14 अक्टूबर 2026
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बेंगलुरु में ED की बड़ी कार्रवाई: अयूब सैयद समेत 5 आरोपियों के खिलाफ PMLA कोर्ट में चार्जशीट दायर

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बेंगलुरु में ED की बड़ी कार्रवाई: अयूब सैयद समेत 5 आरोपियों के खिलाफ PMLA कोर्ट में चार्जशीट दायर

सारांश

बेंगलुरु में ED ने ₹14.95 करोड़ की कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में PMLA कोर्ट में अयूब सैयद समेत 5 आरोपियों के खिलाफ नई चार्जशीट दायर की है। आरोप है कि जाली दस्तावेजों से ADCL के नाम फर्जी बैंक खाता खोलकर ₹5-5 करोड़ की चार FD समय से पहले तोड़ी गईं।

मुख्य बातें

ED के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने PMLA स्पेशल कोर्ट में अयूब सैयद समेत 5 आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त अभियोजन शिकायत दायर की।
मामला ₹14.95 करोड़ के कथित गबन और धनशोधन से संबंधित है।
जाली दस्तावेजों से ADCL के नाम फर्जी करंट खाता खोलकर चार FD (प्रत्येक ₹5 करोड़ ) समय से पहले बंद कराई गईं।
इससे पहले 25 मार्च 2026 को 15 आरोपियों के खिलाफ पहली शिकायत दायर हुई थी, जिसमें ₹6.02 करोड़ की संपत्ति जब्ती की माँग थी।
22 जुलाई 2026 को दूसरे अनंतिम कुर्की आदेश में एक आरोपी की ₹24 लाख की अचल संपत्ति जब्त की गई।
ED ने पुष्टि की कि इस मामले में आगे की जांच अभी जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने 14 अक्टूबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट (PMLA) में अयूब सैयद सहित 5 आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त अभियोजन शिकायत (Supplementary Prosecution Complaint) दायर की है। यह मामला कथित तौर पर ₹14.95 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी और धनशोधन से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

ED की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), बेंगलुरु द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी। यह मामला सरकारी विकास निगम से जुड़े बैंक खातों में हुई कथित गड़बड़ी के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

धोखाधड़ी का तरीका

ED के आधिकारिक बयान के अनुसार, जाली दस्तावेजों और फर्जी पहचान का उपयोग कर स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की HAL-II स्टेज ब्रांच, बेंगलुरु में डॉ. बी.आर. अंबेडकर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (ADCL) के नाम से एक फर्जी करंट खाता खोला गया था।

इसके बाद, जाली TDR/FDR इंस्ट्रूमेंट्स और फर्जी प्री-क्लोजर लेटर का इस्तेमाल करते हुए ADCL की चार फिक्स्ड डिपॉजिट — प्रत्येक ₹5 करोड़ — को समय से पहले बंद करा दिया गया। इस प्रक्रिया में कथित तौर पर ₹14.95 करोड़ का गबन हुआ, जो PMLA, 2002 के अंतर्गत अपराध से प्राप्त आय मानी जाती है।

धन की लॉन्ड्रिंग का तरीका

जांच में सामने आया कि अपराध से अर्जित इस राशि को कई व्यक्तियों और संस्थाओं के बैंक खातों के माध्यम से घुमाया और लॉन्डर किया गया। धन के स्रोत को छिपाने के लिए बड़े पैमाने पर ट्रांसफर और नकद निकासी की गई। PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों से भी यह पुष्टि हुई कि यह राशि जानबूझकर प्राप्त, स्थानांतरित और आहरित की गई थी।

पूर्व कार्रवाई और संपत्ति जब्ती

गौरतलब है कि इससे पहले 25 मार्च 2026 को ED ने बेंगलुरु की PMLA स्पेशल कोर्ट में 15 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ पहली अभियोजन शिकायत दायर की थी, जिसमें लगभग ₹6.02 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की मांग की गई थी। इसके बाद 22 जुलाई 2026 को दूसरा अनंतिम कुर्की आदेश (Provisional Attachment Order) जारी किया गया, जिसके तहत एक आरोपी की ₹24 लाख की अचल संपत्ति जब्त की गई।

आगे की जांच जारी

ED ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच अभी जारी है, और आने वाले समय में और खुलासे संभव हैं। यह मामला इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि इसमें सरकारी विकास निगम के नाम का दुरुपयोग कर सार्वजनिक धन का कथित हेरफेर किया गया, जो वित्तीय संस्थाओं की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और क्या बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच भी की जा रही है — जिसका उत्तर अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु में ED ने किस मामले में चार्जशीट दायर की है?
ED के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने ₹14.95 करोड़ की कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में PMLA स्पेशल कोर्ट में अयूब सैयद समेत 5 आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त अभियोजन शिकायत दायर की है। यह मामला ADCL के नाम फर्जी बैंक खाता खोलकर करोड़ों की FD समय से पहले तोड़ने से जुड़ा है।
ADCL बैंक धोखाधड़ी में किस तरीके से गबन किया गया?
जाली दस्तावेजों और फर्जी पहचान से स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की HAL-II स्टेज ब्रांच में ADCL के नाम एक फर्जी करंट खाता खोला गया। इसके बाद जाली TDR/FDR और फर्जी प्री-क्लोजर लेटर के जरिए ₹5-5 करोड़ की चार FD समय से पहले बंद कराई गईं, जिससे कुल ₹14.95 करोड़ का गबन हुआ।
ED ने इस मामले में पहले क्या कार्रवाई की थी?
25 मार्च 2026 को ED ने 15 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ पहली अभियोजन शिकायत दायर की थी, जिसमें ₹6.02 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की माँग की गई थी। इसके बाद 22 जुलाई 2026 को दूसरे अनंतिम कुर्की आदेश में एक आरोपी की ₹24 लाख की अचल संपत्ति जब्त की गई।
PMLA क्या है और इस मामले में यह कैसे लागू होता है?
PMLA यानी धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 — यह कानून अपराध से अर्जित धन को वैध बनाने (लॉन्ड्रिंग) के मामलों से निपटने के लिए बनाया गया है। इस मामले में गबन की गई ₹14.95 करोड़ की राशि को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर उसके स्रोत को छिपाने का कथित प्रयास PMLA के तहत अपराध माना गया है।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं?
ED ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच अभी जारी है। PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों से जांच का दायरा बढ़ सकता है और अतिरिक्त आरोपियों या संपत्तियों की पहचान होने पर आगे कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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