21 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू की वाराणसी मुठभेड़ में मौत पर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल, सीबीआई जांच की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू की वाराणसी मुठभेड़ में मौत पर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल, सीबीआई जांच की मांग

सारांश

टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू की वाराणसी मुठभेड़ मौत पर उनके भाई पूर्व विधायक गणेश गंझू ने इसे 'फर्जी' बताया। दावा: चतरा से पकड़कर यूपी ले जाया गया। सीबीआई जांच की माँग और आंदोलन की चेतावनी।

मुख्य बातें

टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू की वाराणसी में यूपी एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में मौत हुई, पुलिस के अनुसार उसने पहले फायरिंग की थी।
ब्रजेश पर झारखंड सरकार का ₹25 लाख और एनआईए का ₹5 लाख का इनाम था।
सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू ने मुठभेड़ को 'फर्जी' बताया और सीबीआई जांच की माँग की।
परिजनों का दावा है कि ब्रजेश को चतरा, झारखंड से पकड़कर उत्तर प्रदेश ले जाया गया।
ब्रजेश का शव सोमवार को उसके पैतृक गाँव लुट्टू सोहावन, लावालौंग पहुँचा।
सरकार की ओर से सीबीआई जांच माँग पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति पार्टी ऑफ इंडिया (टीएसपीसी) के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की वाराणसी में उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में मौत के बाद उनके भाई और सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू ने इसे 'फर्जी मुठभेड़' करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि ब्रजेश को झारखंड के चतरा जिले से पकड़कर उत्तर प्रदेश ले जाया गया और वहाँ साजिश के तहत उसकी हत्या की गई। पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की माँग करते हुए कहा कि यदि सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो वे चरणबद्ध आंदोलन करेंगे।

मुठभेड़ का घटनाक्रम

यूपी पुलिस एसटीएफ ने रविवार सुबह दावा किया कि वाराणसी के रामनगर इलाके में बाइक सवार ब्रजेश को रोकने की कोशिश के दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में वह घायल हो गया। बाद में अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार ब्रजेश पर झारखंड सरकार ने ₹25 लाख और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने ₹5 लाख का इनाम घोषित कर रखा था।

पूर्व विधायक के सवाल और आरोप

सोमवार को ब्रजेश का शव चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र के उसके पैतृक गाँव लुट्टू सोहावन पहुँचा। पत्रकारों से बातचीत में गणेश गंझू ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ब्रजेश बाइक चला रहा था, तो वह एक साथ दोनों हाथों में पिस्तौल लेकर कैसे फायरिंग कर सकता था। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की माँग की।

गणेश गंझू ने झारखंड पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कथित तौर पर दावा किया कि पहले ब्रजेश का इस्तेमाल माओवादियों के खिलाफ किया गया और बाद में उसकी हत्या की गई। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों का खंडन नहीं किया है, इसलिए ये दावे अभी सत्यापित नहीं हैं।

परिजनों ने बताई ब्रजेश की छवि

पूर्व विधायक ने कहा कि उनका भाई ब्रजेश सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहता था। उन्होंने बताया कि ब्रजेश वर्ष 2010 से पंचायत प्रतिनिधि था और गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता करता था। उसने लावालौंग में गोपाल सिंह भोक्ता इंटर कॉलेज की स्थापना भी की थी। यह एक ऐसा विवरण है जिसे परिजनों ने मुठभेड़ पर सवाल उठाने के संदर्भ में उजागर किया।

नक्सलवाद पर व्यापक बहस

गणेश गंझू ने यह भी कहा कि नक्सलवाद से निपटने के लिए केवल सुरक्षा कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक और आर्थिक कारणों पर भी काम करना जरूरी है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें झारखंड और छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों को तेज कर रही हैं। आलोचकों का कहना है कि अकेले बल-प्रयोग से नक्सलवाद की जड़ें नहीं उखड़तीं।

आगे क्या होगा

अभी तक न तो मुख्यमंत्री कार्यालय और न ही यूपी पुलिस ने सीबीआई जांच की माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। गणेश गंझू ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो वे जनआंदोलन का रास्ता अपनाएँगे। यह मामला झारखंड और उत्तर प्रदेश की पुलिस के बीच समन्वय पर भी सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी तथ्य है कि ब्रजेश गंझू ₹30 लाख के इनामी नक्सली संगठन का सुप्रीमो था, जिस पर गंभीर आपराधिक आरोप थे। असली मुद्दा यह है कि क्या पुलिस की 'बाइक पर फायरिंग' वाली कहानी तकनीकी जांच में खरी उतरती है — जो गणेश गंझू ने भी उठाया है। झारखंड-यूपी पुलिस समन्वय पर भी सवाल है: यदि ब्रजेश वाकई चतरा में था, तो झारखंड पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया गया? न्यायिक पारदर्शिता के बिना, ऐसी मुठभेड़ें चाहे वैध हों या नहीं, उन्हें शक की नजर से देखा जाएगा — और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में यह शक सरकारी विश्वसनीयता को और कमजोर करता है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रजेश गंझू कौन था और उसे क्यों मारा गया?
ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता प्रतिबंधित नक्सली संगठन टीएसपीसी (तृतीय प्रस्तुति पार्टी ऑफ इंडिया) का सुप्रीमो था। झारखंड सरकार ने उस पर ₹25 लाख और एनआईए ने ₹5 लाख का इनाम घोषित कर रखा था। यूपी एसटीएफ ने रविवार को वाराणसी में मुठभेड़ के बाद उसे मृत घोषित किया।
पूर्व विधायक गणेश गंझू मुठभेड़ को फर्जी क्यों बता रहे हैं?
गणेश गंझू का कहना है कि ब्रजेश को झारखंड के चतरा से पकड़कर उत्तर प्रदेश ले जाया गया और वहाँ साजिश के तहत उसकी हत्या की गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बाइक चलाते हुए दोनों हाथों से फायरिंग करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
यूपी पुलिस ने मुठभेड़ के बारे में क्या कहा?
यूपी पुलिस एसटीएफ के अनुसार वाराणसी के रामनगर इलाके में बाइक सवार ब्रजेश को रोकने की कोशिश के दौरान उसने पुलिस टीम पर गोलीबारी की। जवाबी फायरिंग में घायल होने के बाद अस्पताल में उसे मृत घोषित किया गया।
सीबीआई जांच की माँग पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया है?
अभी तक न झारखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय और न ही यूपी पुलिस ने सीबीआई जांच की माँग पर कोई आधिकारिक बयान दिया है। गणेश गंझू ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे चरणबद्ध आंदोलन करेंगे।
इस मामले का नक्सलवाद विरोधी अभियान पर क्या असर होगा?
यह मामला ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें नक्सल विरोधी अभियान तेज कर रही हैं। गणेश गंझू ने कहा कि केवल सुरक्षा कार्रवाई से नक्सलवाद खत्म नहीं होगा, इसके सामाजिक-आर्थिक कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 2 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले