भरत तिवारी मामला: मंत्री मिथिलेश तिवारी बोले — न्यायिक जांच की रिपोर्ट का इंतजार करें, प्रशांत किशोर ने पूछा जांच का दायरा क्या
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार में मंत्री मिथिलेश तिवारी ने 24 जून 2026 को पटना में कहा कि चर्चित भरत तिवारी मामले में राज्य सरकार न्यायिक जांच के आदेश दे चुकी है और रिपोर्ट आने तक सभी पक्षों को धैर्य बनाए रखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना में संलिप्त पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है। दूसरी ओर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जांच के दायरे और उसकी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मंत्री मिथिलेश तिवारी का बयान
मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, 'सरकार वहाँ के लोगों की भावनाओं के साथ है। न्यायिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद उसी के अनुसार कार्रवाई होगी।' उन्होंने सभी नागरिकों से कानून का सम्मान करने और विधि व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग देने की अपील की।
शिक्षकों पर मंत्री की राय
मिथिलेश तिवारी ने इस अवसर पर शिक्षा व्यवस्था पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के गौरव के प्रतीक हैं और अधिकांश अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी से करते हैं। हालाँकि, जो शिक्षक केवल उपस्थिति दर्ज कराकर चले जाते हैं, उन पर 'पैनी नजर' रखी जा रही है। उन्होंने कहा, 'शिक्षकों पर सवाल नहीं उठाना चाहिए, लेकिन अगर कोई कोताही बरतेगा तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई होगी।'
मंत्री ने नई शिक्षा नीति (NEP) की सराहना करते हुए कहा कि सरकार इसे पूरी निष्ठा और प्रामाणिकता के साथ लागू कर रही है, जिससे शिक्षकों की भूमिका और सम्मान दोनों में वृद्धि हुई है।
प्रशांत किशोर के सवाल
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी केस में न्यायिक जांच की घोषणा को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच का दायरा क्या होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गृह मंत्रालय या गृह विभाग की भूमिका की भी जांच होगी।
प्रशांत किशोर ने कहा, 'कोई भी पुलिस अधिकारी पटना से आदेश मिले बिना गोली नहीं चला सकता।' उन्होंने माँग की कि जांच में यह पता लगाया जाए कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया, उस आदेश पर हस्ताक्षर करने वाले मजिस्ट्रेट के विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी, और STF अधिकारी की जवाबदेही किस प्रकार तय की जाएगी।
आगे क्या होगा
न्यायिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार की अगली कार्रवाई की दिशा तय होगी। विपक्ष और नागरिक समाज दोनों इस बात पर एकमत हैं कि जांच का दायरा व्यापक और पारदर्शी होना चाहिए। यह मामला बिहार में पुलिस जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता की बड़ी बहस का केंद्र बन गया है।