25 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मायावती का बड़ा फैसला: यूपी, पंजाब और उत्तराखंड में बसपा अकेले लड़ेगी विधानसभा चुनाव 2027

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मायावती का बड़ा फैसला: यूपी, पंजाब और उत्तराखंड में बसपा अकेले लड़ेगी विधानसभा चुनाव 2027

सारांश

मायावती ने साफ कर दिया — बसपा न यूपी में, न पंजाब में, न उत्तराखंड में किसी से हाथ मिलाएगी। 25 अगस्त की लखनऊ बैठक में उन्होंने गठबंधन को सीट और वोट दोनों के लिए घाटे का सौदा बताया और 2027 के लिए अकेले दम पर मैदान में उतरने का ऐलान किया।

मुख्य बातें

बसपा प्रमुख मायावती ने 25 अगस्त को लखनऊ में पार्टी बैठक में उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया।
मायावती ने कहा कि गठबंधन से सीट और वोट प्रतिशत — दोनों पर नुकसान होता है।
पार्टी को बूथ स्तर तक मज़बूत करने और ईमानदार व कर्मठ उम्मीदवार चुनने पर जोर दिया गया।
9 अक्टूबर को संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि और 15 जनवरी 2027 को 'जनकल्याणकारी दिवस' की तैयारियों के निर्देश दिए गए।
पार्टी का लक्ष्य अंबेडकरवादी विचारधारा के तहत गरीब, बेरोज़गार और वंचित वर्गों की सेवा करना बताया गया।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने मंगलवार, 25 अगस्त को लखनऊ में आयोजित पार्टी बैठक में स्पष्ट कर दिया कि बसपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के साथ-साथ पंजाब और उत्तराखंड में भी किसी दल से गठबंधन किए बिना स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों को बूथ स्तर तक संगठन को मज़बूत करने और ईमानदार व कर्मठ उम्मीदवारों के चयन पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए।

गठबंधन से क्यों दूरी

मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि चुनावी गठबंधन से पार्टी को सीटों और वोट प्रतिशत — दोनों मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ता है। उनके अनुसार, यही कारण है कि तीनों राज्यों में बसपा अपने बूते पर चुनावी रण में उतरने का निर्णय लिया है। यह रुख पार्टी की उस रणनीति का विस्तार है जो पिछले कुछ वर्षों से गठबंधन-विरोधी दिशा में जाती दिखी है।

संगठन को मज़बूत करने का आह्वान

बैठक में मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोधियों के हर हथकंडे का डटकर सामना करते हुए बेहतर चुनावी परिणाम के लिए पूरी शक्ति से जुटने का आह्वान किया। उन्होंने पंजाब में पार्टी के जनाधार और संगठन की स्थिति की भी समीक्षा की तथा आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए ठोस तैयारी पर जोर दिया।

कांशीराम पुण्यतिथि और जनकल्याणकारी दिवस की तैयारियाँ

बैठक में मायावती ने 9 अक्टूबर को पार्टी के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि के कार्यक्रम को पिछले वर्ष के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, 15 जनवरी 2027 को 'जनकल्याणकारी दिवस' के अवसर पर बसपा की ओर से किए जाने वाले आर्थिक सहयोग को पिछली बार से अधिक प्रभावी बनाने पर भी ज़ोर दिया गया।

पार्टी का वैचारिक लक्ष्य

मायावती ने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से अंबेडकरवादी विचारधारा और बसपा आंदोलन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी का मूल लक्ष्य गरीब, बेरोज़गार और वंचित वर्गों को गरीबी व बेरोज़गारी से मुक्ति दिलाना तथा उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करने वाली नीतियों को आगे बढ़ाना है। आगामी महीनों में बसपा के संगठनात्मक ढाँचे को और धार देने की तैयारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अनुभव से उपजी सावधानी अधिक लगता है — 2019 और 2022 के गठबंधन प्रयोगों में पार्टी को सीट और वोट शेयर दोनों में नुकसान हुआ था। लेकिन सवाल यह है कि क्या संगठन अकेले तीन राज्यों में पूरी ताकत से उतरने में सक्षम है, जबकि पंजाब में 2022 में बसपा का प्रदर्शन बेहद सीमित रहा। मायावती का दलित-बहुजन मतदाता आधार अब कई दलों में बिखरा हुआ है, और बूथ-स्तरीय मज़बूती का दावा तब तक परखा नहीं जा सकता जब तक उम्मीदवार घोषणाएँ न हों। यह ऐलान चुनावी मज़बूती का संकेत भी हो सकता है और सौदेबाज़ी की स्थिति बनाने की तैयारी भी।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने किन राज्यों में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है?
मायावती ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड — तीनों राज्यों में बिना किसी गठबंधन के अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। यह घोषणा 25 अगस्त को लखनऊ में आयोजित पार्टी बैठक में की गई।
बसपा ने गठबंधन से इनकार क्यों किया?
मायावती के अनुसार, चुनावी गठबंधन से बसपा को सीटों और वोट प्रतिशत — दोनों मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ता है। इसी अनुभव के आधार पर पार्टी ने तीनों राज्यों में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बसपा की तैयारी क्या है?
बसपा ने पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मज़बूत करने, ईमानदार और कर्मठ उम्मीदवारों को टिकट देने और चुनावी तैयारियों में कोई कमी न छोड़ने के निर्देश दिए हैं। मायावती ने पंजाब में भी जनाधार और संगठन की समीक्षा की।
बसपा के आगामी प्रमुख कार्यक्रम कौन से हैं?
9 अक्टूबर को पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि का कार्यक्रम आयोजित होगा, और 15 जनवरी 2027 को 'जनकल्याणकारी दिवस' मनाया जाएगा। मायावती ने इन कार्यक्रमों को पिछले वर्ष से बेहतर तरीके से आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
बसपा का वैचारिक एजेंडा क्या है?
बसपा का लक्ष्य अंबेडकरवादी विचारधारा के तहत गरीब, बेरोज़गार और वंचित वर्गों को गरीबी व बेरोज़गारी से मुक्ति दिलाना और उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है। मायावती ने कहा कि पार्टी के कार्यक्रम इसी विचारधारा को आगे बढ़ाने का माध्यम हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले