पश्चिम बंगाल सीमा विवाद: BJP सरकार ने BSF को सौंपी 80% जमीन, पूर्व ममता सरकार पर घुसपैठ बढ़ाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य के मंत्री उमेश राय ने 21 अगस्त को दावा किया कि वर्तमान भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने केंद्र की मांग पर अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फेंसिंग के लिए आवश्यक 80 प्रतिशत जमीन सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में ममता बनर्जी बार-बार इस मांग को टालती रहीं, जिसके चलते घुसपैठ की समस्या गंभीर बनी रही।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री उमेश राय ने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य की बैठकों में बार-बार यह मांग उठती रही कि सीमा पर फेंसिंग के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाए। उनके अनुसार, BJP सरकार बनने के बाद सबसे पहले BSF को जमीन देने का काम किया गया। उन्होंने कहा, 'पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा भारत के लिए खतरा थी। ममता बनर्जी बार-बार किसी न किसी बहाने से उसे टालती रहीं। हालांकि, BJP की सरकार बनने के बाद हमने सबसे पहले BSF को जमीन दी — लगभग 80 फीसदी जमीन सौंप दी गई है।'
BJP की प्रतिक्रिया
BJP की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. मधुचंद्र कर ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा घुसपैठ के मुद्दे को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, 'सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण विषय है। गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्य बिंदु पर फोकस किया है कि सीमा पर जो घुसपैठिए होते हैं, वो पश्चिम बंगाल की बहुत खतरनाक समस्या है। गृह मंत्री ने उसे ही संबोधित किया।' वंदे मातरम विवाद पर शर्मिला टैगोर की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर डॉ. कर ने कहा, 'यह उनका अपना मत है। इस लोकतांत्रिक देश में बोलने की आज़ादी है। वो हमारी पसंदीदा कलाकार हैं।'
विपक्ष का रुख
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी भी समझौते से इनकार करते हुए कहा कि सीमा पर बाड़ लगाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, 'इस बात के सबूत थे कि BSF को बाड़ बनाने के लिए जमीन नहीं दी गई थी। यह एक अच्छा कदम है, लेकिन हम गृह मंत्री अमित शाह से अपील करेंगे कि कोई भी गैर-कानूनी घुसपैठिया अंदर न आए।' वहीं TMC विधायक मदन मित्रा ने कहा कि भारत एक ताकतवर लोकतांत्रिक देश है और विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग दलों के अपने-अपने फैसले होते हैं।
TMC विधायक का बयान
TMC विधायक कुणाल घोष ने उद्योगपति अशोक टोडी से जुड़े एक अलग मामले में कहा कि उनका सवाल केवल यह है कि संबंधित पक्ष के पास मंजूर योजना और जरूरी दस्तावेज़ हैं या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि फैक्ट्री स्थापित होती है तो यह अच्छा होगा, लेकिन प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्र-राज्य संबंधों में नई गतिशीलता देखी जा रही है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगती है और घुसपैठ की समस्या वर्षों से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई है। शेष 20 प्रतिशत जमीन सौंपने की प्रक्रिया और सीमा फेंसिंग का काम आने वाले महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।