बीएलए का दावा: बलूचिस्तान में जियारत-सुराब हमलों में 25 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए
सारांश
मुख्य बातें
बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने 4 सितंबर को दावा किया कि उसके लड़ाकों ने बलूचिस्तान के जियारत और सुराब जिलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर दो अलग-अलग हमले किए, जिनमें कथित तौर पर 25 सैनिक मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। पाकिस्तानी सेना या सरकार की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
जियारत क्रॉस हमले का विवरण
बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलोच ने एक बयान में कहा कि संगठन के 'फतेह स्क्वाड' ने जियारत क्रॉस पर पाकिस्तानी सेना के काफिले की चार गाड़ियों पर घात लगाकर हमला किया। उनके अनुसार, इस हमले में दो गाड़ियाँ — जिनमें एक मिलिट्री ट्रक भी शामिल था — नष्ट कर दी गईं और 18 जवान मारे गए। बयान में यह भी दावा किया गया कि पाँच घायल जवान मौके से भाग निकले और काफिले से हथियार जब्त किए गए।
बीएलए के आधिकारिक मीडिया आउटलेट 'हक्कल' ने 1 मिनट 11 सेकंड का एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें कथित तौर पर जियारत क्रॉस हमले के दृश्य दिखाए गए हैं। फुटेज में हथियारबंद लड़ाके आग की लपटों में घिरी गाड़ियों के पास खड़े और घटनास्थल से शव व हथियार ले जाते दिखाई दिए।
सुराब में दूसरा ऑपरेशन
बयान के अनुसार, सुराब के हाजिका इलाके में बीएलए के स्पेशल टैक्टिकल ऑपरेशन्स स्क्वाड (एसटीओएस) ने रिमोट से एक विस्फोटक-युक्त वाहन में धमाका किया। इस हमले में सेना की एक गाड़ी नष्ट हुई और कथित तौर पर सात जवान मारे गए। दोनों हमलों को मिलाकर बीएलए ने कुल 25 सैनिकों के मारे जाने का दावा किया है।
बढ़ते हमलों का व्यापक संदर्भ
ये घटनाएँ ऐसे समय में हुई हैं जब बलूचिस्तान में बलूच सशस्त्र समूहों द्वारा पाकिस्तानी सेना और पुलिस बलों पर हमलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। गौरतलब है कि पिछले महीने बीएलए ने बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों में 36 ऑपरेशन्स की जिम्मेदारी ली थी और दावा किया था कि उनमें 33 जवान मारे गए तथा कई अन्य घायल हुए।
यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है और क्षेत्र में सशस्त्र संघर्ष की तीव्रता बढ़ती जा रही है।
आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी
बीएलए ने अपने बयान में बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और तथाकथित 'औपनिवेशिक शोषण' वाली परियोजनाओं के विरुद्ध 'आर्थिक नाकेबंदी' की नीति जारी रखने का संकल्प लिया। संगठन ने कहा, "बलूचिस्तान के मुख्य व्यापारिक रास्तों पर हाईवे जाम करने की कार्रवाई बढ़ाई जाएगी और कब्जा करने वाली सेना के आर्थिक हितों की रक्षा करने वाले सभी वाहनों और परियोजनाओं को निशाना बनाया जाता रहेगा।"
समूह ने स्थानीय ड्राइवरों, ठेकेदारों और व्यापारियों को भी चेतावनी दी कि वे सेना को राशन या कोई सहायता न दें, अन्यथा उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।
आगे की स्थिति
बीएलए ने स्पष्ट किया है कि वह पाकिस्तानी सेना के खिलाफ अपनी कार्रवाई तब तक जारी रखेगा, जब तक बलूचिस्तान की तथाकथित 'राष्ट्रीय आजादी' का लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता। क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।