कर्नाटक में 19.92 लाख एकड़ कृषि भूमि हस्तांतरण पर बीआर पाटिल ने राहुल गांधी को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीआर पाटिल ने 30 सितंबर 2026 को विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर कर्नाटक में कृषि भूमि के बड़े पैमाने पर हो रहे हस्तांतरण का मुद्दा पार्टी के भीतर उठाने की माँग की है। उन्होंने 'कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम' में किए गए संशोधनों की व्यापक समीक्षा की भी अपील की है। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब 'डेक्कन हेराल्ड' की एक हालिया रिपोर्ट ने खुलासा किया कि कृषि भूमि की खरीद और मालिकाना हक पर लगी पाबंदियों में ढील दिए जाने के बाद लगभग 19.92 लाख एकड़ कृषि भूमि का मालिकाना हक बदल चुका है।
पत्र में उठाए गए मुख्य मुद्दे
पाटिल ने अपने पत्र में कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम में हुए संशोधनों को किसानों के हितों के विरुद्ध बताते हुए इनकी तत्काल समीक्षा की माँग की। उन्होंने राहुल गांधी से आग्रह किया कि वे पार्टी के उचित मंच पर इस मामले को उठाएँ और यह सुनिश्चित करें कि कृषि भूमि के सुरक्षा उपाय बहाल किए जाएँ। उनके अनुसार, इन संशोधनों का असर छोटे और सीमांत किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कर्नाटक की दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है।
2023 चुनाव घोषणापत्र के वादे का हवाला
पाटिल ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने अपने 2023 कर्नाटक विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में पिछली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार द्वारा बनाए गए 'किसान-विरोधी कानूनों' को रद्द करने का स्पष्ट वादा किया था। उन्होंने तर्क दिया कि इस वादे को पूरा न करना पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने एक स्पष्ट नीतिगत रोडमैप और उचित विधायी उपायों की माँग की।
मतदाता सूची से नाम हटाने का मामला
पत्र में पाटिल ने एक अन्य गंभीर मुद्दे की ओर भी ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले आलंद विधानसभा क्षेत्र में 5,994 मतदाताओं के नाम कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने बताया कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है और माँग की कि इसे तार्किक अंजाम तक पहुँचाया जाए तथा कानून के मुताबिक जिम्मेदारी तय की जाए।
पाटिल का वैचारिक आधार
अपने पत्र में पाटिल ने अपने सार्वजनिक जीवन की वैचारिक बुनियाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा, 'मेरा सार्वजनिक जीवन महात्मा गांधी, डॉ. राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के आदर्शों के साथ-साथ धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के प्रति नेहरूवादी प्रतिबद्धता से आकार लेने वाला रहा है।' उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों का यह कर्तव्य है कि वे उन मुद्दों पर आवाज़ उठाएँ जिनका लोकतांत्रिक संस्थाओं और आम नागरिकों के जीवन पर सीधा असर पड़ता है।
आगे क्या
पाटिल ने राहुल गांधी से कृषि भूमि खरीद और मालिकाना हक से जुड़े सुरक्षा उपायों को बहाल करने के लिए 2023 घोषणापत्र के अनुरूप ठोस विधायी कदम उठाने की माँग की है। यह पत्र कांग्रेस के भीतर ही पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब नज़रें इस बात पर होंगी कि राहुल गांधी का कार्यालय इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और कर्नाटक सरकार भूमि सुधार वादों पर अपनी स्थिति को लेकर क्या कदम उठाती है।