बेंगलुरु: सातवीं के छात्र समर्थ ने की आत्महत्या की कोशिश, शिक्षकों पर मारपीट और प्रताड़ना का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु के मरियप्पनपाल्या स्थित सेंट फिलोमेना स्कूल में सातवीं कक्षा के 12-13 वर्षीय छात्र समर्थ एम. ने कथित तौर पर 15 जुलाई 2026 को फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। परिजनों के अनुसार, स्कूल प्रशासन और शिक्षकों द्वारा लगातार मानसिक प्रताड़ना और शारीरिक मारपीट के कारण बच्चा इस कदम तक पहुँचा। फिलहाल समर्थ नयनदहल्ली स्थित नेटस अस्पताल में उपचाराधीन है।
घटना का विवरण
परिजनों की शिकायत के अनुसार, मंगलवार को जब समर्थ स्कूल गया, तब स्कूल के फाउंडर-सेक्रेटरी रंगास्वामी, प्रिंसिपल और 2-3 शिक्षकों ने कथित तौर पर किसी कारण से नाराज होकर उसके साथ मारपीट की। आरोप है कि इस घटना में छात्र के शरीर पर कई जगह चोटों के निशान आए। उसी शाम दर्द और भय के कारण समर्थ ने फांसी लगाने की कोशिश की।
छात्र के पिता महेश कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से समर्थ बार-बार कह रहा था कि वह स्कूल नहीं जाना चाहता। उनके अनुसार, शिक्षक, प्रिंसिपल, स्कूल प्रबंधन के सचिव और कुछ अन्य छात्र भी उसे परेशान कर रहे थे। महेश कुमार ने बेटे को समझाया था कि वह सातवीं कक्षा पूरी कर ले, इसके बाद उसका दाखिला किसी दूसरे स्कूल में करा दिया जाएगा।
पुलिस शिकायत और एफआईआर
छात्र के माता-पिता — महेश कुमार और कुसुमा — ने ज्ञानभारती पुलिस थाने में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या स्कूल में कथित उत्पीड़न ही इस घटना का प्रमुख कारण रहा।
कानूनी धाराएँ और माँगें
परिजनों ने शिकायत में बच्चों के साथ शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न को कानून के तहत अपराध बताते हुए कई धाराओं में कार्रवाई की माँग की है। इनमें बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 17, शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 की धारा 17, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2), 118(1) और 351 तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 शामिल हैं।
परिजनों ने स्कूल के फाउंडर-सेक्रेटरी रंगास्वामी, प्रिंसिपल और कथित रूप से मारपीट में शामिल शिक्षकों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की है।
आम जनता और स्कूली बच्चों पर असर
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में स्कूलों में शारीरिक दंड पर प्रतिबंध के बावजूद ऐसी घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रहीं। आरटीई अधिनियम और बाल अधिकार कानूनों के तहत शारीरिक दंड पूरी तरह प्रतिबंधित है, फिर भी कथित उल्लंघन की शिकायतें लगातार आती रहती हैं। यह घटना अभिभावकों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं में गहरी चिंता का विषय बन गई है।
आगे क्या होगा
पुलिस जांच अभी जारी है और स्कूल प्रशासन का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। जाँच के नतीजों के आधार पर आरोपी शिक्षकों और प्रबंधन के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। समर्थ की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।