भारत बांग्लादेश सीमा सुरक्षा होगी मजबूत: BSF डीजी प्रवीण कुमार ने पश्चिम बंगाल सरकार को दिया धन्यवाद
सारांश
मुख्य बातें
सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने भारत बांग्लादेश सीमा पर बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के लिए ज़मीन उपलब्ध कराने पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। 14 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में BSF डीजी ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को सीमा की वर्तमान सुरक्षा स्थिति से अवगत कराया।
बैठक में क्या हुआ
14 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में BSF के महानिदेशक प्रवीण कुमार और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बीच हुई बैठक में पश्चिम बंगाल में BSF की तैयारियों और सीमा के उन हिस्सों को सुरक्षित करने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई जहाँ अभी तक बाड़ नहीं लगाई जा सकी है। 15 अक्टूबर को जारी बयान में कहा गया, "BSF डीजी ने बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ज़मीन देने पर मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार जताया। इससे बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड को मजबूत करने और सीमा पर बाड़ लगाने में रह गई कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी।"
बैठक में सीमा पर अवैध घुसपैठ और अन्य अपराधों को रोकने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी विचार विमर्श हुआ। सूत्रों के अनुसार, 'जीरो लाइन' गाँवों को दूसरी जगह बसाने की ज़रूरत पर भी चर्चा हुई।
सीमा की स्थिति: प्रमुख आँकड़े
भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096.7 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से 2,216.7 किलोमीटर का हिस्सा अकेले पश्चिम बंगाल में पड़ता है। यह सीमा दक्षिण में सुंदरबन से लेकर उत्तर में रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक फैली हुई है।
गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में इस सीमा का लगभग 569 किलोमीटर हिस्सा अभी बिना बाड़ के है। इसमें से करीब 113 किलोमीटर नदी क्षेत्र है, जहाँ पारंपरिक तरीके से बाड़ लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। यह स्थिति घुसपैठ और सीमापारीय अपराधों के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
राज्य सरकार का सहयोग और ज़मीन हस्तांतरण
सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने और बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) के निर्माण के लिए BSF को ज़मीन सौंपने की प्रक्रिया शुरू की। नौ ज़िलों में लगभग 1,024 एकड़ ज़मीन इस बल को सौंपने के लिए मंजूर कर ली गई है।
राज्य सरकार का कहना है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई देरी के कारण सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे का विकास कार्य अवरुद्ध हो गया था। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के मद्देनज़र सीमा सुरक्षा पर केंद्र सरकार का ध्यान पहले से अधिक केंद्रित है।
'जीरो लाइन' गाँव: एक जटिल चुनौती
'जीरो लाइन' गाँव वे बस्तियाँ हैं जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से 150 गज के दायरे में स्थित हैं। पश्चिम बंगाल में ऐसे लगभग 360 गाँव हैं, जिनकी कुल आबादी करीब 70,000 है। इनमें से कई गाँव सीमा पर लगी बाड़ के उस पार हैं, जबकि कुछ इलाकों में इनकी उपस्थिति के कारण बाड़ लगाना मुश्किल हो गया है।
BSF ने इन गाँवों को पुनर्स्थापित (रीलोकेट) करने की माँग की है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने BSF डीजी को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस मुद्दे को सुलझाने में पूरा सहयोग देगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार BSF जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए हर ज़रूरी मदद उपलब्ध कराएगी।
आगे की राह
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में BSF दो मोर्चों — दक्षिण बंगाल फ्रंटियर और उत्तर बंगाल फ्रंटियर — के ज़रिए काम करती है, जो बांग्लादेश से सटी सीमा वाले अन्य राज्यों से अलग व्यवस्था है। राज्य केंद्र समन्वय में सुधार और ज़मीन हस्तांतरण की रफ्तार से तय होगा कि बाड़ निर्माण की शेष कमियाँ कितनी जल्दी दूर हो सकती हैं।