15 जुलाई 2026
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बेंगलुरु: सातवीं के छात्र समर्थ ने की आत्महत्या की कोशिश, शिक्षकों पर मारपीट और प्रताड़ना का आरोप

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बेंगलुरु: सातवीं के छात्र समर्थ ने की आत्महत्या की कोशिश, शिक्षकों पर मारपीट और प्रताड़ना का आरोप

सारांश

बेंगलुरु के सेंट फिलोमेना स्कूल में 7वीं के छात्र समर्थ ने कथित शिक्षक मारपीट के बाद आत्महत्या का प्रयास किया। माता-पिता ने एफआईआर दर्ज कराई; आरटीई और बाल अधिकार कानूनों के तहत कार्रवाई की माँग।

मुख्य बातें

बेंगलुरु के सेंट फिलोमेना स्कूल में 12-13 वर्षीय छात्र समर्थ एम.
ने 15 जुलाई 2026 को फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया।
परिजनों का आरोप है कि स्कूल के फाउंडर-सेक्रेटरी रंगास्वामी , प्रिंसिपल और 2-3 शिक्षकों ने कथित तौर पर मारपीट की, जिससे शरीर पर चोट के निशान आए।
छात्र फिलहाल नयनदहल्ली स्थित नेटस अस्पताल में उपचाराधीन है।
माता-पिता महेश कुमार और कुसुमा ने ज्ञानभारती पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई; एफआईआर दर्ज हो चुकी है।
शिकायत में बीएनएस धारा 115(2), 118(1), 351 और आरटीई अधिनियम धारा 17 सहित कई कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की माँग की गई है।

बेंगलुरु के मरियप्पनपाल्या स्थित सेंट फिलोमेना स्कूल में सातवीं कक्षा के 12-13 वर्षीय छात्र समर्थ एम. ने कथित तौर पर 15 जुलाई 2026 को फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। परिजनों के अनुसार, स्कूल प्रशासन और शिक्षकों द्वारा लगातार मानसिक प्रताड़ना और शारीरिक मारपीट के कारण बच्चा इस कदम तक पहुँचा। फिलहाल समर्थ नयनदहल्ली स्थित नेटस अस्पताल में उपचाराधीन है।

घटना का विवरण

परिजनों की शिकायत के अनुसार, मंगलवार को जब समर्थ स्कूल गया, तब स्कूल के फाउंडर-सेक्रेटरी रंगास्वामी, प्रिंसिपल और 2-3 शिक्षकों ने कथित तौर पर किसी कारण से नाराज होकर उसके साथ मारपीट की। आरोप है कि इस घटना में छात्र के शरीर पर कई जगह चोटों के निशान आए। उसी शाम दर्द और भय के कारण समर्थ ने फांसी लगाने की कोशिश की।

छात्र के पिता महेश कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से समर्थ बार-बार कह रहा था कि वह स्कूल नहीं जाना चाहता। उनके अनुसार, शिक्षक, प्रिंसिपल, स्कूल प्रबंधन के सचिव और कुछ अन्य छात्र भी उसे परेशान कर रहे थे। महेश कुमार ने बेटे को समझाया था कि वह सातवीं कक्षा पूरी कर ले, इसके बाद उसका दाखिला किसी दूसरे स्कूल में करा दिया जाएगा।

पुलिस शिकायत और एफआईआर

छात्र के माता-पिता — महेश कुमार और कुसुमा — ने ज्ञानभारती पुलिस थाने में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या स्कूल में कथित उत्पीड़न ही इस घटना का प्रमुख कारण रहा।

कानूनी धाराएँ और माँगें

परिजनों ने शिकायत में बच्चों के साथ शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न को कानून के तहत अपराध बताते हुए कई धाराओं में कार्रवाई की माँग की है। इनमें बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 17, शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 की धारा 17, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2), 118(1) और 351 तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 शामिल हैं।

परिजनों ने स्कूल के फाउंडर-सेक्रेटरी रंगास्वामी, प्रिंसिपल और कथित रूप से मारपीट में शामिल शिक्षकों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की है।

आम जनता और स्कूली बच्चों पर असर

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में स्कूलों में शारीरिक दंड पर प्रतिबंध के बावजूद ऐसी घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रहीं। आरटीई अधिनियम और बाल अधिकार कानूनों के तहत शारीरिक दंड पूरी तरह प्रतिबंधित है, फिर भी कथित उल्लंघन की शिकायतें लगातार आती रहती हैं। यह घटना अभिभावकों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं में गहरी चिंता का विषय बन गई है।

आगे क्या होगा

पुलिस जांच अभी जारी है और स्कूल प्रशासन का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। जाँच के नतीजों के आधार पर आरोपी शिक्षकों और प्रबंधन के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। समर्थ की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीन पर उनका अनुपालन नाममात्र का है। शारीरिक दंड पर दशक भर पहले प्रतिबंध लगने के बावजूद इस तरह की घटनाएँ बताती हैं कि स्कूल निरीक्षण तंत्र लगभग निष्क्रिय है। सवाल यह भी है कि जब बच्चा बार-बार स्कूल जाने से मना कर रहा था, तो क्या स्कूल प्रशासन ने कोई संज्ञान लिया? जब तक जाँच और सज़ा का डर स्कूल प्रबंधन के लिए वास्तविक नहीं बनता, ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु में सातवीं के छात्र ने आत्महत्या का प्रयास क्यों किया?
परिजनों के अनुसार, सेंट फिलोमेना स्कूल के फाउंडर-सेक्रेटरी, प्रिंसिपल और कुछ शिक्षकों ने कथित तौर पर छात्र समर्थ के साथ मारपीट की, जिससे उसके शरीर पर चोटें आईं। दर्द और भय के कारण उसी शाम उसने फांसी लगाने की कोशिश की।
घायल छात्र समर्थ अभी कहाँ है और उसकी हालत कैसी है?
समर्थ एम. फिलहाल बेंगलुरु के नयनदहल्ली स्थित नेटस अस्पताल में उपचाराधीन है। उसकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, हालाँकि अभी तक कोई आधिकारिक मेडिकल अपडेट सार्वजनिक नहीं हुआ है।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
छात्र के माता-पिता की शिकायत पर ज्ञानभारती पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। पुलिस जाँच कर रही है कि क्या स्कूल में कथित उत्पीड़न ही आत्महत्या के प्रयास का कारण बना और आगे की कार्रवाई जारी है।
परिजनों ने किन कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की माँग की है?
शिकायत में बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 की धारा 17, आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 17, भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 118(1) और 351, तथा किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 के तहत कार्रवाई की माँग की गई है।
क्या भारतीय स्कूलों में शारीरिक दंड कानूनी है?
नहीं। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 की धारा 17 के तहत स्कूलों में शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद इस तरह की शिकायतें देशभर से आती रहती हैं, जो अनुपालन तंत्र की कमज़ोरी को उजागर करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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