अभिषेक बनर्जी पर एफआईआर: भाजपा बोली 'गुंडे की भाषा', टीएमसी ने कहा राजनीतिक बदला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अभिषेक बनर्जी पर एफआईआर: भाजपा बोली 'गुंडे की भाषा', टीएमसी ने कहा राजनीतिक बदला

सारांश

पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान कथित भड़काऊ बयानों को लेकर तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी पर दर्ज एफआईआर ने सियासी घमासान छेड़ दिया है। भाजपा ने इसे 'गुंडे की भाषा' पर कानूनी कार्रवाई बताया, जबकि टीएमसी ने इसे 'राजनीतिक बदला' करार देकर नकार दिया।

मुख्य बातें

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान कथित आक्रामक बयानों को लेकर एफआईआर दर्ज की गई।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा यह 'गुंडे की भाषा' थी, लोकतंत्र में इसकी कोई जगह नहीं।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि बनर्जी ने 'जान से मारने और सिर कलम करने' जैसे बयान दिए।
तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने एफआईआर को 'राजनीतिक बदले की कार्रवाई' बताया।
तृणमूल नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने एफआईआर को 'फर्जी' करार देते हुए कहा कि बनर्जी के बयान संविधान के दायरे में थे।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर दिए गए आक्रामक बयानों को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार, 16 मई को इस एफआईआर का खुलकर समर्थन किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' की संज्ञा दी।

भाजपा की प्रतिक्रिया: 'लोकतंत्र में ऐसी भाषा की जगह नहीं'

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, 'अभिषेक बनर्जी ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है, उसकी लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है। यह किसी नेता की भाषा नहीं थी, बल्कि एक गुंडे की भाषा थी।' उनका यह बयान सीधे तौर पर बनर्जी के चुनावी भाषणों को निशाना बनाता है।

भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने कहा कि इस तरह के 'भड़काऊ और जहरीले' भाषण देना न तो कोई धर्मनिरपेक्ष विशेषाधिकार है और न ही किसी पद की छूट। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र बहस पर आधारित होता है, न कि धमकी और डर पर। बंगाल में हेट स्पीच पर चुनिंदा धर्मनिरपेक्षता काम नहीं करेगी।' इल्मी ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल की राजनीति 'अत्यधिक तुष्टीकरण, ध्रुवीकरण और डर' पर टिकी है।

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि तृणमूल सांसद जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, वह 'बदतमीजी' वाली थी। उन्होंने चेताया, 'अगर हम सभ्यता के दायरे से बाहर निकलकर कुछ भी करते हैं, तो कानून अपना काम करेगा।'

पूनावाला के गंभीर आरोप

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने 'जान से मारने और सिर कलम करने' जैसे नफरती बयान दिए हैं। पूनावाला ने कहा, 'कई बार उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देने वाले बयान दिए हैं।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'अगर किसी ने कोई भड़काऊ बयान दिया है और किसी ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, तो उन्हें अदालत में जाकर जवाब देना होगा।' पूनावाला ने यह भी कहा कि 'राजनीतिक हिंसा तृणमूल के डीएनए में है।'

टीएमसी का पलटवार: 'फर्जी और राजनीतिक एफआईआर'

तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने इस एफआईआर को 'भाजपा की राजनीतिक बदले की कार्रवाई' बताया। उन्होंने तर्क दिया, 'यह एक राजनीतिक एफआईआर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में कई बयान दिए थे, हमने उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज नहीं कीं, क्योंकि चुनाव प्रचार की गहमागहमी में ऐसी बातें कही जाती हैं।'

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और तृणमूल नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने एफआईआर को 'फर्जी' करार दिया। उन्होंने कहा, 'संविधान हमें बोलने का अधिकार देता है। अभिषेक बनर्जी ने जो कुछ भी कहा, वह संविधान के दायरे में ही था।' चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि यह 'अभिषेक बनर्जी, ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के सभी नेताओं को कुचलने की सोची-समझी कोशिश है।'

आगे क्या होगा

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल राजनीतिक रूप से अत्यंत तनावपूर्ण है। गौरतलब है कि भाजपा और तृणमूल के बीच चुनावी बयानबाजी और कानूनी शिकायतों का यह सिलसिला नया नहीं है। अब यह देखना होगा कि अदालत इस एफआईआर पर क्या रुख अपनाती है और क्या अभिषेक बनर्जी को राहत मिलती है या उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बंगाल की राजनीतिक जंग का नया मोर्चा है — जहाँ दोनों पक्ष एक-दूसरे पर 'भाषा की मर्यादा तोड़ने' का आरोप लगाते हैं, पर खुद की जवाबदेही से बचते हैं। गौरतलब है कि चुनावी भाषणों में उत्तेजक बयानबाजी भाजपा और तृणमूल — दोनों की रणनीति का हिस्सा रही है, जिसे सौगत रॉय ने भी परोक्ष रूप से स्वीकार किया। असली सवाल यह है कि क्या यह एफआईआर न्यायिक प्रक्रिया तक पहुँचेगी या चुनावी बयानबाजी की तरह ही हवा में घुल जाएगी। बंगाल में राजनीतिक हिंसा और भड़काऊ भाषण की शिकायतें लंबे समय से दर्ज होती रही हैं, पर दोषसिद्धि दुर्लभ है — यही चुनिंदा न्याय का असली चेहरा है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी पर एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर दिए गए आक्रामक और भड़काऊ बयानों के आधार पर तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। भाजपा के अनुसार इन बयानों में 'जान से मारने और सिर कलम करने' जैसी कथित भाषा शामिल थी।
भाजपा ने इस एफआईआर पर क्या कहा?
भाजपा ने एफआईआर का पूरा समर्थन किया। राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि अभिषेक बनर्जी की भाषा 'गुंडे की भाषा' थी और लोकतंत्र में इसकी कोई जगह नहीं। शहजाद पूनावाला ने कहा कि भड़काऊ बयान देने वालों को अदालत में जवाब देना होगा।
तृणमूल कांग्रेस ने एफआईआर को किस रूप में देखा?
तृणमूल कांग्रेस ने इस एफआईआर को 'राजनीतिक बदले की कार्रवाई' बताया। सांसद सौगत रॉय ने इसे 'राजनीतिक एफआईआर' कहा और नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इसे 'फर्जी' करार देते हुए कहा कि बनर्जी के बयान संविधान के दायरे में थे।
क्या इस तरह की एफआईआर पहले भी दर्ज हुई हैं?
बंगाल में चुनावी मौसम के दौरान भाजपा और तृणमूल के नेताओं के बयानों पर राजनीतिक शिकायतें और एफआईआर दर्ज होना नई बात नहीं है। तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने खुद कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के बयानों पर शिकायत दर्ज नहीं की, क्योंकि 'चुनाव प्रचार में ऐसी बातें होती हैं।'
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
यह एफआईआर अब न्यायिक प्रक्रिया में जाएगी, जहाँ अभिषेक बनर्जी को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बंगाल में चुनावी माहौल को देखते हुए यह मामला आने वाले हफ्तों में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 4 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले