बीएलए का दावा: बलूचिस्तान में 36 अभियानों में 33 पाकिस्तानी सैनिक ढेर
सारांश
मुख्य बातें
बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने दावा किया है कि उसने 10 से 18 अगस्त 2026 के बीच बलूचिस्तान में चलाए गए 36 अलग-अलग अभियानों में पाकिस्तानी सेना के 33 जवानों को मार गिराया और कई को घायल किया। यह दावा 24 अगस्त को जारी एक आधिकारिक बयान में बीएलए प्रवक्ता जीयांद बलोच ने किया। पाकिस्तानी सेना की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
मुख्य हमलों का घटनाक्रम
18 अगस्त को चाघी जिले के डलबंदिन और यकमाच के बीच बीएलए लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना के काफिले और व्यावसायिक वाहनों पर घात लगाकर हमला किया। बयान के अनुसार, 30 मिनट से अधिक चले इस हमले में तीन पाकिस्तानी जवान मारे गए, कई घायल हुए और व्यावसायिक वाहनों को भारी क्षति पहुँची।
कलात जिले के मकाई इलाके के निकट, बीएलए लड़ाकों ने रिमोट-कंट्रोल आईईडी से उस समय हमला किया जब पाकिस्तानी सैनिक एक खाली बंकर में प्रवेश कर रहे थे। दावे के मुताबिक, इस विस्फोट में छह जवान मौके पर ही मारे गए।
17 अगस्त को होशाब के निकट 'ताल' इलाके में पाकिस्तानी सेना की एक गाड़ी पर आईईडी हमले में कथित तौर पर दो जवान मारे गए और चार घायल हुए। उसी दिन चारसार में चागाई व्यापार मार्ग पर दो व्यावसायिक वाहन जब्त किए गए और नोकचाह में एक अन्य वाहन को निशाना बनाया गया।
16 अगस्त को बासिमा में पिटोक, जीक और सुराब में गदार के मुख्य हाईवे पर तीन स्थानों पर नाकेबंदी कर घंटों तक चेकिंग अभियान चलाया गया। जीक इलाके में पाकिस्तानी सेना के आगे बढ़ने के प्रयास को रोकने के दौरान छह जवान मारे गए, चार घायल हुए और एक गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई — यह भी बीएलए का दावा है।
10 और 11 अगस्त की रात को भी भीषण झड़पों में कई सुरक्षाकर्मियों के हताहत होने का दावा किया गया है, हालाँकि इसकी संख्या स्पष्ट नहीं की गई।
बीएलए की 'आर्थिक नाकेबंदी' की नीति
बीएलए ने अपने बयान में कहा कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों के विरुद्ध 'आर्थिक नाकेबंदी' की नीति को और सख्ती से लागू किया जाएगा। समूह ने नुश्की-खरन मार्ग के जरीन जंगल में वाहनों के टायर पंचर करने और खरन-क्वेटा मार्ग पर पिटकिन में घंटों तक हाईवे जाम रखने की भी जानकारी दी।
बीएलए ने कहा, 'बलूचिस्तान के अहम व्यावसायिक मार्गों पर हाईवे जाम करने की कार्रवाई और बढ़ाई जाएगी, और कब्जा करने वाली सेना के आर्थिक हितों की रक्षा करने वाले सभी वाहनों और परियोजनाओं को निशाना बनाया जाता रहेगा।'
स्थानीय नागरिकों को चेतावनी
बीएलए ने स्थानीय ड्राइवरों, ठेकेदारों और व्यापारियों को कड़ी चेतावनी दी है कि वे पाकिस्तानी सेना को राशन या किसी भी प्रकार की रसद सहायता देने से बचें। समूह ने कहा कि जमुरान और आस-पास के क्षेत्रों में सेना के लिए सप्लाई पर लगी रोक पूरी तरह लागू रहेगी और आदेश न मानने पर जान-माल के नुकसान की जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी।
पाकिस्तानी सेना और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
पाकिस्तानी सेना ने इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। गौरतलब है कि बलूचिस्तान में सशस्त्र संघर्ष दशकों पुराना है और बीएलए को पाकिस्तान, अमेरिका तथा यूरोपीय संघ ने आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़ी परियोजनाओं पर हमलों की घटनाएँ पहले से बढ़ी हुई हैं। बीएलए के दावों की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं हो पाई है, इसलिए इन्हें कथित तौर पर ही माना जाना चाहिए।