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भरतपुर जनाना अस्पताल में नवजात बच्ची की मौत, परिजनों ने चिकित्सकों पर लगाया लापरवाही का आरोप

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भरतपुर जनाना अस्पताल में नवजात बच्ची की मौत, परिजनों ने चिकित्सकों पर लगाया लापरवाही का आरोप

सारांश

भरतपुर के जनाना अस्पताल में 9 अक्टूबर को जन्मी एक नवजात बच्ची की बुखार के बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक ने बच्ची को ठीक से देखे बिना दूर से दवा लिख दी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर परिजनों को शांत किया और मामला जाँच के दायरे में है।

मुख्य बातें

भरतपुर के जनाना अस्पताल में 9 अक्टूबर को जन्मी नवजात बच्ची की 10 अक्टूबर को मृत्यु हो गई।
माँ रिंकी को 8 अक्टूबर को भर्ती कराया गया था; ऑपरेशन से बच्ची का जन्म हुआ था।
परिजनों का कथित आरोप — चिकित्सक ने बच्ची की जाँच किए बिना दूर से पैरासिटामोल सहित दवाएँ लिख दीं।
बच्ची के ताऊ लक्ष्मणकांत ने दोषी चिकित्सकों पर कार्रवाई और परिवार को न्याय दिलाने की माँग की।
मथुरा गेट थाना पुलिस ने मौके पर पहुँचकर परिजनों को समझाया; अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं।

राजस्थान के भरतपुर स्थित जनाना अस्पताल में एक नवजात बच्ची की मृत्यु हो गई, जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। 10 अक्टूबर को सूचना मिलने पर मथुरा गेट थाना पुलिस मौके पर पहुँची और परिजनों को समझाइश दी। परिजनों ने जिम्मेदार चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग करते हुए बच्ची का शव लेकर घर की राह ली।

घटनाक्रम: कैसे हुई बच्ची की मौत

देवकीनंदन की पत्नी रिंकी को 8 अक्टूबर को प्रसव हेतु जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 9 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे ऑपरेशन के जरिए बच्ची का जन्म हुआ। परिजनों के अनुसार, जन्म के समय बच्ची पूरी तरह स्वस्थ थी, किंतु अगले दिन उसे तेज बुखार की शिकायत हो गई।

परिजनों का आरोप: दूर से लिख दी दवाएँ

परिजन बच्ची को दिखाने के लिए अस्पताल के आईसीयू और वार्ड में लेकर पहुँचे। परिजनों का कथित आरोप है कि उस समय उपस्थित चिकित्सक ने बच्ची की ठीक से जाँच नहीं की और दूर से ही पैरासिटामोल सहित बुखार की अन्य दवाइयाँ लिख दीं। उनका कहना है कि अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने नवजात की बिगड़ती तबीयत पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया, जिसके परिणामस्वरूप बच्ची की हालत बिगड़ती गई और अंततः उसकी मृत्यु हो गई।

परिवार की माँग: जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई

बच्ची के ताऊ लक्ष्मणकांत ने आरोप लगाया कि यदि समय पर उचित उपचार मिलता, तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जाँच कराकर दोषी चिकित्सकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने और परिवार को न्याय दिलाने की माँग की। गौरतलब है कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकीय लापरवाही के ऐसे आरोप राजस्थान में पहली बार नहीं उठे हैं।

पुलिस का बयान

मथुरा गेट थाना के एसआई हरेंद्र सिंह ने बताया कि रिंकी को 8 अक्टूबर को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था और 9 अक्टूबर को सुबह 11 बजे बच्ची का जन्म हुआ। बुखार आने पर परिजन बच्ची को अस्पताल में दिखाने लाए थे और उपचार के बावजूद बच्ची की मृत्यु हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर परिजनों को शांत किया, जिसके बाद वे बच्ची का शव लेकर घर चले गए।

आगे क्या होगा

अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। परिजनों की माँग पर जाँच की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका अहम होगी। यह मामला राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में नवजात देखभाल की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि जाँच में सही साबित होता है, तो यह न केवल चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि नवजात गहन देखभाल इकाइयों (NICU) की उपलब्धता और उपयोग पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है। राजस्थान में सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का भार अत्यधिक है, लेकिन इसे लापरवाही की ढाल नहीं बनाया जा सकता। जब तक स्वास्थ्य विभाग जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करता और जिम्मेदारी तय नहीं होती, ऐसी घटनाएँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरतपुर जनाना अस्पताल में नवजात बच्ची की मौत कैसे हुई?
9 अक्टूबर को ऑपरेशन से जन्मी बच्ची को अगले दिन तेज बुखार हुआ। परिजनों के अनुसार, चिकित्सक ने बच्ची की उचित जाँच किए बिना दूर से दवाएँ लिख दीं और समय पर उचित उपचार न मिलने से बच्ची की हालत बिगड़ती गई और उसकी मृत्यु हो गई।
परिजनों ने अस्पताल पर क्या आरोप लगाए हैं?
परिजनों का कथित आरोप है कि चिकित्सकों और कर्मचारियों ने नवजात की तबीयत पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। बच्ची के ताऊ लक्ष्मणकांत ने कहा कि समय पर सही इलाज मिलता तो बच्ची की जान बच सकती थी।
पुलिस ने इस मामले में क्या कदम उठाया?
मथुरा गेट थाना पुलिस के एसआई हरेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुँची और परिजनों को समझाइश दी। परिजन बच्ची का शव लेकर घर चले गए; फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
माँ रिंकी और बच्ची को अस्पताल में कब भर्ती किया गया था?
रिंकी को 8 अक्टूबर को प्रसव के लिए जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 9 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे ऑपरेशन के जरिए बच्ची का जन्म हुआ, जो जन्म के समय स्वस्थ बताई गई थी।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
परिजनों ने जिम्मेदार चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई और जाँच की माँग की है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा मामले की समीक्षा की संभावना है, हालाँकि अभी तक किसी आधिकारिक जाँच की घोषणा नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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