भारत-बांग्लादेश सीमा फेंसिंग पर सीएम सुवेंदु अधिकारी करेंगे समीक्षा, 4 जिलों के मुद्दे एजेंडे में
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में शुक्रवार, 13 जून 2025 को एक अहम प्रशासनिक समीक्षा बैठक होने जा रही है, जिसमें भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग की प्रगति, अवैध घुसपैठ पर अंकुश और मॉनसून-पूर्व बाढ़ नियंत्रण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। यह बैठक मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर — चारों बांग्लादेश-सीमावर्ती जिलों — को केंद्र में रखकर आयोजित की जा रही है।
बैठक का एजेंडा
नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, बैठक में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को फेंसिंग के लिए भूमि हस्तांतरण की मौजूदा स्थिति की समीक्षा प्रमुख रूप से होगी। इसके अलावा, बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए राज्य पुलिस और बीएसएफ के बीच समन्वय को और प्रभावी बनाने पर भी चर्चा होगी। मालदा और मुर्शिदाबाद में मॉनसून से पहले बाढ़ नियंत्रण उपायों और नदी-कटाव की पुरानी समस्या के समाधान को भी एजेंडे में शामिल किया गया है।
फेंसिंग प्रक्रिया की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 20 मई 2025 को 27 किलोमीटर भूमि बीएसएफ को सौंपने के साथ आधिकारिक भूमि-हस्तांतरण प्रक्रिया शुरू हुई थी। मुख्यमंत्री अधिकारी ने बीते महीने प्राथमिकता के आधार पर बिना बाड़ वाली सीमाओं पर फेंसिंग के लिए भूमि सौंपने का काम हाथ में लिया था। भारत-बांग्लादेश की कुल अंतरराष्ट्रीय सीमा 4,096.7 किलोमीटर है, जिसमें से 2,000 किलोमीटर से अधिक पश्चिम बंगाल में पड़ती है। इनमें से लगभग 1,600 किलोमीटर सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लग चुकी है, जबकि शेष करीब 400 किलोमीटर सीमा अभी भी बिना बाड़ के है।
पूर्व सरकार पर आरोप
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बार-बार आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व वाली पूर्व ममता बनर्जी सरकार ने कथित तौर पर जानबूझकर बीएसएफ को भूमि सौंपने की प्रक्रिया को टाला, ताकि बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ जारी रहे और पिछली सत्ताधारी पार्टी के वोट बैंक को मज़बूती मिलती रहे। हालाँकि तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताती रही है।
घुसपैठियों पर नई नीति
राज्य सरकार ने हाल ही में एक नई नीति लागू की है, जिसके तहत राज्य सीमा के भीतर पकड़े गए अवैध घुसपैठियों को अदालतों में पेश करने के बजाय पहले होल्डिंग सेंटरों में रखा जाएगा और फिर बांग्लादेश वापस भेजने के लिए बीएसएफ की सीमा चौकियों पर सौंपा जाएगा। यह कदम सीमा सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार के कड़े रुख को दर्शाता है।
आगे क्या होगा
शुक्रवार की समीक्षा बैठक के बाद यह स्पष्ट होगा कि शेष 400 किलोमीटर बिना बाड़ वाली सीमा पर फेंसिंग की समयसीमा क्या होगी। बाढ़-प्रवण जिलों में मॉनसून-पूर्व तैयारियों के निर्देश भी इसी बैठक से जारी होने की संभावना है।