एचएमटी जमीन विवाद: कांग्रेस ने चार पेज के दस्तावेज़ से कुमारस्वामी के आरोपों को किया खारिज
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में एचएमटी जमीन विवाद ने नया मोड़ लिया है। कांग्रेस ने 18 जुलाई को केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के आरोपों के जवाब में एक चार पेज का विस्तृत दस्तावेज़ जारी किया, जिसमें दावा किया गया कि एचएमटी एक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (PSU) है और सभी बड़े भूमि हस्तांतरण केंद्र सरकार अथवा एचएमटी द्वारा ही किए गए थे।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस ने अपने दस्तावेज़ में स्पष्ट किया कि 208.35 एकड़ भूमि के सबसे बड़े हस्तांतरण को 2017 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। इसके अलावा, 2020 में कर्नाटक में BJP सरकार के कार्यकाल के दौरान 443 एकड़ भूमि से वन का दर्जा हटाने का प्रयास किया गया था।
कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी पर आरोप लगाया कि वे एचएमटी को नियंत्रित करने वाले मंत्रालय का नेतृत्व करते हुए कर्नाटक सरकार को राजनीतिक रूप से निशाना बना रहे हैं।
कांग्रेस की स्थिति
कांग्रेस का कहना है कि कर्नाटक सरकार एचएमटी की भूमि को वापस प्राप्त करने और उसे वन भूमि के रूप में संरक्षित करने का प्रयास कर रही है। पार्टी ने कुमारस्वामी के उस आरोप को सिरे से खारिज किया जिसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने एचएमटी की 175 एकड़ जमीन को अन्य उद्देश्यों के लिए मोड़ा।
कांग्रेस ने मांग की कि यदि कुमारस्वामी के पास किसी अनियमितता के प्रमाण हैं, तो वे एचएमटी के सभी भूमि रिकॉर्ड सार्वजनिक करें।
कुमारस्वामी के आरोप
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि अतीत में नेताओं और निजी कंपनियों की मिलीभगत से एचएमटी की 175 एकड़ से अधिक भूमि को व्यावसायिक और आवासीय परिसरों के लिए मोड़ा गया। उनका यह भी कहना है कि राज्य सरकार इस भूमि को वन क्षेत्र घोषित कर केंद्र की पुनरुद्धार योजना में बाधा उत्पन्न कर रही है।
विवाद की पृष्ठभूमि
बेंगलुरु में स्थित एचएमटी की भूमि के स्वामित्व और उपयोग को लेकर केंद्र और कर्नाटक सरकार के बीच तीखा राजनीतिक टकराव चल रहा है। केंद्र सरकार इस सार्वजनिक उपक्रम को पुनर्जीवित करना चाहती है, जबकि राज्य सरकार इसे वन भूमि घोषित कर उसकी रक्षा करने की बात कर रही है। गौरतलब है कि यह विवाद केंद्र-राज्य संबंधों और भूमि नियंत्रण की व्यापक राजनीति का हिस्सा बन चुका है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस के दस्तावेज़ जारी करने के बाद अब सभी की निगाहें कुमारस्वामी की प्रतिक्रिया और एचएमटी के भूमि रिकॉर्ड सार्वजनिक होने की संभावना पर टिकी हैं। यह विवाद आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति को और गर्म कर सकता है।