क्या अमेरिकी सरकार से मिल रहे लाभ को उठाने वाले प्रवासियों की लिस्ट में भारत का नाम नहीं है?

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क्या अमेरिकी सरकार से मिल रहे लाभ को उठाने वाले प्रवासियों की लिस्ट में भारत का नाम नहीं है?

सारांश

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रवासी कल्याण की रैंकिंग का आंकड़ा साझा किया, जिसमें भारत का नाम नहीं है। यह भारतीय प्रवासियों की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। जानिए इस लिस्ट में और कौन से देश शामिल हैं और भारत का नाम क्यों गायब है।

Key Takeaways

  • भारत का नाम प्रवासी कल्याण की सूची में अनुपस्थित है।
  • इस सूची में भूटान सबसे ऊपर है।
  • भारतीय प्रवासी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।
  • अनुसंधान से पता चला है कि भारतीय प्रवासी सरकारी सहायता पर कम निर्भर हैं।
  • भारतीय प्रवासी सिलिकॉन वैली में कई स्टार्टअप्स के आरंभ में शामिल हैं।

वॉशिंगटन, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर प्रवासी कल्याण पाने वाले लोगों की देश के आधार पर रैंकिंग से जुड़ी एक सूची साझा की है। ध्यान देने योग्य है कि इस दो पृष्ठों की सूची में भारत का नाम अनुपस्थित है।

भारत का नाम न होना कोई साधारण बात नहीं है। यह अमेरिका के प्रवासी समुदाय में भारतीय प्रवासियों की विशेष आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।

ये आंकड़े दो तालिकाओं में प्रदर्शित हैं, जिन्हें एकल डेटासेट में संकलित किया गया है। ये अमेरिका में सरकारी सहायता प्राप्त करने वाले प्रवासी परिवारों का हिस्सा प्रदर्शित करते हैं, जिसमें दर 80 प्रतिशत से अधिक से लेकर 40 प्रतिशत तक है।

इस सूची में सबसे पहले भूटान का नाम है, जहाँ भूटानी प्रवासियों की अमेरिकी सरकार से सहायता प्राप्त करने की दर 81.4 प्रतिशत है। इसके बाद यमन (उत्तर) 75.2 प्रतिशत, सोमालिया 71.9 प्रतिशत और मार्शल आइलैंड्स 71.4 प्रतिशत पर हैं। कई अन्य देशों में भी कल्याणकारी सहायता का स्तर उच्च है।

डोमिनिकन गणराज्य और अफगानिस्तान की दर 68.1 प्रतिशत है। कांगो 66 प्रतिशत, गिनी 65.8 प्रतिशत और इराक 60.7 प्रतिशत पर हैं। इस समूह में कई सेंट्रल अमेरिकन, कैरिबियन और अफ्रीकी देशों का समावेश है।

ग्वाटेमाला 56.5 प्रतिशत, सूडान 56.3 प्रतिशत और अल साल्वाडोर 55.4 प्रतिशत पर है। होंडुरास 52.9 प्रतिशत पर है। बांग्लादेश 54.8 प्रतिशत पर सूचीबद्ध है।

इसके अलावा, सूची के दूसरे पृष्ठ पर वे देश शामिल हैं जिनमें कल्याण में कम लेकिन फिर भी उल्लेखनीय भागीदारी है। आइवरी कोस्ट इस सूची में 49.1 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है, इसके बाद लाइबेरिया 48.9 प्रतिशत और अल्जीरिया 48.1 प्रतिशत के साथ हैं। सीरिया 48 प्रतिशत पर सूचीबद्ध है।

जॉर्डन और लीबिया दोनों 47.8 प्रतिशत पर हैं। इथियोपिया 47.6 प्रतिशत, रवांडा 47.1 प्रतिशत और मोरक्को 46.6 प्रतिशत पर दिखाए गए हैं। पाकिस्तान 40.2 प्रतिशत और मिस्र 39.3 प्रतिशत पर शामिल हैं।

भारत का नाम इस दो पृष्ठों की सूची में कहीं भी नहीं है। अमेरिका में प्रवासी और कल्याण के मुख्य राजनीतिक मुद्दे हैं, और भारत इनमें अक्सर चर्चा में रहता है। इसके बावजूद भी सूची में इसकी अनुपस्थिति है।

कई वर्षों के सार्वजनिक अनुसंधान से पता चला है कि अमेरिका में भारतीय प्रवासी सभी समूहों में सबसे अधिक कमाई करने वालों में से हैं। वे कार्यबल में अधिक भागीदारी और सरकारी सहायता पर कम निर्भरता भी दर्शाते हैं।

इंडस्ट्री और अकादमिक अध्ययनों से यह भी पता चला है कि भारतीय प्रवासी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में, विशेष रूप से तकनीक, स्वास्थ्य सेवा और इंजीनियरिंग में, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे आयकर राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और सिलिकॉन वैली में कई स्टार्टअप्स के आरंभ में शामिल रहे हैं।

Point of View

यह आंकड़ा भारत के प्रवासियों की आर्थिक स्थिति को दर्शाते हुए यह स्पष्ट करता है कि कैसे भारतीय प्रवासी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह लिस्ट भारत की अनुपस्थिति पर विचार करने का एक अवसर है।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

क्यों भारत का नाम प्रवासी कल्याण की लिस्ट में नहीं है?
भारत का नाम नहीं होना यह दर्शाता है कि भारतीय प्रवासी सरकारी सहायता पर कम निर्भर हैं और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत है।
कौन से देश इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं?
इस लिस्ट में भूटान सबसे ऊपर है, इसके बाद यमन और सोमालिया का नाम आता है।
क्या भारतीय प्रवासी अमेरिका की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं?
जी हां, भारतीय प्रवासी तकनीक, स्वास्थ्य सेवा और इंजीनियरिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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