तेमाल किया जाना था। पुलिस अधीक्षक मक्कार ने स्वीकार किया कि यह भी जाँच की जा रही है कि मुर्शिदाबाद में ये हथियार किसे दिए जाने वाले थे।
मुंगेर-मुर्शिदाबाद हथियार गलियारा
जिला पुलिस सूत्रों के अनुसार, बिहार के मुंगेर से सस्ते हथियार अक्सर फरक्का, उमरपुर और शमशेरगंज कॉरिडोर के ज़रिए मुर्शिदाबाद पहुँच रहे हैं। ये हथियार मुर्शिदाबाद और नदिया जिलों में फैल रहे हैं, जबकि कुछ सीमा पार कर बांग्लादेश भी पहुँचाए जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सीमावर्ती जिलों में अवैध हथियारों की आवाजाही को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से सतर्क हैं।
न्यायिक कार्रवाई और आगे की जाँच
बुधवार को दोनों आरोपियों को बहरामपुर जिला अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजने की अनुमति दे दी। पुलिस का कहना है कि रिमांड अवधि में तस्करी गिरोह के मुख्य सरगनाओं और हथियारों के अंतिम प्राप्तकर्ताओं की पहचान करने की कोशिश की जाएगी।