आकाश आनंद के बसपा निष्कासन पर उदित राज का बड़ा आरोप: मायावती खुद चाहती हैं पार्टी खत्म हो
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती द्वारा अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद 13 सितंबर 2026 को राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक विभिन्न दलों ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रियाएँ दी हैं, जबकि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में शामिल होने का खुला प्रस्ताव दे दिया है।
उदित राज का मायावती पर सीधा हमला
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता उदित राज ने मायावती की इस कार्रवाई को बसपा के लिए आत्मघाती करार दिया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि मायावती खुद चाहती हैं कि बसपा खत्म हो जाए। इसलिए चाहे कोई बड़ा नेता हो या कोई और, जब कोई गलती करता है, तो वह उस गलती से सीखता है।'
उदित राज ने आगे कहा, 'उन्होंने कांशीराम के सभी मिशनरी साथियों को एक-एक करके निकाल दिया। इसलिए वह बहुत असुरक्षित महसूस करती हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह कदम 'बहुत संभव है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दबाव में हो रहा हो।' गौरतलब है कि मायावती ने इससे पहले अपने भाई की बेटी को पार्टी मिशन की अगुआई सौंपी थी।
समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने बताया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले ही संकेत दिया है कि यदि आकाश आनंद पार्टी में आना चाहें, तो उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'पार्टी का मानना है कि उसके दरवाजे उन सभी के लिए खुले हैं, जिन्हें अखिलेश यादव के नेतृत्व और समाजवादी पार्टी की विचारधारा पर भरोसा है।'
हालाँकि, चंद्रशेखर आजाद के प्रस्ताव पर सपा ने कोई टिप्पणी करने से परहेज किया। फखरुल हसन चांद ने यह भी कहा कि मायावती पिछले 10 वर्षों से BJP की नीतियों का समर्थन करती रही हैं, जो किसी से छिपा नहीं है।
डिंपल यादव के बयान पर सपा का पक्ष
सपा सांसद डिंपल यादव ने मायावती पर पलटवार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी 'रंगों की नहीं, पीडीए की लड़ाई' लड़ रही है। इसी बयान को स्पष्ट करते हुए सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा, 'समाजवादी पार्टी मुद्दों की लड़ाई लड़ रही है — पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, गरीब, किसान और मजदूर पर जो अत्याचार हो रहा है, वह किसी से छिपा नहीं है।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'मायावती ने दलित समाज के आरक्षण और उनके मुद्दों को कभी नहीं उठाया' तथा सपा की छात्र सभा की नीली ड्रेस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि 'सपा बाबा साहब के विचारों को मानती है।'
कांग्रेस की सतर्क प्रतिक्रिया
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इस मसले पर सीधी टिप्पणी से बचते हुए कहा, 'अब यह चंद्रशेखर और आकाश आनंद के बीच का मामला है। वे दोनों क्या चर्चा करते हैं या क्या नहीं, इस फैसले, घोषणा या बयान पर हमारे लिए कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।'
यह ऐसे समय में आया है जब बसपा उत्तर प्रदेश में लगातार कमजोर होती जा रही है और दलित राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें तेज हैं। आने वाले दिनों में आकाश आनंद का अगला कदम उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।