मधुबन विधायक राणा रणधीर सिंह का व्हाट्सऐप हैक, ₹28,000 की ऑनलाइन ठगी की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मोतिहारी से एक गंभीर साइबर अपराध का मामला सामने आया है, जहाँ मधुबन विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राणा रणधीर सिंह का व्हाट्सऐप अकाउंट हैक कर लिया गया। 16 मई 2025 को उजागर हुए इस मामले में अज्ञात हैकर विधायक के नंबर से उनके परिचितों को मैसेज भेजकर ₹28,000 की ऑनलाइन ठगी करने की कोशिश कर रहा है। विधायक ने तत्काल पटना साइबर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
मुख्य घटनाक्रम
हैकर ने विधायक राणा रणधीर सिंह के व्हाट्सऐप नंबर का उपयोग करते हुए उनके परिचितों को संदेश भेजने शुरू किए। सामने आए एक स्क्रीनशॉट के अनुसार, हैकर ने पहले 'नमस्ते' कहकर संपर्क साधा और फिर लिखा — 'एक छोटी सी मदद चाहिए।' जब संबंधित व्यक्ति ने 'जी, आदेश' कहकर जवाब दिया, तो हैकर ने लिखा, '₹28,000 ऑनलाइन पेमेंट हो पाएगा? अभी मेरा यूपीआई नेटवर्क इश्यू है, एक घंटे में वापस करते हैं।'
यह तरीका साइबर ठगी में प्रचलित 'इम्पर्सोनेशन फ्रॉड' का क्लासिक उदाहरण है, जिसमें किसी विश्वसनीय व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग कर भरोसे को हथियार बनाया जाता है।
विधायक की प्रतिक्रिया
मामले की जानकारी मिलते ही राणा रणधीर सिंह ने सार्वजनिक अपील जारी की और अपने परिचितों से सतर्क रहने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नंबर से आने वाले किसी भी पैसे संबंधी संदेश पर भरोसा न किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने पटना स्थित साइबर थाना में लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की माँग की है।
पुलिस जाँच
शिकायत दर्ज होने के बाद साइबर थाना, पटना ने जाँच शुरू कर दी है। पुलिस हैकर की पहचान और अकाउंट हैक होने के तरीके का पता लगाने में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, यह जाँच का प्रारंभिक चरण है और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आम जनता पर असर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार समेत पूरे देश में साइबर ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। जनप्रतिनिधियों के अकाउंट हैक होने से उनके व्यापक संपर्क नेटवर्क का दुरुपयोग होने का खतरा कई गुना अधिक होता है, क्योंकि लोग इन नंबरों पर तत्काल भरोसा करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी परिचित के नंबर से आई अचानक पैसे की माँग पर बिना फोन पर सत्यापन किए भुगतान नहीं करना चाहिए।
क्या होगा आगे
पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हैकर की पहचान करने की कोशिश कर रही है। यदि ठगी सफल हुई होती तो यह भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किसी व्यक्ति ने वास्तव में पैसे ट्रांसफर किए या नहीं — जाँच जारी है।