मायावती का कड़ा अनुशासनी कदम: अशोक सिद्धार्थ दोबारा बसपा से निष्कासित, रणधीर सिंह बेनीवाल भी बाहर
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 2 अगस्त 2026 को संगठनात्मक अनुशासन के मामले में एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को दूसरी बार पार्टी से निष्कासित कर दिया। साथ ही वरिष्ठ नेता रणधीर सिंह बेनीवाल (निवासी जिला सहारनपुर) को भी तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया। दोनों नेताओं पर पार्टी के दिशा-निर्देशों की अवहेलना और लगातार अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अशोक सिद्धार्थ का निष्कासन: पूरा घटनाक्रम
मायावती ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर विस्तृत पोस्ट के माध्यम से बताया कि अशोक सिद्धार्थ को पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी टिकट वितरण को लेकर बसपा महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष के साथ समन्वय न बनाने की वजह से निष्कासित किया गया था। बाद में उन्हें इस शर्त पर पार्टी में वापस लिया गया था कि वे उत्तर प्रदेश में कोई जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे और केवल अन्य राज्यों में पार्टी का जनाधार बढ़ाने का काम करेंगे।
मायावती के अनुसार, सिद्धार्थ को बसपा कोआर्डिनेटर के रूप में कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन वहाँ भी अनुशासनहीनता की शिकायतें लगातार आती रहीं। बार-बार चेतावनी देने के बाद भी सुधार न होने पर पहले उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया और फिर यूपी वापसी की खबरों को पार्टी में भ्रम फैलाने का षड्यंत्र बताते हुए 2 अगस्त को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया।
रणधीर सिंह बेनीवाल पर भी गिरी गाज
मायावती ने स्पष्ट किया कि रणधीर सिंह बेनीवाल को बसपा कोआर्डिनेटर के रूप में पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके विरुद्ध भी अनुशासनहीनता और पार्टी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की खबरें लगातार आती रहीं, जिसके चलते उन्हें भी पार्टी एवं आंदोलन के हित में तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया है।
संगठनात्मक फेरबदल और नई नीति
मायावती ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर किए गए संगठनात्मक फेरबदल में रामजी गौतम, राज्यसभा सांसद, को पंजाब स्टेट का पुनः प्रभारी बनाया गया है। वे आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव ही नहीं, बल्कि लोकसभा आमचुनाव तक यह जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। इसके साथ ही बसपा नेतृत्व ने यह नीतिगत निर्णय लिया है कि यूपी निवासी जो भी वरिष्ठ पदाधिकारी अन्य राज्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उन्हें यूपी में किसी भी पार्टी जिम्मेदारी पर नहीं लगाया जाएगा।
मायावती की कार्यकर्ताओं और मीडिया से अपील
मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे ऐसे 'शरारती और षड्यंत्रकारी तत्वों' से सावधान रहें जो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए चल रहे अभियान को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वे 'गरीबों, दलितों, शोषितों और उपेक्षितों की अंबेडकरवादी पार्टी' बसपा के विरुद्ध विरोधी दलों के षड्यंत्र का हथियार न बनें और मिथ्या तथ्यों का प्रचार न करें।
यह ऐसे समय में आया है जब बसपा यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है और पार्टी में अनुशासन बनाए रखना नेतृत्व की प्राथमिकता बन गई है। आने वाले दिनों में पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे में और फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।