14 सितंबर 2026
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ब्रिक्स 2026 की सफलता भारत की कूटनीतिक शक्ति का प्रमाण: जयशंकर, 32 प्रतिनिधिमंडल हुए शामिल

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ब्रिक्स 2026 की सफलता भारत की कूटनीतिक शक्ति का प्रमाण: जयशंकर, 32 प्रतिनिधिमंडल हुए शामिल

सारांश

ब्रिक्स 2026 महज़ एक बहुपक्षीय बैठक नहीं थी — यह भारत की वैश्विक कूटनीति की सबसे बड़ी परीक्षा थी। 32 प्रतिनिधिमंडलों, पुतिन से गुटेरेस तक की उपस्थिति, पहलगाम हमले की सामूहिक निंदा और 'सुधार व लचीलेपन' का साझा एजेंडा — नई दिल्ली ने साबित किया कि मतभेदों के बावजूद सहमति संभव है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 14 सितंबर 2026 को ब्रिक्स 2026 को भारत की वैश्विक कूटनीतिक ताकत का प्रमाण बताया।
सम्मेलन में 32 प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए — 11 सदस्य देश , 10 साझेदार देश , 4 क्षेत्रीय संगठन और 7 अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ ।
पुतिन, शी जिनपिंग, रामाफोसा, अल-सीसी समेत कई राष्ट्राध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस नई दिल्ली पहुँचे।
22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की ब्रिक्स देशों ने सामूहिक निंदा की; सीमा पार आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता की नीति पर सहमति।
सम्मेलन के केंद्रीय विषय 'सुधार' और 'लचीलापन' रहे; ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मज़बूती देना प्रमुख एजेंडा।
जयशंकर ने कहा कि PM मोदी का 'संवाद, कूटनीति और विकास' का संदेश वैश्विक स्तर पर प्रभावी साबित हुआ।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 14 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के सफल समापन पर कहा कि न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया ने इस सम्मेलन की ऐतिहासिक सफलता देखी। इस आयोजन में कुल 32 प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया — जिनमें 11 सदस्य देश, 10 साझेदार देश, 4 क्षेत्रीय संगठन और 7 अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ शामिल थीं।

वैश्विक नेताओं की उपस्थिति

सम्मेलन की एक उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि अधिकांश देशों का प्रतिनिधित्व सर्वोच्च स्तर पर हुआ। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद, यूएई के क्राउन प्रिंस और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी सहित कई प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष इसमें शामिल हुए।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ-साथ विश्व व्यापार संगठन, विश्व स्वास्थ्य संगठन और कई अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं के प्रमुखों ने भी भागीदारी की। जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इन नेताओं के बीच आत्मीय संवाद और बेहतर तालमेल देखा गया।

भू-राजनीतिक तनाव के बीच सहमति

विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और भू-राजनीतिक मतभेद और बड़े संघर्ष चरम पर हैं। इसके बावजूद ब्रिक्स देशों ने कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाने में सफलता हासिल की। पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के संघर्षों के संदर्भ में सदस्य देशों ने शांति, स्थिरता और दीर्घकालिक समाधान का समर्थन किया।

इसके साथ ही वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने तथा नागरिकों और नागरिक ढाँचे की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया। गौरतलब है कि इस तरह के विविध और कई बार परस्पर विरोधी हितों वाले मंच पर सहमति बनाना भारत की अध्यक्षता में कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

आतंकवाद पर ब्रिक्स का कड़ा रुख

जयशंकर ने बताया कि आतंकवाद के मुद्दे पर ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत एकजुटता रही। सदस्य देशों ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य अपराध है और इसे किसी भी आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। विशेष रूप से 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को सदस्य देशों ने अस्वीकार्य करार देते हुए उसकी निंदा की। सम्मेलन में सीमा पार आतंकवाद सहित सभी रूपों के आतंकवाद के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता की नीति और दोहरे मापदंडों को खारिज करने पर सहमति बनी।

सम्मेलन के मुख्य विषय और वैश्विक दक्षिण की आवाज

विदेश मंत्री ने कहा कि इस बार ब्रिक्स सम्मेलन के दो प्रमुख विषय — 'सुधार' और 'लचीलापन' — रहे, जिन्होंने विभिन्न मुद्दों पर एकता की नींव रखी। वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी विकास और ग्लोबल साउथ की आवाज को मज़बूत बनाना सम्मेलन का केंद्रीय फोकस रहा। सम्मेलन का संदेश स्पष्ट था — विकासशील देशों की चिंताओं और ज़रूरतों को वैश्विक मंचों पर अधिक महत्त्व मिलना चाहिए।

जयशंकर ने कहा कि कई ऐसे नेता, जो सामान्य परिस्थितियों में शायद एक-दूसरे से मुलाकात नहीं कर पाते, वे इस मंच पर साथ आए — और यही इस सम्मेलन की अनूठी कूटनीतिक उपलब्धि है।

भारत की वैश्विक छवि और मोदी का संदेश

विदेश मंत्री ने कहा कि यह पूरा आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'संवाद, कूटनीति और विकास' के दृष्टिकोण को व्यावहारिक रूप में प्रदर्शित करता है। उन्होंने स्वीकार किया कि अनेक लोगों को आशंका थी कि इतने व्यापक और विविध स्तर का सम्मेलन सफलतापूर्वक हो पाएगा या नहीं — लेकिन नई दिल्ली ने इसे संपन्न करके यह संदेह निराधार साबित किया। भारत ने एक बार फिर सिद्ध किया कि वह वैश्विक मंचों पर नेतृत्व करने में सक्षम है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत की विदेश नीति बहुध्रुवीय विश्व में संतुलन साधने की कोशिश में है — और ब्रिक्स 2026 उस नीति की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि नई दिल्ली घोषणापत्र की प्रतिबद्धताएँ — ख़ासकर आतंकवाद और ग्लोबल साउथ पर — ठोस नीतिगत कार्रवाई में कितनी तब्दील होती हैं। पुतिन और शी जिनपिंग दोनों की उपस्थिति भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति की जीत ज़रूर है, लेकिन यह भी सच है कि ब्रिक्स के विस्तार के साथ सदस्यों के बीच हितों का टकराव भी बढ़ा है। पहलगाम हमले की सामूहिक निंदा एक सकारात्मक कूटनीतिक संकेत है, मगर यह देखना होगा कि क्या चीन और पाकिस्तान-संलग्न देश इसे व्यावहारिक स्तर पर भी आगे बढ़ाते हैं — क्योंकि बहुपक्षीय मंचों पर शब्द और कर्म के बीच की खाई अक्सर चौड़ी ही रहती है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन में कितने देशों और संगठनों ने भाग लिया?
ब्रिक्स 2026 में कुल 32 प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए — 11 सदस्य देश, 10 साझेदार देश, 4 क्षेत्रीय संगठन और 7 अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ। यह सम्मेलन नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
ब्रिक्स 2026 में कौन-कौन से बड़े विश्व नेता शामिल हुए?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद और यूएई के क्राउन प्रिंस के साथ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी नई दिल्ली में उपस्थित रहे।
ब्रिक्स 2026 में पहलगाम आतंकी हमले पर क्या रुख अपनाया गया?
ब्रिक्स देशों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की सामूहिक रूप से निंदा की और उसे अस्वीकार्य बताया। सदस्य देशों ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी प्रकार के आतंकवाद के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता की नीति और दोहरे मापदंडों को खारिज करने पर सहमति जताई।
ब्रिक्स 2026 के प्रमुख विषय क्या थे?
इस बार ब्रिक्स सम्मेलन के दो केंद्रीय विषय 'सुधार' और 'लचीलापन' रहे। इनके अतिरिक्त वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी विकास, ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मज़बूती और वैश्विक व्यापार व ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा था।
विदेश मंत्री जयशंकर ने ब्रिक्स 2026 को भारत के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण बताया?
जयशंकर ने कहा कि यह सम्मेलन PM मोदी के 'संवाद, कूटनीति और विकास' के दृष्टिकोण को व्यावहारिक रूप में साकार करता है। उन्होंने कहा कि अनेक लोगों को संदेह था कि इतना बड़ा आयोजन सफलतापूर्वक हो पाएगा, लेकिन नई दिल्ली ने यह संदेह निराधार साबित कर भारत की वैश्विक कूटनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया।
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