8 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बृजलाल का कांग्रेस पर हमला: बाबरी-बाटला पर आँसू, कश्मीरी पंडित व सिख नरसंहार पर मौन क्यों?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बृजलाल का कांग्रेस पर हमला: बाबरी-बाटला पर आँसू, कश्मीरी पंडित व सिख नरसंहार पर मौन क्यों?

सारांश

राज्यसभा सांसद और पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला — बाबरी और बाटला हाउस पर तो आँसू, पर कश्मीरी पंडितों के पलायन, नेल्ली नरसंहार और सिख विरोधी दंगों पर मौन। उन्होंने गांधी-नेहरू परिवार से पूछा कि तुष्टिकरण की राजनीति में बहुसंख्यक पीड़ितों की पीड़ा कब मायने रखेगी।

मुख्य बातें

राज्यसभा सांसद बृजलाल ने 8 नवंबर 2026 को लखनऊ में कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार पर 'दोहरे मानदंड' का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि बाटला हाउस मुठभेड़ में शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के प्रति कांग्रेस नेतृत्व ने पर्याप्त संवेदना नहीं दिखाई।
कश्मीरी पंडितों के पलायन और टीका लाल टपलू , न्यायाधीश नीलकंठ गंजू सहित कई पीड़ितों का नाम लेकर गांधी-नेहरू परिवार से जवाब माँगा।
नेल्ली नरसंहार ( असम ) और 1984 के सिख विरोधी दंगों में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए।
बृजलाल ने वाराणसी , दिल्ली , जयपुर , अहमदाबाद , हैदराबाद के आतंकी हमलों के पीड़ितों के प्रति कांग्रेस की 'चुप्पी' पर भी प्रश्नचिह्न लगाया।

राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने 8 नवंबर 2026 को लखनऊ में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और गांधी-नेहरू परिवार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने बाबरी ढाँचा विध्वंस और बाटला हाउस मुठभेड़ पर संवेदना तो दिखाई, लेकिन कश्मीरी पंडितों के पलायन, सिख विरोधी दंगों और नेल्ली नरसंहार पर वैसी पीड़ा सामने नहीं आई। उन्होंने इसे कांग्रेस की 'दोहरे मानदंड' वाली राजनीति करार दिया।

बाबरी विध्वंस और बाटला हाउस पर उठाए सवाल

बृजलाल ने कहा कि अयोध्या में बाबरी ढाँचे के विध्वंस के दृश्य देखकर सोनिया गांधी के रोने की बात कांग्रेस नेताओं द्वारा कही जाती रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि उस दौर में आज जैसी लाइव प्रसारण की सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं, तो ऐसी तत्काल प्रतिक्रिया का दावा किस आधार पर किया जाता है।

पूर्व डीजीपी ने दिल्ली में हुई बाटला हाउस मुठभेड़ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कार्रवाई में आतिफ अमीन और साजिद मारे गए थे, जबकि दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा इस मुठभेड़ में शहीद हुए। उनके अनुसार, कांग्रेस नेताओं की ओर से मुठभेड़ में मारे गए लोगों पर तो संवेदना व्यक्त की गई, लेकिन शहीद अधिकारी की शहादत को लेकर वैसी भावनाएँ सामने नहीं आईं।

उन्होंने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर भी आरोप लगाया कि कुछ कांग्रेस नेताओं ने मुठभेड़ की वैधता पर सवाल उठाकर पुलिस के मनोबल और शहीद अधिकारी के सम्मान को क्षति पहुँचाई।

आतंकवादी हमलों की पीड़ितों के प्रति संवेदना का सवाल

बृजलाल ने वाराणसी के संकटमोचन मंदिर, दशाश्वमेध घाट सहित दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और हैदराबाद में हुए विभिन्न आतंकवादी हमलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों में बड़ी संख्या में निर्दोष भारतीयों की जान गई और अनेक परिवार उजड़ गए। उनका सवाल था कि इन परिवारों के प्रति कांग्रेस नेतृत्व ने वैसी संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई।

कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आरोप

राज्यसभा सांसद ने कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की लक्षित हत्याओं और बड़े पैमाने पर हुए पलायन का मुद्दा उठाया। उन्होंने टीका लाल टपलू, न्यायाधीश नीलकंठ गंजू, सतीश टिक्कू, लासा कौल और गिरिजा टिक्कू जैसे पीड़ितों का नाम लेते हुए कहा कि आतंकवाद ने कश्मीरी हिंदुओं को अपना घर-द्वार छोड़ने पर मजबूर किया।

बृजलाल ने गांधी-नेहरू परिवार से सीधा सवाल किया कि स्वयं को कश्मीरी मूल का बताने वाले इस परिवार ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों की पीड़ा के प्रति क्या ठोस संवेदनशीलता दिखाई।

नेल्ली नरसंहार और सिख विरोधी दंगों पर प्रश्नचिह्न

बृजलाल ने असम में हुए नेल्ली नरसंहार और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, इन घटनाओं में हजारों निर्दोष लोगों की जान गई, फिर भी कांग्रेस नेतृत्व ने अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय दोहरे मानदंड अपनाए।

उन्होंने इंदिरा गांधी की काबुल यात्रा और बाबर की समाधि पर जाने के प्रसंग का हवाला देते हुए गांधी-नेहरू परिवार की ऐतिहासिक प्राथमिकताओं पर भी प्रश्नचिह्न खड़े किए।

राजनीतिक जवाबदेही की अपील

बृजलाल ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास और उसके नेताओं के रवैये पर गंभीरता से विचार करें। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सक्रियता तेज है और सांप्रदायिक इतिहास से जुड़े मुद्दे बार-बार चुनावी विमर्श का हिस्सा बनते रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसकी सरकारों के दौरान भी इन पीड़ितों के पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। असली सवाल यह है कि बयानबाज़ी से आगे बढ़कर कब नीतिगत जवाबदेही तय होगी — चाहे वह किसी भी दल की सरकार हो।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बृजलाल ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए हैं?
राज्यसभा सांसद और पूर्व डीजीपी बृजलाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार ने बाबरी ढाँचा विध्वंस व बाटला हाउस मुठभेड़ पर तो संवेदना दिखाई, लेकिन कश्मीरी पंडितों के पलायन, नेल्ली नरसंहार और 1984 के सिख विरोधी दंगों पर मौन रहे। उन्होंने इसे कांग्रेस की 'मुस्लिम तुष्टिकरण' पर आधारित राजनीति का प्रमाण बताया।
बाटला हाउस मुठभेड़ में कौन-कौन मारे गए थे?
बृजलाल के अनुसार, बाटला हाउस मुठभेड़ में आतिफ अमीन और साजिद मारे गए थे, जबकि दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा इस कार्रवाई में शहीद हो गए थे। बृजलाल ने कहा कि शहीद अधिकारी के प्रति कांग्रेस नेतृत्व ने वैसी भावनाएँ व्यक्त नहीं कीं जैसी मुठभेड़ में मारे गए अन्य लोगों के बारे में बताई गईं।
बृजलाल ने कश्मीरी पंडितों के संदर्भ में किन पीड़ितों का नाम लिया?
बृजलाल ने टीका लाल टपलू, न्यायाधीश नीलकंठ गंजू, सतीश टिक्कू, लासा कौल और गिरिजा टिक्कू का नाम लेते हुए कहा कि आतंकवाद ने कश्मीरी हिंदुओं को अपना घर छोड़ने पर मजबूर किया। उन्होंने गांधी-नेहरू परिवार से सवाल किया कि खुद को कश्मीरी मूल का बताने वाले इस परिवार ने इन विस्थापितों की पीड़ा पर क्या कदम उठाए।
नेल्ली नरसंहार और 1984 के दंगों पर बृजलाल ने क्या कहा?
बृजलाल ने असम के नेल्ली नरसंहार और 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इन घटनाओं में हजारों निर्दोष मारे गए, फिर भी कांग्रेस नेतृत्व ने राजनीतिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की।
बृजलाल कौन हैं और वे किस पार्टी से जुड़े हैं?
बृजलाल उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हैं और वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े हैं और पुलिस सेवा में अपने लंबे कार्यकाल के बाद सक्रिय राजनीति में आए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले