भारतीय रेलवे की 800+ रसोइयों में 2,394 एआई कैमरे, रोज़ 350 अलर्ट से हो रही खाद्य स्वच्छता की निगरानी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेलवे की रसोइयों में खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरों की तैनाती को दक्षिण रेलवे की जोनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी (ZRUCC) के सदस्य एमजीएफए सैयद जाफर अली ने यात्रियों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी हस्तक्षेप बताया है। उनके अनुसार, रेलवे मंत्रालय ने देशभर में आधुनिक निगरानी प्रणाली के ज़रिये रेलवे कैटरिंग सेवाओं को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की पहल शुरू की है, जिसके शुरुआती परिणाम उत्साहजनक बताए जा रहे हैं।
कितने कैमरे, कितनी रसोइयाँ
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) द्वारा संचालित देशभर की 800 से अधिक रसोइयों में 2,394 से ज़्यादा एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। सैयद जाफर अली ने बताया कि इन रसोइयों में प्रतिदिन तैयार होने वाले भोजन की संख्या पहले लगभग 16 लाख थी, जो अब बढ़कर 18 लाख से अधिक हो गई है — और यह सारा भोजन देशभर के रेल यात्रियों को परोसा जाता है।
केंद्रीय नियंत्रण कक्ष और अलर्ट प्रणाली
इन कैमरों की निगरानी नई दिल्ली स्थित एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से की जाती है। एआई प्रणाली प्रतिदिन औसतन 350 अलर्ट जारी करती है। सैयद जाफर अली के अनुसार, पिछले एक महीने में अकेले 13,000 से अधिक अलर्ट दर्ज किए गए, जिन पर तत्काल कार्रवाई की गई। अलर्ट सीधे संबंधित किचन प्रबंधकों तक पहुँचाए जाते हैं, जिससे समस्या का समाधान बिना देरी के हो सके।
क्या-क्या पकड़ती है यह तकनीक
यह एआई प्रणाली रसोई कर्मचारियों द्वारा स्वच्छता नियमों के पालन पर पैनी नज़र रखती है। सैयद जाफर अली के अनुसार, कैमरे यह पहचान सकते हैं कि कोई कर्मचारी हेड कैप या पारदर्शी दस्ताने पहने हुए है या नहीं। यदि निर्धारित समय पर सफाई, झाड़ू या पोछा नहीं हुआ, तो प्रणाली स्वतः उसकी सूचना दर्ज कर लेती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन कैमरों में 7 से 8 मिलीमीटर आकार के कीटों तक की पहचान करने की क्षमता है।
राजनीतिक संदर्भ और जवाबदेही
सैयद जाफर अली ने इस पहल को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की यात्री सुरक्षा और खाद्य स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब बताया। यह ऐसे समय में आया है जब रेलवे कैटरिंग की गुणवत्ता को लेकर यात्रियों की शिकायतें वर्षों से चर्चा में रही हैं। गौरतलब है कि IRCTC पर खाने की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर अतीत में कई बार सवाल उठाए जा चुके हैं, और यह तकनीकी कदम उन्हीं चिंताओं के जवाब में उठाया गया प्रतीत होता है।
आगे की राह
इस प्रणाली के विस्तार और प्रभाव का आकलन अभी जारी है। यदि अलर्ट-से-सुधार का यह चक्र निरंतर और पारदर्शी तरीके से काम करता रहा, तो रेलवे कैटरिंग में स्वच्छता के मानक उल्लेखनीय रूप से ऊँचे उठ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक की सफलता उसके नियमित ऑडिट और जवाबदेही तंत्र पर निर्भर करेगी।