भारत-जर्मनी सबमरीन समझौता अगले महीने तक होगा साइन: निवर्तमान राजदूत फिलिप एकरमैन
सारांश
मुख्य बातें
भारत में जर्मनी के निवर्तमान राजदूत फिलिप एकरमैन ने 30 जुलाई 2026 को कहा कि भारत और जर्मनी के बीच बहुप्रतीक्षित सबमरीन समझौते पर अगले महीने तक हस्ताक्षर हो सकते हैं। अपना कार्यकाल पूरा कर विदाई ले रहे एकरमैन ने नई दिल्ली में कहा कि वे इस रक्षा सौदे को लेकर पूरी तरह आशावान और आश्वस्त हैं।
सबमरीन समझौते पर क्या बोले एकरमैन
राजदूत एकरमैन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'सबमरीन डील को लेकर मैं बहुत आशावान और आश्वस्त हूं कि यह बहुत जल्द, शायद अगले महीने तक, साइन हो जाएगी।' यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत अपनी नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई देशों के साथ रक्षा सहयोग की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
भारत-जर्मनी व्यापारिक संबंध और द्विपक्षीय साझेदारी
इंडो-जर्मन इंडस्ट्रीज डायलॉग का उल्लेख करते हुए एकरमैन ने कहा, 'यह एक बहुत जरूरी मंच है, जहाँ जर्मन व्यवसायी, भारतीय व्यवसायी और भारतीय नीति-निर्माता आपस में मिलते हैं।' उन्होंने डीपीआईआईटी के सचिव भाटिया के भाषण की विशेष सराहना की। एकरमैन ने यह भी रेखांकित किया कि जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके साथ प्रतिवर्ष 50 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार होता है।
प्रधानमंत्री मोदी की सराहना
निवर्तमान राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक बहुत ही मिलनसार, बहुत ही सक्रिय साझेदार रहे हैं। उन्होंने फेडरल चांसलर को निमंत्रित किया, जो इस संबंध में उनकी वास्तविक रुचि को दर्शाता है।'
जयशंकर से विदाई मुलाकात
एकरमैन की विदाई से पूर्व भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने उनसे मुलाकात की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन के विदा करने से पहले की मुलाकात अच्छी रही। मैंने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में उनके बहुमूल्य योगदान की सराहना की। भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।' इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को और गहरा करने पर विचार-विमर्श हुआ।
एकरमैन का कार्यकाल और परिचय
फिलिप एकरमैन का नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में मुख्य कार्यकाल 2022 से जुलाई 2026 तक रहा। उन्होंने बॉन, हीडलबर्ग और उट्रेक्ट विश्वविद्यालयों से कला इतिहास और अर्थशास्त्र की शिक्षा प्राप्त की तथा 1993 में कला इतिहास में डॉक्टरेट उपाधि हासिल की। उसी वर्ष वे जर्मन विदेश सेवा में शामिल हुए। गौरतलब है कि उनके कार्यकाल में भारत-जर्मनी संबंध रणनीतिक, तकनीकी और रक्षा सहयोग के मामले में उल्लेखनीय रूप से प्रगाढ़ हुए। अब देखना होगा कि उनके उत्तराधिकारी के नेतृत्व में यह सबमरीन समझौता समयसीमा के भीतर साकार होता है या नहीं।