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पुनपुन नदी की बाढ़ से अरवल का शादीपुर गांव डूबा, 8 दिन बाद भी राहत नहीं; ग्रामीण बोले — सड़क पर जानवरों संग रात गुज़ार रहे

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पुनपुन नदी की बाढ़ से अरवल का शादीपुर गांव डूबा, 8 दिन बाद भी राहत नहीं; ग्रामीण बोले — सड़क पर जानवरों संग रात गुज़ार रहे

सारांश

अरवल के शादीपुर गाँव में पुनपुन नदी की बाढ़ का पानी घुसे 8 दिन बीत चुके हैं — घर गिर रहे हैं, खाना नहीं, नाव नहीं, डॉक्टर नहीं। ग्रामीण सड़क पर जानवरों के साथ रात गुज़ार रहे हैं, जबकि अधिकारी गाँव के बाहर से लौट जाते हैं।

मुख्य बातें

पुनपुन नदी के जलस्तर में वृद्धि से अरवल जिले के तीन ब्लॉक के गाँव जलमग्न, शादीपुर बुरी तरह प्रभावित।
बाढ़ का पानी घुसे 8 दिन बीतने के बाद भी नाव, भोजन, चिकित्सा — किसी की व्यवस्था नहीं।
ग्रामीण विष्णु यादव , अवधेश कुमार यादव और अखिलेश यादव ने प्रशासन और विधायक की अनुपस्थिति पर नाराज़गी जताई।
बंशी पुलिस स्टेशन के चारों ओर पानी भरा; कई घर ढह गए।
जल संसाधन विभाग ने पटना गांधी घाट और मोकामा हथीडा में गंगा के एचएफएल पार करने की आशंका जताई।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने 8 जिलों — भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय, जहानाबाद — में अलर्ट जारी किया।

बिहार के अरवल जिले में पुनपुन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तीन ब्लॉक के दर्जनों गाँव जलमग्न हो गए हैं। शादीपुर गाँव समेत कई बस्तियाँ पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं — सड़कें जलाशय बन गई हैं, घरों की दीवारें ढह रही हैं और बंशी पुलिस स्टेशन के चारों ओर पानी भरा हुआ है। पीड़ितों के अनुसार बाढ़ का पानी घुसे 8 दिन से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक राहत अब तक नहीं पहुँची।

ग्रामीणों की आपबीती

शादीपुर निवासी विष्णु यादव ने बताया, 'सड़क पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। आने-जाने और खाने-पीने की कोई सुविधा नहीं है। घर में पानी भरने के कारण बाहर रहना पड़ रहा है। पानी भरने से कई लोगों के घर गिर गए हैं, लेकिन कोई संज्ञान लेने वाला नहीं है। प्रशासन की ओर से अभी तक कुछ मदद नहीं मिली है।'

एक अन्य पीड़ित अवधेश कुमार यादव ने कहा, 'नदी का जलस्तर बढ़ने से कई लोगों के घर गिर गए हैं, खाने के लिए लोग मोहताज हैं। यहाँ चिकित्सा की भी सुविधा नहीं है — तबीयत खराब होने पर घर में ही परेशान होना पड़ता है। विधायक की ओर से भी अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। 6-7 दिन से गाँव में भरे पानी के बीच खतरों से घिरकर जीवन जीना पड़ रहा है।'

स्थानीय निवासी अखिलेश यादव ने बताया, 'घर में पानी घुस जाने की वजह से सड़क पर जानवरों के साथ रहना पड़ रहा है। अधिकारी गाँव के बाहर तक आकर लौट जाते हैं। बाढ़ का पानी घुसे 8 दिन होने के बावजूद अभी तक नाव की व्यवस्था तक नहीं की गई है।'

व्यापक बाढ़ की स्थिति

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार भर में गंगा, गंडक, पुनपुन और दरधा सहित प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार ऊपर चढ़ रहा है, जिससे राज्य के नए-नए इलाके जलमग्न हो रहे हैं। जल संसाधन विभाग के अनुसार, पटना के गांधी घाट और मोकामा के हथीडा में गंगा के अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) को पार करने की आशंका जताई गई है।

प्रशासन का अलर्ट

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद के नदी तटों और निचले इलाकों में रहने वाले निवासियों के लिए अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और एहतियाती उपाय अपनाने का आग्रह किया है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि बिहार हर वर्ष मानसून के दौरान विनाशकारी बाढ़ का सामना करता है, फिर भी राहत तंत्र की तैयारी पर सवाल उठते रहते हैं। अरवल जिले में पीड़ितों की शिकायत है कि न भोजन-पानी की व्यवस्था है, न चिकित्सा सुविधा, न नाव — और जनप्रतिनिधि भी अनुपस्थित हैं। यह स्थिति उन हज़ारों परिवारों की है जो खुले आसमान के नीचे या सड़क किनारे शरण लेने को मजबूर हैं।

क्या होगा आगे

जल संसाधन विभाग की चेतावनी के मद्देनज़र आने वाले दिनों में जलस्तर और बढ़ सकता है। राहत एवं बचाव कार्यों की गति और नाव की उपलब्धता पर ध्यान केंद्रित होना ज़रूरी है, अन्यथा प्रभावित परिवारों की मुश्किलें और गहरी होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल उठता है कि अलर्ट जारी करना पर्याप्त है या नाव, राशन और चिकित्सा दल की पहले से तैनाती ज़रूरी है। जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति इस संकट में जवाबदेही के गहरे संकट को उजागर करती है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरवल जिले में बाढ़ की स्थिति क्या है?
बिहार के अरवल जिले में पुनपुन नदी के जलस्तर में वृद्धि से तीन ब्लॉक के गाँव जलमग्न हो गए हैं। शादीपुर सहित कई गाँवों में 8 दिन से अधिक समय से बाढ़ का पानी भरा है और घर ढह रहे हैं।
शादीपुर गाँव के लोगों को क्या परेशानियाँ हो रही हैं?
ग्रामीणों के अनुसार उनके पास न खाने-पीने की व्यवस्था है, न चिकित्सा सुविधा, और न ही आवागमन के लिए नाव। लोग सड़क पर जानवरों के साथ रहने को मजबूर हैं, जबकि कई घर पानी भरने से गिर चुके हैं।
बिहार के किन जिलों में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है?
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद के नदी तटों व निचले इलाकों के निवासियों के लिए अलर्ट जारी किया है।
पटना में गंगा का जलस्तर कितना खतरनाक है?
जल संसाधन विभाग के अनुसार पटना के गांधी घाट और मोकामा के हथीडा में गंगा के अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) को पार करने की आशंका जताई गई है। यह स्थिति और अधिक इलाकों के जलमग्न होने का खतरा बढ़ाती है।
प्रशासन ने अब तक क्या राहत कार्य किए हैं?
ग्रामीणों के बयानों के अनुसार प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली है। अधिकारी गाँव के बाहर तक आकर लौट जाते हैं और बाढ़ के 8 दिन बाद भी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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