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भारत में F1 की वापसी: सरकार ने 2028 ग्रांड प्रिक्स के लिए टास्क फोर्स गठित किया

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भारत में F1 की वापसी: सरकार ने 2028 ग्रांड प्रिक्स के लिए टास्क फोर्स गठित किया

सारांश

एक दशक से अधिक के अंतराल के बाद केंद्र सरकार ने भारत में F1 की वापसी को गंभीरता से लेते हुए टास्क फोर्स बनाई है। 2028 ग्रांड प्रिक्स की व्यवहार्यता, टैक्स बाधाओं और PPP मॉडल की समीक्षा होगी — यह भारतीय मोटरस्पोर्ट्स के इतिहास में एक नया मोड़ हो सकता है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 15 सितंबर 2026 को भारत में फॉर्मूला वन और मोटरस्पोर्ट्स पुनरुद्धार के लिए टास्क फोर्स का गठन किया।
टास्क फोर्स 2028 में भारत में F1 ग्रांड प्रिक्स की मेज़बानी की व्यवहार्यता का आकलन करेगी।
कार्य-दायरे में टैक्सेशन की समीक्षा, PPP मॉडल की संभावनाएँ और बुनियादी ढाँचे की ज़रूरतें शामिल हैं।
भारत ने पहले 2011 से 2013 के बीच बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट, ग्रेटर नोएडा में तीन F1 ग्रांड प्रिक्स आयोजित किए थे।
टास्क फोर्स आर्थिक, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय निवेश लाभों का भी आकलन करेगी।

केंद्र सरकार ने 15 सितंबर 2026 को भारत में फॉर्मूला वन (F1) और मोटरस्पोर्ट्स को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाते हुए एक टास्क फोर्स का गठन किया है। इस टास्क फोर्स को विशेष रूप से 2028 में भारत में F1 ग्रांड प्रिक्स की मेज़बानी की व्यवहार्यता जाँचने और मोटरस्पोर्ट्स इकोसिस्टम को मज़बूत करने का दायित्व सौंपा गया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत में अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को लेकर सरकार की रुचि लगातार बढ़ रही है।

टास्क फोर्स का दायरा और उद्देश्य

सरकार द्वारा निर्धारित टर्म्स ऑफ रेफरेंस (कार्य-दायरे) के अनुसार, इस टास्क फोर्स के सामने पाँच प्रमुख कार्य हैं। पहला, भारत में मोटरस्पोर्ट्स के सतत विकास के लिए नीतिगत हस्तक्षेपों की पहचान करना और एक समग्र रोडमैप तैयार करना। दूसरा, देश के मोटरस्पोर्ट्स इकोसिस्टम का विस्तृत मूल्यांकन करना और कराधान (टैक्सेशन) सहित तमाम चुनौतियों की समीक्षा करना।

तीसरा कार्य है — बड़े मोटरस्पोर्ट इवेंट्स से भारत को मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय, आर्थिक, पर्यटन और निवेश लाभों का आकलन करना। चौथा, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल की संभावनाओं समेत एक व्यापक नीति ढाँचे पर सिफारिशें देना। और पाँचवाँ, 2028 में भारत में F1 ग्रांड प्रिक्स के आयोजन की व्यवहार्यता का आकलन करना।

मोटरस्पोर्ट्स इकोसिस्टम की मौजूदा स्थिति

गौरतलब है कि भारत में फॉर्मूला वन का अनुभव संक्षिप्त रहा है — ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर 2011 से 2013 के बीच केवल तीन F1 ग्रांड प्रिक्स आयोजित हुए थे, जिनके बाद आर्थिक और नीतिगत कारणों से भारत F1 कैलेंडर से बाहर हो गया। एक दशक से अधिक के अंतराल के बाद यह पहल संकेत देती है कि सरकार इस बार अधिक व्यवस्थित तरीके से इस क्षेत्र में वापसी की योजना बना रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, टैक्सेशन का मुद्दा पहले भी एक बड़ी बाधा रहा था, जिसके कारण F1 टीमों और आयोजकों को भारी वित्तीय दबाव झेलना पड़ा था। नई टास्क फोर्स इसी गाँठ को सुलझाने की कोशिश करेगी।

आर्थिक और पर्यटन लाभ का आकलन

टास्क फोर्स के जनादेश में विशेष रूप से यह शामिल है कि भारत में बड़े मोटरस्पोर्ट इवेंट्स से कितना पर्यटन राजस्व, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा हासिल हो सकती है। अन्य देशों के अनुभवों को देखा जाए तो सऊदी अरब, सिंगापुर, जापान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने F1 की मेज़बानी से अरबों डॉलर का पर्यटन राजस्व अर्जित किया है। भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए यह संभावना और भी बड़ी हो सकती है।

बुनियादी ढाँचे की आवश्यकताओं की पहचान भी टास्क फोर्स के एजेंडे में है — जिसमें सर्किट उन्नयन, आतिथ्य सुविधाएँ और कनेक्टिविटी शामिल हैं।

आगे की राह

यदि टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर सरकार 2028 F1 ग्रांड प्रिक्स की मेज़बानी की हरी झंडी देती है, तो यह न केवल मोटरस्पोर्ट्स प्रेमियों के लिए बल्कि पर्यटन, आतिथ्य और संबद्ध उद्योगों के लिए भी बड़ा अवसर होगा। टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद PPP मॉडल के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता खुल सकता है, जिससे दीर्घकालिक मोटरस्पोर्ट्स इकोसिस्टम विकसित होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह वही रास्ता है जो 2011 में भी अपनाया गया था — और नतीजा तीन साल बाद कैलेंडर से बाहर होने में हुआ। असली सवाल यह है कि क्या इस बार सरकार टैक्सेशन की उस जड़ को काटेगी जो F1 टीमों के उपकरणों पर भारी सीमा शुल्क के रूप में पहले बाधा बनी थी। बिना एक स्थायी और प्रतिस्पर्धी वित्तीय ढाँचे के, 2028 की समयसीमा महत्वाकांक्षी कम और जोखिमभरी ज़्यादा लगती है — क्योंकि F1 की मेज़बानी हासिल करने में आमतौर पर वर्षों की बातचीत लगती है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में फॉर्मूला वन के लिए गठित टास्क फोर्स का क्या काम होगा?
यह टास्क फोर्स भारत में मोटरस्पोर्ट्स इकोसिस्टम का व्यापक मूल्यांकन करेगी और 2028 में F1 ग्रांड प्रिक्स की मेज़बानी की व्यवहार्यता जाँचेगी। इसके अलावा यह टैक्सेशन की चुनौतियों, बुनियादी ढाँचे की ज़रूरतों और PPP मॉडल पर सिफारिशें देगी।
भारत में आखिरी बार F1 ग्रांड प्रिक्स कब हुआ था?
भारत में आखिरी F1 ग्रांड प्रिक्स 2013 में ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर आयोजित हुआ था। 2011 से 2013 के बीच कुल तीन ग्रांड प्रिक्स हुए, जिनके बाद आर्थिक और नीतिगत कारणों से भारत F1 कैलेंडर से बाहर हो गया।
F1 की भारत में वापसी में टैक्सेशन बड़ी बाधा क्यों है?
पहले F1 के दौरान टीमों के उपकरणों और कारों पर भारी आयात शुल्क लगाया गया था, जिसने इवेंट को वित्तीय रूप से अव्यवहारिक बना दिया। नई टास्क फोर्स के जनादेश में इसी कराधान मुद्दे की समीक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
2028 F1 ग्रांड प्रिक्स से भारत को क्या फायदा होगा?
सरकार के अनुसार, बड़े मोटरस्पोर्ट इवेंट से पर्यटन राजस्व, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। सिंगापुर और सऊदी अरब जैसे देशों ने F1 मेज़बानी से अरबों डॉलर का पर्यटन आय अर्जित की है।
टास्क फोर्स में PPP मॉडल क्यों शामिल किया गया है?
F1 जैसे विश्वस्तरीय आयोजनों के लिए भारी बुनियादी ढाँचा निवेश की आवश्यकता होती है, जिसे अकेले सरकार वहन करना कठिन मानती है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के ज़रिये निजी क्षेत्र की भागीदारी से वित्तीय बोझ बाँटा जा सकता है और दीर्घकालिक मोटरस्पोर्ट्स इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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