बृजलाल का कांग्रेस पर हमला: बाबरी-बाटला पर आँसू, कश्मीरी पंडित व सिख नरसंहार पर मौन क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने 8 नवंबर 2026 को लखनऊ में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और गांधी-नेहरू परिवार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने बाबरी ढाँचा विध्वंस और बाटला हाउस मुठभेड़ पर संवेदना तो दिखाई, लेकिन कश्मीरी पंडितों के पलायन, सिख विरोधी दंगों और नेल्ली नरसंहार पर वैसी पीड़ा सामने नहीं आई। उन्होंने इसे कांग्रेस की 'दोहरे मानदंड' वाली राजनीति करार दिया।
बाबरी विध्वंस और बाटला हाउस पर उठाए सवाल
बृजलाल ने कहा कि अयोध्या में बाबरी ढाँचे के विध्वंस के दृश्य देखकर सोनिया गांधी के रोने की बात कांग्रेस नेताओं द्वारा कही जाती रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि उस दौर में आज जैसी लाइव प्रसारण की सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं, तो ऐसी तत्काल प्रतिक्रिया का दावा किस आधार पर किया जाता है।
पूर्व डीजीपी ने दिल्ली में हुई बाटला हाउस मुठभेड़ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कार्रवाई में आतिफ अमीन और साजिद मारे गए थे, जबकि दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा इस मुठभेड़ में शहीद हुए। उनके अनुसार, कांग्रेस नेताओं की ओर से मुठभेड़ में मारे गए लोगों पर तो संवेदना व्यक्त की गई, लेकिन शहीद अधिकारी की शहादत को लेकर वैसी भावनाएँ सामने नहीं आईं।
उन्होंने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर भी आरोप लगाया कि कुछ कांग्रेस नेताओं ने मुठभेड़ की वैधता पर सवाल उठाकर पुलिस के मनोबल और शहीद अधिकारी के सम्मान को क्षति पहुँचाई।
आतंकवादी हमलों की पीड़ितों के प्रति संवेदना का सवाल
बृजलाल ने वाराणसी के संकटमोचन मंदिर, दशाश्वमेध घाट सहित दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और हैदराबाद में हुए विभिन्न आतंकवादी हमलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों में बड़ी संख्या में निर्दोष भारतीयों की जान गई और अनेक परिवार उजड़ गए। उनका सवाल था कि इन परिवारों के प्रति कांग्रेस नेतृत्व ने वैसी संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई।
कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आरोप
राज्यसभा सांसद ने कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की लक्षित हत्याओं और बड़े पैमाने पर हुए पलायन का मुद्दा उठाया। उन्होंने टीका लाल टपलू, न्यायाधीश नीलकंठ गंजू, सतीश टिक्कू, लासा कौल और गिरिजा टिक्कू जैसे पीड़ितों का नाम लेते हुए कहा कि आतंकवाद ने कश्मीरी हिंदुओं को अपना घर-द्वार छोड़ने पर मजबूर किया।
बृजलाल ने गांधी-नेहरू परिवार से सीधा सवाल किया कि स्वयं को कश्मीरी मूल का बताने वाले इस परिवार ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों की पीड़ा के प्रति क्या ठोस संवेदनशीलता दिखाई।
नेल्ली नरसंहार और सिख विरोधी दंगों पर प्रश्नचिह्न
बृजलाल ने असम में हुए नेल्ली नरसंहार और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, इन घटनाओं में हजारों निर्दोष लोगों की जान गई, फिर भी कांग्रेस नेतृत्व ने अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय दोहरे मानदंड अपनाए।
उन्होंने इंदिरा गांधी की काबुल यात्रा और बाबर की समाधि पर जाने के प्रसंग का हवाला देते हुए गांधी-नेहरू परिवार की ऐतिहासिक प्राथमिकताओं पर भी प्रश्नचिह्न खड़े किए।
राजनीतिक जवाबदेही की अपील
बृजलाल ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास और उसके नेताओं के रवैये पर गंभीरता से विचार करें। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सक्रियता तेज है और सांप्रदायिक इतिहास से जुड़े मुद्दे बार-बार चुनावी विमर्श का हिस्सा बनते रहे हैं।