3 सितंबर 2026
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मायावती ने आकाश आनंद को बताया अपरिपक्व, यूपी में बड़ी जिम्मेदारी देने से किया इनकार

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मायावती ने आकाश आनंद को बताया अपरिपक्व, यूपी में बड़ी जिम्मेदारी देने से किया इनकार

सारांश

मायावती ने अखिल भारतीय बैठक में भतीजे आकाश आनंद को 'अपरिपक्व' करार देते हुए बड़ी जिम्मेदारी देने से साफ इनकार किया। कांशीराम की विरासत का हवाला देकर उन्होंने परिवारवाद से दूरी का संकल्प दोहराया और यूपी, उत्तराखंड, पंजाब में चुनावी तैयारी तेज करने के निर्देश दिए।

मुख्य बातें

मायावती ने 3 सितंबर 2026 को लखनऊ में बसपा की अखिल भारतीय बैठक बुलाई।
भतीजे आकाश आनंद को 'अभी और परिपक्व होने की जरूरत' बताते हुए यूपी में कोई बड़ी जिम्मेदारी देने से इनकार किया।
मायावती ने कांशीराम की विरासत का हवाला देकर परिवार के सदस्यों को पद न देने की नीति दोहराई।
उत्तर प्रदेश , उत्तराखंड और पंजाब में चुनाव से पहले सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर 'खुली संगोष्ठी' आयोजित करने के आदेश; दिल्ली कार्यकर्ता बहुजन समाज प्रेरणा स्थल पर श्रद्धांजलि देंगे।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 3 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित पार्टी की अखिल भारतीय बैठक में साफ कर दिया कि उनके भतीजे आकाश आनंद को अभी और परिपक्वता की दरकार है, इसलिए उन्हें फिलहाल पार्टी की कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपना उचित नहीं होगा। इस बैठक में पिछले कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ पदाधिकारियों को दिशा-निर्देशों के ईमानदार अनुपालन की कड़ी हिदायत भी दी गई।

आकाश आनंद पर मायावती का स्पष्ट संदेश

मायावती ने बैठक में कहा, 'इस पर अमल करते हुए ही मैंने आकाश आनंद को पार्टी में कार्य करने की तो इजाजत दी है, लेकिन इस मामले में आकाश आनंद को अभी और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है। तब तक इनको पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा, जो कि विरोधियों के साम, दाम, दंड, भेद आदि हथकंडों को इस्तेमाल करके चुनाव में हानि पहुंचाने से बचने के लिए भी समय की जरूरत है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब बसपा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में आगामी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है।

कांशीराम की विरासत और पारिवारिक राजनीति पर रुख

मायावती ने बसपा के संस्थापक कांशीराम की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि जिस प्रकार कांशीराम ने अपने परिवार के लोगों को पार्टी कार्य में सहयोग की छूट तो दी थी, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर कोई पद देने के वे खिलाफ थे — उसी संकल्प पर वे स्वयं भी पूरी तरह कायम हैं। उन्होंने कहा कि मिशन के लिए 'न कोई अपना है, न पराया — जो बसपा व बहुजनों के हित में काम करे, उसका स्वागत है।'

गौरतलब है कि आकाश आनंद को पहले बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया था और उन्हें मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जा रहा था। बाद में उनकी जिम्मेदारियाँ घटाई गई थीं। अब इस सार्वजनिक बयान से पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को लेकर संकेत और स्पष्ट हो गए हैं।

राष्ट्रीय मुद्दों पर बसपा की चिंता

मायावती ने बैठक में देश की आंतरिक व बाहरी चुनौतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में जारी संघर्ष के बीच भारत की नीति और रणनीति मजबूत होनी चाहिए। इसके अलावा बढ़ती महंगाई, प्राकृतिक आपदाओं और युवा पीढ़ी (जेन-जी व जेन-अल्फा) की समस्याओं को लेकर भी केंद्र व राज्य सरकारों से गंभीरता बरतने की अपील की।

चुनावी तैयारी और कांशीराम पुण्यतिथि के निर्देश

बैठक में मायावती ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में चुनाव की घोषणा से पहले ही सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। इससे पहले उन्होंने 25 अगस्त को पंजाब और 31 अगस्त को उत्तर प्रदेश की अलग-अलग बड़ी पार्टी बैठकें भी बुलाई थीं।

9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर 'खुली संगोष्ठी' आयोजित करने के निर्देश देते हुए मायावती ने कहा कि इन कार्यक्रमों में बसपा के प्रदेश व मुख्य जोन प्रभारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। बसपा दिल्ली के कार्यकर्ता नई दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज रोड स्थित 'बहुजन समाज प्रेरणा स्थल' पर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे, जहाँ कांशीराम का अस्थिकलश प्रतिष्ठापित है।

इस घोषणा के साथ बसपा की आगामी रणनीति और नेतृत्व की दिशा अब और स्पष्ट होती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह संकेत देता है कि पार्टी में रणनीतिक पुनर्गठन जारी है। कांशीराम की विरासत का आह्वान भावनात्मक रूप से शक्तिशाली है, लेकिन असली सवाल यह है कि मायावती के बाद बसपा का नेतृत्व किसके हाथ जाएगा — यह अभी भी अनुत्तरित है। यूपी, उत्तराखंड और पंजाब में एक साथ चुनावी तैयारी का निर्देश दर्शाता है कि बसपा संगठनात्मक रूप से सक्रिय होने की कोशिश कर रही है, लेकिन मजबूत जमीनी उपस्थिति के बिना ये निर्देश कितने कारगर होंगे, यह देखना बाकी है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने आकाश आनंद को यूपी में बड़ी जिम्मेदारी क्यों नहीं दी?
मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को अभी और परिपक्व होने की जरूरत है और तब तक उन्हें पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि विरोधियों के हथकंडों से चुनावी नुकसान से बचने के लिए भी यह जरूरी है।
बसपा की अखिल भारतीय बैठक में क्या-क्या फैसले हुए?
3 सितंबर 2026 को लखनऊ में हुई इस बैठक में पिछले कार्यों की समीक्षा, पदाधिकारियों को दिशा-निर्देशों के सख्त अनुपालन की हिदायत, यूपी-उत्तराखंड-पंजाब में चुनावी तैयारी पूर्ण करने के निर्देश और 9 अक्टूबर को कांशीराम पुण्यतिथि कार्यक्रम आयोजित करने के आदेश शामिल थे।
कांशीराम पुण्यतिथि पर बसपा क्या कार्यक्रम आयोजित करेगी?
9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर बसपा 'खुली संगोष्ठी' आयोजित करेगी। बसपा दिल्ली के कार्यकर्ता नई दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज रोड स्थित 'बहुजन समाज प्रेरणा स्थल' पर श्रद्धांजलि देंगे, जहाँ कांशीराम का अस्थिकलश प्रतिष्ठापित है।
मायावती का परिवार को पार्टी में पद देने पर क्या रुख है?
मायावती ने स्पष्ट किया कि वे कांशीराम की उस नीति पर कायम हैं जिसके तहत परिवार के सदस्यों को पार्टी कार्य में सहयोग की छूट है, लेकिन चुनाव लड़ाने या सरकार में पद देने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि मिशन के लिए उनका 'न कोई अपना है, न पराया।'
बसपा ने उत्तर प्रदेश और पंजाब के लिए क्या तैयारी की है?
मायावती ने यूपी, उत्तराखंड और पंजाब में चुनाव की घोषणा से काफी पहले सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले 25 अगस्त को पंजाब और 31 अगस्त को उत्तर प्रदेश की अलग-अलग बड़ी पार्टी बैठकें भी आयोजित की जा चुकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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