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क्या भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 100 करोड़ के पार हो गई?

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क्या भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 100 करोड़ के पार हो गई?

सारांश

भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या ने नया मील का पत्थर पार किया है। जानिए कैसे ब्रॉडबैंड की वृद्धि से यह संख्या 100 करोड़ के पार पहुंच गई है। इस रिपोर्ट में जानें कि शहरी और ग्रामीण ग्राहकों के बीच किस प्रकार का अंतर है।

मुख्य बातें

भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 100 करोड़ के पार जा चुकी है।
ब्रॉडबैंड ग्राहक 979.71 मिलियन हैं।
ग्रामीण और शहरी इंटरनेट ग्राहकों के बीच बड़ा अंतर है।
दूरसंचार क्षेत्र का सकल राजस्व 96,646 करोड़ रुपए है।
912 निजी सैटेलाइट टीवी चैनल्स को अनुमति मिली है।

नई दिल्ली, 4 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। ब्रॉडबैंड विकास के चलते भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 30 जून, 2025 तक 1 अरब को पार कर 1,002.85 मिलियन हो गई है, जो मार्च के मुकाबले 3.48 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा सरकार द्वारा पेश किया गया है।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन 100 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं में से 4.47 करोड़ के पास वायर्ड इंटरनेट कनेक्शन हैं, जबकि 95.81 करोड़ के पास वायरलेस कनेक्शन हैं।

ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या 3.77 प्रतिशत बढ़कर 979.71 मिलियन हो गई है, जबकि नैरोबैंड यूजर्स की संख्या घटकर 23.14 मिलियन रह गई है। जून तिमाही में कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या 1,218.36 मिलियन तक पहुंच गई, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 1.46 प्रतिशत अधिक है।

आधिकारिक प्रेस रिलीज़ में बताया गया है कि इससे कुल दूरसंचार घनत्व 86.09 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जो पिछली तिमाही में 85.04 प्रतिशत था।

जनसंख्या के संदर्भ में, शहरी इंटरनेट ग्राहकों की संख्या लगभग 57.94 करोड़ है, जबकि ग्रामीण इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 42.33 करोड़ है।

आंकड़ों के अनुसार, वायरलेस सेवाओं के लिए मासिक औसत राजस्व प्रति उपयोगकर्ता (एआरपीयू) 186.62 रुपए है, जबकि प्रति वायरलेस ग्राहक औसत उपयोग मिनट (एमओयू) हर महीने 16.76 घंटे है।

दूरसंचार क्षेत्र का सकल राजस्व 96,646 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो पिछली तिमाही से 1.63 प्रतिशत कम है, लेकिन सालाना आधार पर 12.34 प्रतिशत अधिक है। समायोजित सकल राजस्व 81,325 करोड़ रुपए रहा, जो पिछली तिमाही से 2.65 प्रतिशत अधिक है। एक्सेस सेवाओं का समायोजित सकल राजस्व में 83.62 प्रतिशत का योगदान है।

प्रेस रिलीज़ में आगे कहा गया है कि लाइसेंस शुल्क 2.63 प्रतिशत बढ़कर 6,506 करोड़ रुपए हो गया और पास-थ्रू शुल्क 19.45 प्रतिशत घटकर 10,457 करोड़ रुपए हो गया।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने लगभग 912 निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को अपलिंकिंग या डाउनलिंकिंग या दोनों के लिए अनुमति दी है।

भारत में डाउनलिंकिंग के लिए उपलब्ध 902 सैटेलाइट टीवी चैनलों में से, 30 जून, 2025 तक 333 सैटेलाइट पे टीवी चैनल हैं।

-राष्ट्र प्रेस

एबीएस/

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे तकनीकी विकास ने हमारी जीवनशैली को प्रभावित किया है। यह एक सकारात्मक संकेत है कि हम डिजिटल युग में आगे बढ़ रहे हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या कब 100 करोड़ के पार गई?
भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 30 जून, 2025 तक 100 करोड़ के पार गई।
ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या में कितनी वृद्धि हुई?
ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या 3.77 प्रतिशत बढ़कर 979.71 मिलियन हो गई है।
भारत में ग्रामीण और शहरी इंटरनेट ग्राहकों की संख्या क्या है?
भारत में शहरी इंटरनेट ग्राहकों की संख्या लगभग 57.94 करोड़ है, जबकि ग्रामीण इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 42.33 करोड़ है।
दूरसंचार क्षेत्र का सकल राजस्व कितना है?
दूरसंचार क्षेत्र का सकल राजस्व 96,646 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
भारत में कितने सैटेलाइट टीवी चैनल उपलब्ध हैं?
भारत में डाउनलिंकिंग के लिए 902 सैटेलाइट टीवी चैनल उपलब्ध हैं।
राष्ट्र प्रेस
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