30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूपी विधानसभा चुनाव 2027: बसपा अकेले लड़ेगी, विश्वनाथ पाल बोले — पीडीए यानी 'परिवार दल अलायंस'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूपी विधानसभा चुनाव 2027: बसपा अकेले लड़ेगी, विश्वनाथ पाल बोले — पीडीए यानी 'परिवार दल अलायंस'

सारांश

बसपा ने 2027 यूपी चुनाव में अकेले उतरने का ऐलान किया है — 2007 वाले जनता-गठबंधन मॉडल पर। प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने सपा के पीडीए को 'परिवार दल अलायंस' करार दिया और कहा कि बसपा का वोट बैंक किसी रथ यात्रा से नहीं डिगेगा।

मुख्य बातें

बसपा 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी — यह निर्णय मायावती का है।
प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने सपा के पीडीए अभियान को 'परिवार दल अलायंस' करार दिया।
प्रत्याशी चयन में आकाश आनंद की भूमिका की चर्चा है, लेकिन अंतिम निर्णय मायावती का होगा।
शाहाबाद और जेवर सीट के लिए आकाश आनंद को प्रभारी बनाए जाने की संभावना, मायावती की मंजूरी बाकी।
बसपा 2007 के चुनावी मॉडल पर काम कर रही है — भाईचारा सम्मेलन और गांव-गांव संगठन अभियान जारी।
पेपर लीक विधेयक पर बसपा का समर्थन; 'वंदे मातरम' विधेयक पर आधिकारिक प्रतिक्रिया मायावती देंगी।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने 30 जुलाई 2026 को लखनऊ में स्पष्ट किया कि पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि बसपा का गठबंधन जनता से होगा, किसी राजनीतिक दल से नहीं — और यह निर्णय पार्टी प्रमुख मायावती का है।

गठबंधन पर दो टूक

विश्वनाथ पाल ने कहा, 'हमारी नेता बहन मायावती ने साफ कहा है कि हम अकेले चुनाव लड़ेंगे। हमारा गठबंधन जनता से होगा, किसी दल से नहीं।' उन्होंने 2007 के विधानसभा चुनाव की रणनीति को इस बार का आधार बताया, जब बसपा ने बिना किसी दलीय गठबंधन के बहुमत की सरकार बनाई थी। पाल के अनुसार, पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम समाज और अन्य वर्गों के भाईचारा सम्मेलन लगातार आयोजित किए जा रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं।

आकाश आनंद की भूमिका

बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को प्रत्याशी चयन में अहम भूमिका मिलने की चर्चाओं पर पाल ने कहा कि अंतिम निर्णय हमेशा मायावती ही करती हैं। प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया पार्टी के को-ऑर्डिनेटरों से शुरू होती है, जो अपने क्षेत्रों से मजबूत उम्मीदवारों का फीडबैक जुटाते हैं और वह रिपोर्ट मायावती के पास जाती है। शाहाबाद और जेवर सीट के लिए आकाश आनंद को प्रभारी बनाए जाने की चर्चा है, जो मायावती की अनुमति के बाद घोषित की जा सकती है।

आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद से आकाश आनंद की तुलना पर पाल ने कहा, 'मीडिया बार-बार आजाद समाज पार्टी को बसपा के साथ जोड़ने की कोशिश करता है, जबकि उसका कोई औचित्य नहीं है। घोसी-मऊ चुनाव में उनका प्रदर्शन सबने देखा है — पहले वोट प्रतिशत देख लीजिए, फिर तुलना कीजिए।'

सपा के पीडीए पर तीखा हमला

समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान और प्रस्तावित पीडीए रथ यात्रा पर विश्वनाथ पाल ने कहा कि पीडीए का असली मतलब 'परिवार दल अलायंस' है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समाजवादी पार्टी वास्तव में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों के हित में काम करना चाहती, तो सत्ता में रहते हुए एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों की बैकलॉग भर्तियां नहीं रोकती। पाल ने यह भी कहा कि बसपा का वोट बैंक किसी राजनीतिक अभियान से प्रभावित होने वाला नहीं है, बल्कि समाजवादी पार्टी और भाजपा के वोट भी बसपा की ओर आ रहे हैं।

पेपर लीक और 'वंदे मातरम' विधेयक

पेपर लीक संशोधन विधेयक पर पाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में यह कई बार हो चुका है और बसपा इस मुद्दे को 2024 के चुनाव से पहले से उठाती रही है। उन्होंने कहा, 'जब कोई इसके खिलाफ नहीं बोल रहा था, तब भी बसपा इसका विरोध कर रही थी।' वहीं, 'वंदे मातरम' विधेयक पर टिप्पणी करने से उन्होंने इनकार करते हुए कहा कि इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया मायावती देंगी।

मायावती सरकार की उपलब्धियों का दावा

विश्वनाथ पाल ने दावा किया कि मायावती सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था सबसे बेहतर थी। उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों, इंटर कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, मेडिकल और पैरामेडिकल संस्थानों की स्थापना तथा सभी वर्गों को सरकारी नौकरियां दिए जाने का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बाद की सरकारों ने महापुरुषों के नाम पर बने संस्थानों के नाम बदलकर उनका अपमान किया। पाल ने विश्वास जताया कि 2027 में बसपा एक बार फिर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2012, 2017 और 2022 के चुनावी नतीजे बताते हैं कि पार्टी का वोट शेयर लगातार सिकुड़ा है। विश्वनाथ पाल का सपा पर 'परिवार दल' का तंज राजनीतिक रूप से धारदार है, पर असली सवाल यह है कि क्या बसपा दलित-पिछड़े मतदाताओं को वापस खींच पाएगी जो पिछले दो चुनावों में सपा और भाजपा की ओर खिसक गए। आकाश आनंद की भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर की अस्पष्टता और 'मायावती ही अंतिम निर्णय लेती हैं' वाला बयान यह भी संकेत देता है कि उत्तराधिकार की राजनीति अभी तय नहीं है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बसपा 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में किसी से गठबंधन करेगी?
नहीं। बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने स्पष्ट किया है कि पार्टी किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। मायावती के निर्देश पर बसपा 2027 का चुनाव अकेले लड़ेगी और जनता को ही अपना गठबंधन मानेगी।
सपा के पीडीए को बसपा ने 'परिवार दल अलायंस' क्यों कहा?
विश्वनाथ पाल ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है — सत्ता में रहते हुए उसने एससी, एसटी और ओबीसी की बैकलॉग भर्तियां रोकीं। इसीलिए उन्होंने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को 'परिवार दल अलायंस' करार दिया, यानी यह परिवार-केंद्रित राजनीति है, न कि वंचितों का वास्तविक गठबंधन।
आकाश आनंद की 2027 चुनाव में क्या भूमिका होगी?
बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद प्रत्याशी चयन प्रक्रिया में शामिल होंगे, लेकिन अंतिम निर्णय मायावती का होगा। शाहाबाद और जेवर सीट के लिए उन्हें प्रभारी बनाए जाने की चर्चा है, जो मायावती की अनुमति के बाद घोषित हो सकती है।
बसपा 2027 में किस रणनीति पर काम कर रही है?
बसपा 2007 के चुनावी मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम समाज और अन्य वर्गों के भाईचारा सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर संगठन मजबूत कर रहे हैं और विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति जारी है।
पेपर लीक मुद्दे पर बसपा का क्या रुख है?
बसपा पेपर लीक का विरोध करती आई है और विश्वनाथ पाल के अनुसार, आकाश आनंद 2024 के चुनाव से पहले से इस मुद्दे को उठा रहे थे। पाल ने कहा कि जब कोई इसके खिलाफ नहीं बोल रहा था, तब भी बसपा ने इसका विरोध किया था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले