2 अगस्त 2026
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मायावती का कड़ा अनुशासनी कदम: अशोक सिद्धार्थ दोबारा बसपा से निष्कासित, रणधीर सिंह बेनीवाल भी बाहर

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मायावती का कड़ा अनुशासनी कदम: अशोक सिद्धार्थ दोबारा बसपा से निष्कासित, रणधीर सिंह बेनीवाल भी बाहर

सारांश

मायावती ने एक ही दिन में दो वरिष्ठ नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया — अशोक सिद्धार्थ दूसरी बार निष्कासित, रणधीर सिंह बेनीवाल भी बाहर। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बसपा में अनुशासन की यह सख्त कार्रवाई संगठन को कसने का स्पष्ट संकेत है।

मुख्य बातें

बसपा प्रमुख मायावती ने 2 अगस्त 2026 को पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को दूसरी बार पार्टी से निष्कासित किया।
वरिष्ठ नेता रणधीर सिंह बेनीवाल (जिला सहारनपुर) को भी तत्काल प्रभाव से बसपा से बाहर किया गया।
दोनों पर पार्टी दिशा-निर्देशों की अवहेलना और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए गए।
राष्ट्रीय फेरबदल में रामजी गौतम , राज्यसभा सांसद, को पंजाब का पुनः प्रभारी बनाया गया।
बसपा की नई नीति: यूपी निवासी पदाधिकारियों को यूपी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
मायावती ने यूपी विधानसभा चुनाव अभियान को बाधित करने के षड्यंत्र की चेतावनी दी।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 2 अगस्त 2026 को संगठनात्मक अनुशासन के मामले में एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ को दूसरी बार पार्टी से निष्कासित कर दिया। साथ ही वरिष्ठ नेता रणधीर सिंह बेनीवाल (निवासी जिला सहारनपुर) को भी तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया। दोनों नेताओं पर पार्टी के दिशा-निर्देशों की अवहेलना और लगातार अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

अशोक सिद्धार्थ का निष्कासन: पूरा घटनाक्रम

मायावती ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर विस्तृत पोस्ट के माध्यम से बताया कि अशोक सिद्धार्थ को पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी टिकट वितरण को लेकर बसपा महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष के साथ समन्वय न बनाने की वजह से निष्कासित किया गया था। बाद में उन्हें इस शर्त पर पार्टी में वापस लिया गया था कि वे उत्तर प्रदेश में कोई जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे और केवल अन्य राज्यों में पार्टी का जनाधार बढ़ाने का काम करेंगे।

मायावती के अनुसार, सिद्धार्थ को बसपा कोआर्डिनेटर के रूप में कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन वहाँ भी अनुशासनहीनता की शिकायतें लगातार आती रहीं। बार-बार चेतावनी देने के बाद भी सुधार न होने पर पहले उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया और फिर यूपी वापसी की खबरों को पार्टी में भ्रम फैलाने का षड्यंत्र बताते हुए 2 अगस्त को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया।

रणधीर सिंह बेनीवाल पर भी गिरी गाज

मायावती ने स्पष्ट किया कि रणधीर सिंह बेनीवाल को बसपा कोआर्डिनेटर के रूप में पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके विरुद्ध भी अनुशासनहीनता और पार्टी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की खबरें लगातार आती रहीं, जिसके चलते उन्हें भी पार्टी एवं आंदोलन के हित में तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया गया है।

संगठनात्मक फेरबदल और नई नीति

मायावती ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर किए गए संगठनात्मक फेरबदल में रामजी गौतम, राज्यसभा सांसद, को पंजाब स्टेट का पुनः प्रभारी बनाया गया है। वे आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव ही नहीं, बल्कि लोकसभा आमचुनाव तक यह जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। इसके साथ ही बसपा नेतृत्व ने यह नीतिगत निर्णय लिया है कि यूपी निवासी जो भी वरिष्ठ पदाधिकारी अन्य राज्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उन्हें यूपी में किसी भी पार्टी जिम्मेदारी पर नहीं लगाया जाएगा।

मायावती की कार्यकर्ताओं और मीडिया से अपील

मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे ऐसे 'शरारती और षड्यंत्रकारी तत्वों' से सावधान रहें जो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए चल रहे अभियान को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वे 'गरीबों, दलितों, शोषितों और उपेक्षितों की अंबेडकरवादी पार्टी' बसपा के विरुद्ध विरोधी दलों के षड्यंत्र का हथियार न बनें और मिथ्या तथ्यों का प्रचार न करें।

यह ऐसे समय में आया है जब बसपा यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है और पार्टी में अनुशासन बनाए रखना नेतृत्व की प्राथमिकता बन गई है। आने वाले दिनों में पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे में और फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

मायावती के भीतरी घेरे से बाहर के नेताओं की स्वायत्तता लगातार सिकुड़ती जा रही है। यह प्रवृत्ति बसपा के उस पुराने ढाँचे को दर्शाती है जहाँ संगठन में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए कोई जगह नहीं — लेकिन यही कड़ाई कभी-कभी अनुभवी नेताओं को दूर भी कर देती है, जिसका खामियाजा चुनावी प्रदर्शन में दिख सकता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक सिद्धार्थ को बसपा से दूसरी बार क्यों निष्कासित किया गया?
अशोक सिद्धार्थ को पहले महाराष्ट्र चुनाव में टिकट वितरण को लेकर अनुशासनहीनता के कारण निष्कासित किया गया था। वापसी के बाद कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बसपा कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी में भी वे खरे नहीं उतरे, और यूपी वापसी की खबरों को पार्टी में भ्रम फैलाने का षड्यंत्र मानते हुए 2 अगस्त को उन्हें दोबारा निष्कासित कर दिया गया।
रणधीर सिंह बेनीवाल को बसपा से क्यों निकाला गया?
रणधीर सिंह बेनीवाल को पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बसपा कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई थी। उनके विरुद्ध लगातार अनुशासनहीनता और पार्टी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की शिकायतें आने पर 2 अगस्त को तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया गया।
बसपा में पंजाब की जिम्मेदारी अब किसे दी गई है?
राष्ट्रीय संगठनात्मक फेरबदल में राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को पंजाब स्टेट का पुनः प्रभारी बनाया गया है। वे आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव तक यह जिम्मेदारी निभाएंगे।
बसपा की नई संगठनात्मक नीति क्या है?
मायावती ने स्पष्ट किया है कि यूपी निवासी जो भी वरिष्ठ पदाधिकारी या कोआर्डिनेटर अन्य राज्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उन्हें उत्तर प्रदेश में किसी भी पार्टी जिम्मेदारी पर नहीं लगाया जाएगा। यह नीतिगत फैसला यूपी चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर लिया गया है।
क्या अशोक सिद्धार्थ को भविष्य में बसपा में वापस लिया जा सकता है?
मायावती ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार अशोक सिद्धार्थ को पार्टी में 'आगे कतई भी वापस नहीं लिया जाएगा।' यह पहले के निष्कासन से अलग है, जब उन्हें शर्तों के साथ वापस लिया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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