बंगाली पाठ्यक्रम में TMC ने किया राजनीतिक विकृतिकरण: CM शुभेंदु अधिकारी का बड़ा आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 3 सितंबर 2026 को कोलकाता में आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बंगाली भाषा के स्कूली पाठ्यक्रम को जानबूझकर विकृत किया और बंगाली भाषी समाज में फूट डालने की कोशिश की। यह बयान विद्या भारती की राज्य इकाई विवेकानंद विद्या विकास परिषद के वार्षिक कार्यक्रम में दिया गया।
मुख्य आरोप: भाषा और पहचान से खिलवाड़
मुख्यमंत्री अधिकारी ने दावा किया कि पूर्ववर्ती TMC सरकार के कार्यकाल में बंगाली शब्दों को योजनाबद्ध तरीके से बदला गया। उन्होंने कहा, 'मां को 'मा' की जगह 'अम्मा' और आकाश को 'आकाश' की जगह 'आसमान' कहा गया।' उनके अनुसार इस प्रकार के भाषाई परिवर्तन बच्चों के मन में सांस्कृतिक विभाजन उत्पन्न करने के लिए किए गए।
अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि पाठ्यक्रम इस प्रकार तैयार किया गया कि ईश्वरचंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद जैसे महान विभूतियों की शिक्षाएं शिक्षा व्यवस्था में हाशिए पर चली गईं, जबकि राजनीतिक एजेंडे को प्राथमिकता दी गई।
वाम मोर्चा और TMC दोनों पर निशाना
मुख्यमंत्री ने आरोपों का दायरा केवल TMC तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि 34 वर्षों के वाम शासन ने बंगाली भाषा के प्रचार-प्रसार में बाधाएं डालीं और प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी शिक्षा को भी रोका, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था कमज़ोर हुई।
उनके अनुसार, 'इसके बाद TMC सरकार के कार्यकाल में स्कूल पाठ्यक्रम तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार हो गया। बंगाली भाषा को विकृत किया गया और शिक्षा व्यवस्था से राष्ट्रभावना तथा देशभक्ति गायब होने लगी।'
सिंगूर आंदोलन बनाम स्वतंत्रता सेनानी: पाठ्यक्रम विवाद
अधिकारी ने एक विशेष उदाहरण देते हुए कहा कि हुगली जिले के सिंगूर में टाटा मोटर्स के विरुद्ध भूमि अधिग्रहण-विरोधी आंदोलन को स्कूली पाठ्यक्रम में विस्तार से शामिल किया गया था, जबकि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जीवनी को जगह नहीं दी गई।
उन्होंने यह भी कहा कि पाठ्यक्रम में तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी का उल्लेख था, लेकिन राज्य के अनेक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनियां शामिल नहीं की गई थीं। गौरतलब है कि पार्थ चटर्जी बाद में शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार हो चुके हैं।
आम जनता और शिक्षा व्यवस्था पर असर
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी शिक्षा व्यवस्था जारी रहती, तो बंगाल की सुधारवादी परंपरा, देशभक्ति, राज्य की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रवाद की भावना को गंभीर नुकसान पहुंचता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में नई BJP सरकार शिक्षा सुधारों को प्राथमिकता देने का दावा कर रही है।
आगे क्या
अधिकारी के इन आरोपों पर TMC की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिक्षा विशेषज्ञों और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज़ कर सकती है। राज्य सरकार द्वारा पाठ्यक्रम समीक्षा की किसी औपचारिक समयसीमा की घोषणा अभी नहीं की गई है।