बेंगलुरु बॉवरिंग अस्पताल दीवार हादसा: जांच में क्रिकेट नेट निर्माण और लापरवाही दोषी, 7 की मौत

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बेंगलुरु बॉवरिंग अस्पताल दीवार हादसा: जांच में क्रिकेट नेट निर्माण और लापरवाही दोषी, 7 की मौत

सारांश

बेंगलुरु के बॉवरिंग अस्पताल में दीवार गिरने से 7 लोगों की मौत कोई महज़ मौसमी हादसा नहीं था — जांच रिपोर्ट ने उजागर किया कि सीएसआर फंड से बने क्रिकेट नेट एरिया के लिए दीवार के सहारे छह फुट मिट्टी का ढेर लगाया गया था। यह लापरवाही, लालफीताशाही और जवाबदेही के अभाव की कहानी है।

मुख्य बातें

बेंगलुरु के बॉवरिंग अस्पताल की दीवार गिरने से 7 लोगों की मौत हुई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था।
जांच रिपोर्ट में आठ फुट दीवार के सहारे छह फुट मिट्टी का ढेर लगाने को मुख्य कारण बताया गया।
अस्पताल प्रशासन ने कथित तौर पर सीएसआर फंड से दीवार के पास क्रिकेट प्रैक्टिस एरिया बनवाया था।
स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियर, ठेकेदार और अस्पताल प्रशासन को रिपोर्ट में दोषी ठहराया गया।
लोकायुक्त जस्टिस बी.एस.
पाटिल ने स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज किया और राज्यभर में जर्जर इमारतों की समीक्षा का निर्देश दिया।

बेंगलुरु के बॉवरिंग और लेडी कर्जन अस्पताल की चारदीवारी गिरने की घटना में सात लोगों की मौत — जिनमें एक बच्चा भी शामिल था — के मामले में जांच रिपोर्ट मंगलवार, 12 मई को कर्नाटक सरकार को सौंप दी गई। बेंगलुरु के उपायुक्त जी. जगदीश द्वारा सौंपी गई इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरों, ठेकेदारों और अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही को इस त्रासदी का मुख्य कारण बताया गया है।

दीवार गिरने का मुख्य कारण

जांच रिपोर्ट के अनुसार, आठ फुट ऊंची चारदीवारी के सहारे करीब छह फुट ऊंचा मिट्टी का ढेर लगाया गया था, जिससे दीवार पर असहनीय दबाव बन गया था। सूत्रों ने बताया कि यह मिट्टी दीवार के निकट क्रिकेट नेट प्रैक्टिस एरिया बनाने के लिए डाली गई थी। ठेकेदार और स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियर इस जमा मिट्टी को समय रहते हटाने में नाकाम रहे, जिससे दीवार कमज़ोर होती चली गई।

सीएसआर फंड से बना स्टेडियम जैसा क्रिकेट एरिया

सूत्रों के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने कथित तौर पर एक दानकर्ता द्वारा दिए गए सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड का उपयोग करके दीवार के पास एक स्टेडियम जैसा क्रिकेट प्रैक्टिस एरिया तैयार कराया था। जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल प्रशासन ने कंपाउंड की दीवार के इतने निकट इस तरह के निर्माण कार्य की अनुमति देकर गंभीर लापरवाही बरती।

हादसे की पृष्ठभूमि

यह दुखद घटना बेंगलुरु में हुई भारी बारिश, तेज़ हवाओं और ओलावृष्टि के दौरान हुई, जब पीड़ित दीवार के पास आश्रय ले रहे थे। दीवार अचानक ढह गई और सभी सात लोग मलबे में दब गए। पुलिस और आपातकालीन सेवाएं तत्काल मौके पर पहुंचीं और स्थानीय लोगों की सहायता से अर्थमूवर के ज़रिए शवों को बाहर निकाला गया तथा घायलों को बचाया गया।

सरकार और लोकायुक्त की प्रतिक्रिया

घटना के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने स्वयं घटनास्थल का दौरा किया और उनके कार्यालय ने इस हादसे को दुखद बताते हुए मौतों की पुष्टि की। कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस बी.एस. पाटिल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और ज़िम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने राज्यभर में जर्जर इमारतों की पहचान कर उनकी मरम्मत या विध्वंस के लिए जवाबदेही तय करने की भी बात कही।

उपायुक्त का बयान और आगे की राह

उपायुक्त जी. जगदीश ने पत्रकारों से कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बॉवरिंग अस्पताल में दीवार क्यों गिरी?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, आठ फुट ऊंची दीवार के सहारे करीब छह फुट मिट्टी का ढेर लगाया गया था, जो क्रिकेट नेट प्रैक्टिस एरिया बनाने के लिए डाली गई थी। इस अत्यधिक दबाव और ठेकेदार व इंजीनियरों की लापरवाही के कारण दीवार ढह गई।
इस हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
बेंगलुरु के बॉवरिंग और लेडी कर्जन अस्पताल के पास दीवार गिरने से सात लोगों की मौत हुई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था। सभी की मौत मौके पर ही हो गई।
क्रिकेट नेट एरिया किस फंड से बनाया गया था?
सूत्रों के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने एक दानकर्ता द्वारा दिए गए सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड का उपयोग करके दीवार के पास स्टेडियम जैसा क्रिकेट प्रैक्टिस एरिया बनवाया था।
इस मामले में किन्हें दोषी ठहराया गया है?
जांच रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरों, निर्माण ठेकेदारों और अस्पताल प्रशासन को उनकी लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी के लिए दोषी ठहराया गया है।
लोकायुक्त ने इस मामले में क्या कदम उठाए?
कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस बी.एस. पाटिल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने राज्यभर में जर्जर इमारतों की पहचान कर उनकी मरम्मत या विध्वंस के लिए जवाबदेही तय करने का भी निर्देश दिया।
राष्ट्र प्रेस