कर्नाटक में बिजली क्षेत्र के निजीकरण पर BJP का विरोध, किसानों के सड़क पर उतरने की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कर्नाटक इकाई ने 12 जून को राज्य की कांग्रेस सरकार से बिजली क्षेत्र के निजीकरण को रोकने की माँग की है और आगाह किया है कि यदि ऐसा हुआ तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। बेंगलुरु स्थित BJP मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी नेताओं ने कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग (KERC) और राज्य सरकार पर किसान-विरोधी नीतियाँ अपनाने का आरोप लगाया।
मुख्य आरोप और चिंताएँ
पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद गोविंद कारजोल ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार टाटा पावर जैसी निजी कंपनियों को बिजली वितरण में प्रवेश देने की योजना बना रही है, जो किसान समुदाय में व्यापक असंतोष पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियाँ मुनाफे के लिए काम करती हैं, और यदि बिजली लाइनों का रखरखाव उन्हें सौंपा गया तो किसानों को जली हुई ट्रांसमिशन लाइनों या क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर की मरम्मत के लिए कंपनी-निर्धारित दरों पर भारी खर्च उठाना पड़ेगा।
कारजोल के अनुसार, सरकार पहले से ही किसानों से IP सेट कनेक्शन और ट्रांसफार्मर स्थापना के लिए ₹2.5 लाख से ₹3 लाख तक वसूल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि निजीकरण के बाद यह राशि ₹4 लाख से ₹5 लाख तक पहुँच सकती है।
BJP शासन से तुलना
कारजोल ने दावा किया कि BJP सरकार के कार्यकाल में किसान मात्र ₹25,000 का भुगतान कर और आवेदन जमा कर IP सेट कनेक्शन व ट्रांसफार्मर लगवा सकते थे। उनके अनुसार, राज्य में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद पिछले तीन वर्षों में यह लागत कई गुना बढ़ गई है, जिससे कृषि समुदाय को भारी आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि यह आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय में आए हैं जब कर्नाटक में कृषि संकट और बिजली दरों को लेकर पहले से ही बहस जारी है।
गारंटी योजनाओं पर विवाद
कर्नाटक के पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु ने अलग आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार अब सत्यापन और संशोधन के बहाने अपनी ही घोषित गारंटी योजनाओं को बंद करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता ने इन योजनाओं की माँग नहीं की थी — कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ के लिए इन्हें स्वयं घोषित किया था।
श्रीरामुलु ने यह भी दावा किया कि गृह लक्ष्मी योजना का भुगतान कथित तौर पर मृत लाभार्थियों के खातों में जमा किया जा रहा है, जो योजना के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों को उजागर करता है। उन्होंने सरकार से राज्य की जनता से माफी माँगने की माँग की।
धर्मस्थल मामले पर BJP का रुख
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कारजोल ने कहा कि धर्मस्थल मामले में सरकार एक विशेष जाँच दल (SIT) के माध्यम से जाँच कर रही है। उन्होंने धर्मस्थल को एक पवित्र तीर्थस्थल बताते हुए सरकार से इस मुद्दे को शीघ्र सुलझाने का आग्रह किया।
आगे की राह
BJP की यह माँग राज्य में बिजली क्षेत्र की नीति को लेकर राजनीतिक तनाव को और गहरा करती है। यह देखना होगा कि कर्नाटक सरकार KERC की सिफारिशों पर क्या अंतिम निर्णय लेती है और क्या निजी कंपनियों की भागीदारी का प्रस्ताव आगे बढ़ता है।