20 सितंबर 2026
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बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी का पहला दीक्षांत समारोह: 667 छात्रों को डिग्री, 47 को मेडल

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बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी का पहला दीक्षांत समारोह: 667 छात्रों को डिग्री, 47 को मेडल

सारांश

गुजरात के राजपीपला में बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी का पहला दीक्षांत समारोह सिर्फ एक रस्म नहीं था — यह उस बदलाव का जश्न था जो 25 साल में एक कॉलेज से लेकर पूर्ण विश्वविद्यालय तक की यात्रा में दिखता है। 667 डिग्रियाँ और 47 मेडल आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा की नई जमीन तोड़ने का प्रतीक हैं।

मुख्य बातें

बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी, राजपीपला ने 20 सितंबर 2026 को अपना पहला दीक्षांत समारोह आयोजित किया।
समारोह में 667 छात्रों को डिग्री और 47 ग्रेजुएट्स को गोल्ड व सिल्वर मेडल प्रदान किए गए।
गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल समारोह में उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 साल पहले इस क्षेत्र में केवल एक कॉलेज था; अब 5 इंजीनियरिंग कॉलेज, 6 पॉलिटेक्निक और 11 मेडिकल कॉलेज हैं।
जनजातीय विकास मंत्री नरेश पटेल ने वनबंधु कल्याण योजना और कन्या केलवानी महोत्सव जैसी पहलों का उल्लेख किया।

राजपीपला स्थित बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी ने 20 सितंबर 2026 (रविवार) को अपना पहला दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जिसमें 667 छात्रों को डिग्री प्रदान की गईं और 47 ग्रेजुएट्स को गोल्ड व सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया। गुजरात के नर्मदा जिले में स्थापित इस विश्वविद्यालय के इस ऐतिहासिक आयोजन में राज्य के गवर्नर एवं विश्वविद्यालय के चांसलर आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भाग लिया।

समारोह का विवरण और कार्यक्रम

दीक्षांत समारोह की शुरुआत गवर्नर आचार्य देवव्रत के औपचारिक उद्घाटन से हुई, जिसके बाद ग्रेजुएट छात्रों को दीक्षांत शपथ दिलाई गई। समारोह में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस समेत विभिन्न संकायों के ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन और एमएसडब्ल्यू (MSW) कार्यक्रम के छात्रों को उनकी डिग्रियाँ प्रदान की गईं। गवर्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने चुने हुए मेधावी छात्रों को मेडल और डिग्री सौंपे।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और आदिवासी शिक्षा का संदर्भ

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस अवसर को महज एक दीक्षांत समारोह से कहीं आगे बताया। उन्होंने कहा, 'यह सिर्फ पहला दीक्षांत समारोह नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित 'आदिवासी युवा बदलाव' का पहला जश्न भी है।'

पटेल ने याद दिलाया कि लगभग 25 साल पहले इस क्षेत्र में ग्रेजुएशन स्तर की पढ़ाई के लिए केवल एक कॉलेज था, जिसके कारण छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सूरत और वड़ोदरा जैसे बड़े शहरों तक जाना पड़ता था। उन्होंने बताया कि तब से आदिवासी इलाकों में शिक्षा के अवसर बढ़े हैं — अब वहाँ 5 इंजीनियरिंग कॉलेज, 6 पॉलिटेक्निक और 11 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं।

युवाओं को संदेश: जड़ों से जुड़े रहें, देश के विकास में भागीदार बनें

मुख्यमंत्री पटेल ने डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों से अपील की कि वे आधुनिक शिक्षा ग्रहण करते हुए भी अपनी जड़ों, संस्कृति और भूमि से जुड़े रहें। उन्होंने युवाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने तक सीमित न रहने की सलाह देते हुए कहा कि वे अपने ज्ञान और हुनर का उपयोग स्थानीय विकास के लिए करें और 'विकसित भारत' के संकल्प के तहत 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ आगे बढ़ें।

सरकारी पहलों पर जनजातीय विकास मंत्री का बयान

जनजातीय विकास मंत्री नरेश पटेल ने जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार के लिए सरकार की विभिन्न पहलों का उल्लेख किया, जिनमें वनबंधु कल्याण योजना, शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवानी महोत्सव प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्तियों और अन्य सरकारी योजनाओं ने आदिवासी छात्रों के लिए चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की राह आसान की है।

क्या होगा आगे

गौरतलब है कि बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी और गोविंद गुरु यूनिवर्सिटी दोनों को आदिवासी समुदायों के लिए उच्च शिक्षा का केंद्र बनाने की दिशा में काम हो रहा है। यह पहला दीक्षांत समारोह उस दीर्घकालिक प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसका लक्ष्य आदिवासी युवाओं को शिक्षा के ज़रिए मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें स्वावलंबी बनाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी संख्याओं से आगे की है — क्या ये डिग्रियाँ आदिवासी क्षेत्र में रोज़गार और उद्यमिता में बदलती हैं? 5 इंजीनियरिंग कॉलेज और 11 मेडिकल कॉलेज का विस्तार उत्साहजनक है, पर आलोचक यह भी पूछते हैं कि बुनियादी ढाँचे और फैकल्टी की गुणवत्ता क्या इस विस्तार के साथ कदम मिला रही है। 'आदिवासी युवा बदलाव' का नारा तभी सार्थक होगा जब ग्रेजुएट युवाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर मिलें — अन्यथा पलायन की पुरानी समस्या बरकरार रह सकती है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी का पहला दीक्षांत समारोह कब और कहाँ हुआ?
यह समारोह 20 सितंबर 2026 (रविवार) को गुजरात के नर्मदा जिले के राजपीपला में आयोजित किया गया। इसमें 667 छात्रों को डिग्री और 47 मेधावियों को गोल्ड व सिल्वर मेडल प्रदान किए गए।
बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी की स्थापना कहाँ और क्यों की गई?
यह विश्वविद्यालय गुजरात के नर्मदा जिले में स्थापित किया गया है, जो मुख्यतः आदिवासी क्षेत्र है। इसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों को उनके गृह क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें सूरत या वड़ोदरा जैसे दूर के शहरों में न जाना पड़े।
इस दीक्षांत समारोह में कौन-कौन से कोर्स के छात्रों को डिग्री मिली?
समारोह में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस समेत विभिन्न संकायों के ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन और एमएसडब्ल्यू (MSW) कार्यक्रम के छात्रों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि 25 साल पहले इस इलाके में ग्रेजुएशन के लिए केवल एक कॉलेज था। अब वहाँ 5 इंजीनियरिंग कॉलेज, 6 पॉलिटेक्निक और 11 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने छात्रों से अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने और स्थानीय विकास में योगदान देने की अपील की।
आदिवासी छात्रों के लिए सरकार ने कौन-सी प्रमुख योजनाएँ चलाई हैं?
जनजातीय विकास मंत्री नरेश पटेल के अनुसार वनबंधु कल्याण योजना, शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवानी महोत्सव जैसी पहलें आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा छात्रवृत्तियों ने चिकित्सा और इंजीनियरिंग जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रवेश के अवसर बढ़ाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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