18 जुलाई 2026
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भोजपुर में जर्जर दीवार ढही: दो मासूम चचेरे भाइयों की मौत, दादा घायल

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भोजपुर में जर्जर दीवार ढही: दो मासूम चचेरे भाइयों की मौत, दादा घायल

सारांश

बिहार के भोजपुर जिले में जर्जर बाउंड्री वॉल के ढहने से दो मासूम चचेरे भाइयों — शिवांश (3) और अंकित (ढाई वर्ष) — की मौत हो गई। दादा घायल हैं। बिहिया पुलिस जाँच में जुटी है और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

मुख्य बातें

भोजपुर जिले के बिहिया नगर परिषद, वार्ड नंबर 6 में 18 जुलाई 2026 को जर्जर बाउंड्री वॉल ढहने से हादसा हुआ।
मृतकों की पहचान शिवांश कुमार (3 वर्ष) और अंकित कुमार (ढाई वर्ष) के रूप में हुई — दोनों चचेरे भाई थे।
शिवांश की मौत घटनास्थल पर हुई; अंकित को अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसने दम तोड़ा।
दादा छोटक रजक भी हादसे में घायल हुए, उनका उपचार जारी है।
भोजपुर जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को सूचित किया गया; पीड़ित परिवारों को मुआवजे की प्रक्रिया शुरू।
दोनों बच्चों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए; पुलिस दीवार गिरने के कारणों की जाँच कर रही है।

बिहार के भोजपुर जिले में 18 जुलाई 2026 को एक दर्दनाक हादसे में जर्जर बाउंड्री वॉल के ढहने से दो मासूम चचेरे भाइयों — शिवांश कुमार (3 वर्ष) और अंकित कुमार (ढाई वर्ष) — की जान चली गई। यह घटना बिहिया नगर परिषद के वार्ड नंबर 6 में हुई, जहाँ दोनों बच्चे घर के बाहर खेल रहे थे। हादसे में उनके दादा छोटक रजक भी घायल हो गए, जिनका अस्पताल में उपचार जारी है।

कैसे हुआ हादसा

अधिकारियों के अनुसार, दोनों बच्चे अपने घर के बाहर खेल रहे थे, तभी पुरानी और कमज़ोर बाउंड्री वॉल अचानक भरभराकर गिर पड़ी और दोनों मलबे में दब गए। पास खड़े उनके दादा छोटक रजक भी इस हादसे की चपेट में आ गए।

जोरदार आवाज़ सुनकर आसपास के लोग दौड़े आए और मलबा हटाकर पीड़ितों को बाहर निकाला। शिवांश कुमार की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल अंकित कुमार को नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसने भी दम तोड़ दिया।

मृतक बच्चों का परिचय

शिवांश कुमार अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। अंकित कुमार अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। दोनों बच्चे वार्ड नंबर 6 के निवासी थे। दोनों की असमय मृत्यु ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही बिहिया पुलिस मौके पर पहुँची और जाँच शुरू की। अधिकारियों ने भोजपुर के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को सूचित किया, जिन्होंने उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। दोनों बच्चों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस जर्जर दीवार गिरने के कारणों की जाँच कर रही है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

आम जनता पर असर

दोनों नाबालिग बच्चों की दुखद मृत्यु से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। शोकाकुल परिजन और स्थानीय लोग पीड़ित परिवारों के घर संवेदना व्यक्त करने पहुँचे। कई स्थानीय नेताओं ने भी गाँव का दौरा किया और परिवारों को सांत्वना दी।

यह घटना जर्जर और असुरक्षित निर्माण संरचनाओं से उत्पन्न खतरों की ओर ध्यान दिलाती है, जो आवासीय क्षेत्रों में बच्चों के लिए घातक साबित हो सकती हैं। आगे यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक गहरी संरचनात्मक लापरवाही की कहानी है। बिहार में जर्जर इमारतों और असुरक्षित निर्माण से होने वाली मौतें लगातार सामने आती रही हैं, फिर भी नगर परिषदों द्वारा खतरनाक संरचनाओं की नियमित जाँच और समय पर कार्रवाई की व्यवस्था कमज़ोर बनी हुई है। मुआवजे की घोषणा ज़रूरी है, लेकिन असली सवाल यह है कि बिहिया नगर परिषद ने इस जर्जर दीवार को पहले क्यों नहीं चिह्नित किया। जब तक जवाबदेही तय नहीं होती और ऐसी संरचनाओं के नियमित निरीक्षण का तंत्र नहीं बनता, ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजपुर में दीवार गिरने का हादसा कब और कहाँ हुआ?
यह हादसा 18 जुलाई 2026 को बिहार के भोजपुर जिले में बिहिया नगर परिषद के वार्ड नंबर 6 में हुआ। घर के बाहर खेल रहे दो मासूम बच्चे जर्जर बाउंड्री वॉल के ढहने से मलबे में दब गए।
हादसे में किन बच्चों की मौत हुई?
मृतकों की पहचान शिवांश कुमार (3 वर्ष) और अंकित कुमार (ढाई वर्ष) के रूप में हुई है, जो चचेरे भाई थे। शिवांश की मौत घटनास्थल पर हुई, जबकि अंकित ने अस्पताल में दम तोड़ा।
हादसे में और कौन घायल हुआ?
दोनों बच्चों के दादा छोटक रजक भी दीवार गिरने की चपेट में आए और घायल हो गए। उनका अस्पताल में इलाज जारी है।
पुलिस और प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
बिहिया पुलिस मौके पर पहुँची और जाँच शुरू की। भोजपुर के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को सूचित किया गया है। दोनों बच्चों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इस हादसे से क्या सबक लिया जाना चाहिए?
यह घटना आवासीय क्षेत्रों में जर्जर और असुरक्षित निर्माण संरचनाओं के खतरे को उजागर करती है। नगर परिषदों को ऐसी संरचनाओं की नियमित जाँच और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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