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मोहन जोशी: ९ साल ट्रक चलाया, 'भूकंप' से मिली पहचान — एक संघर्षशील अभिनेता की असाधारण कहानी

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मोहन जोशी: ९ साल ट्रक चलाया, 'भूकंप' से मिली पहचान — एक संघर्षशील अभिनेता की असाधारण कहानी

सारांश

नौ साल तक ट्रक चलाया, एक हादसे ने ज़िंदगी बदली, और 'भूकंप' ने दिया बॉलीवुड का दरवाज़ा — मोहन जोशी की कहानी उन तमाम कलाकारों की दास्तान है जिन्होंने संघर्ष को सीढ़ी बनाया। ४७वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तक का यह सफर प्रेरणा से भरपूर है।

मुख्य बातें

मोहन जोशी का जन्म 4 सितंबर 1945 को बेंगलुरु में हुआ; बाद में परिवार पुणे में बस गया।
फिल्मी करियर से पहले उन्होंने लगभग नौ साल तक अपनी ट्रांसपोर्ट कंपनी के लिए स्वयं ट्रक चलाया।
एक गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद उन्होंने ट्रांसपोर्ट छोड़ा और मुंबई में फिल्मी करियर शुरू किया।
फिल्म 'भूकंप' उनके करियर का टर्निंग पॉइंट रही; 'वास्तव' (1999) , 'गुंडा' (1998) और 'मृत्युदंड' (1997) से मिली व्यापक पहचान।
मराठी फिल्म 'घरबाहेर' के लिए 47वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में विशेष उल्लेख से सम्मानित।
हिंदी, मराठी और भोजपुरी — तीनों सिनेमा में सैकड़ों फिल्मों में अभिनय किया।

बॉलीवुड के दमदार चरित्र अभिनेता मोहन जोशी की जीवन-यात्रा महज एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि अदम्य जिजीविषा का प्रमाण है। फिल्मी पर्दे पर खलनायकी के किरदारों से दर्शकों के दिलों में घर करने वाले मोहन जोशी ने एक समय लगभग नौ साल तक ट्रक चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण किया। एक गंभीर सड़क दुर्घटना ने उनकी ज़िंदगी का रुख बदला और फिल्म 'भूकंप' ने उन्हें सिनेमा की दुनिया में स्थापित किया।

प्रारंभिक जीवन और थिएटर से लगाव

मोहन जोशी का जन्म 4 सितंबर 1945 को बेंगलुरु में हुआ। उनके पिता सेना में कार्यरत थे, जिसके कारण परिवार बाद में पुणे में बस गया। उनकी शिक्षा-दीक्षा पुणे में ही हुई। कॉलेज के दिनों में ही उनका झुकाव रंगमंच की ओर हो गया और उन्होंने अनेक नाटकों में भाग लेकर अभिनय की बारीकियाँ सीखीं। थिएटर ने उनके भीतर वह आत्मविश्वास जगाया, जो आगे चलकर उनकी पहचान बना।

ट्रक चालक से अभिनेता तक का संघर्ष

फिल्मी दुनिया में कदम रखने से पहले मोहन जोशी ने अपनी एक ट्रांसपोर्ट कंपनी खड़ी की थी। आर्थिक दबाव इतना था कि कंपनी संभालने के साथ-साथ वे स्वयं ट्रक चलाते थे। यह सिलसिला करीब नौ साल तक चला। इसी दौरान एक दिन ट्रक के साथ एक गंभीर हादसा हुआ, जिसने उनकी ज़िंदगी की दिशा पूरी तरह बदल दी। दुर्घटना के बाद उन्होंने ट्रांसपोर्ट का काम छोड़ने का फैसला किया और एक मित्र की सलाह पर मुंबई का रुख किया।

'भूकंप' से मिली फिल्मी पहचान

मुंबई पहुँचने के बाद मोहन जोशी ने टेलीविजन और फिल्मों में काम करना शुरू किया। फिल्म 'भूकंप' उनके करियर की आधारशिला साबित हुई। इसके बाद उन्हें एक के बाद एक फिल्मों के प्रस्ताव मिलने लगे। 'वास्तव: द रियलिटी' (1999), 'मृत्युदंड' (1997) और 'गुंडा' (1998) जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। उनकी भारी आवाज़, संवाद अदायगी का अंदाज़ और दमदार स्क्रीन प्रेज़ेंस ने उन्हें निर्माताओं की पहली पसंद बना दिया।

बहुआयामी अभिनय और राष्ट्रीय सम्मान

मोहन जोशी की प्रतिभा केवल खलनायकी तक सीमित नहीं रही। 'यशवंत', 'गंगाजल', 'गर्व: प्राइड एंड ऑनर' और 'देऊल बंद' जैसी फिल्मों में उन्होंने कॉमेडी और गंभीर चरित्र भूमिकाएँ भी निभाईं। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ मराठी और भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई और सैकड़ों फिल्मों में काम किया। मराठी फिल्म 'घरबाहेर' में उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया और उन्हें 47वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में विशेष उल्लेख से सम्मानित किया गया।

आगे की राह

मोहन जोशी का सफर यह साबित करता है कि परिस्थितियाँ चाहे जितनी कठिन हों, जुनून और परिश्रम से रास्ता निकल ही आता है। अपने 4 सितंबर के जन्मदिन की पूर्वसंध्या पर उनकी यह कहानी नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि 'घरबाहेर' जैसी मराठी फिल्म ने उनकी वास्तविक अभिनय क्षमता को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई। यह विरोधाभास हिंदी सिनेमा की उस प्रवृत्ति को उजागर करता है जो चरित्र अभिनेताओं को श्रेणियों में बाँध देती है। उनका सफर नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए यह संदेश है कि पहचान देर से मिले, पर मेहनत व्यर्थ नहीं जाती।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन जोशी कौन हैं और वे किस लिए जाने जाते हैं?
मोहन जोशी एक वरिष्ठ भारतीय चरित्र अभिनेता हैं, जो हिंदी, मराठी और भोजपुरी सिनेमा में अपने दमदार खलनायक किरदारों के लिए जाने जाते हैं। 'वास्तव: द रियलिटी', 'गुंडा' और 'मृत्युदंड' उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं।
मोहन जोशी ने फिल्मों में आने से पहले क्या काम किया था?
फिल्मी करियर से पहले मोहन जोशी ने अपनी ट्रांसपोर्ट कंपनी चलाई और आर्थिक कारणों से करीब नौ साल तक स्वयं ट्रक चलाया। एक गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद उन्होंने यह काम छोड़ा और एक मित्र की सलाह पर मुंबई में अभिनय की राह चुनी।
मोहन जोशी के करियर में 'भूकंप' फिल्म का क्या महत्व है?
फिल्म 'भूकंप' मोहन जोशी के सिनेमाई करियर का निर्णायक मोड़ रही। मुंबई आने के बाद इसी फिल्म ने उन्हें उद्योग में पहचान दिलाई, जिसके बाद उन्हें लगातार फिल्मों के प्रस्ताव मिलने लगे।
मोहन जोशी को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार कब और किस फिल्म के लिए मिला?
मोहन जोशी को मराठी फिल्म 'घरबाहेर' में उनके अभिनय के लिए 47वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में विशेष उल्लेख से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी बहुआयामी अभिनय प्रतिभा की राष्ट्रीय स्वीकृति थी।
मोहन जोशी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
मोहन जोशी का जन्म 4 सितंबर 1945 को बेंगलुरु में हुआ था। उनके पिता सेना में थे, जिसके कारण परिवार बाद में पुणे में स्थायी रूप से बस गया और उनकी शिक्षा वहीं हुई।
राष्ट्र प्रेस
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